खरीफ मौसम में अरबी की उन्नत खेती करें

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अरबी की उन्नतशील किस्में

इंदिरा अरबी – इसे सिंचित और असिंचित दोनो क्षेत्रो में सफलतापूर्वक की जा सकती है। यह किस्म 200-210 दिन में तैयार हो जाती है, इसकी औसत उपज 250-275 क्विंटल प्रति हेक्टयर है।

नरेन्द्र अरबी 1 – यह अरबी की अगेती किस्म है जो 170-180 दिन में तैयार हो जाती है। इसकी पत्तियों का भी उपयोग किया जाता है। इसकी औसत उपज 150-160 क्विंटल प्रति हेक्टयर है।

आजाद अरबी- यह भी अरबी की अगेती और अच्छी उपज देने वाली प्रजाति है। यह 140-150 दिन में तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज 290-300 क्विंटल प्रति हेक्टयर है।

पंजाब अरबी: यह किस्म 170-180 दिन में तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज 220-230 क्विंटल प्रति हेक्टयर है।

पंचमुखी – यह किस्म मध्यम अवधि की है यह 190-200 दिन में तैयार हो जाती है। प्रजाति के नाम के अनुसार इसमें पांचमुख पुत्री कंदिकाएं पायी जाती हंै। इसकी औसत उपज 225-230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
इसके अतिरिक्त श्री रश्मि, व्हाइट गौरेया, श्री पल्लवी अरबी की प्रमुख प्रजातियां है ।

बीज की मात्रा एवं उपचार

अरबी की 18-20 क्विंटल प्रकन्द प्रति हेक्टेयर आवश्यकता पड़ती है और एक प्रकन्द का वनज 20-25 ग्राम हो।
बुवाई से पूर्व प्रकन्दों का उपचार करें, प्रकन्द उपचार के लिए मैंकोजेब$मेटालौक्जिल 3 ग्राम/ली. पानी की दर से घोल बनाकर 25-30 मिनट तक प्रकन्द हो डुबोकर रखें इसके पश्चात स्ट्रेप्टोसाइकिलीन 5 ग्राम प्रति 20 ली. पानी की दर से मिलाकर उपचारित करें। तत्पश्चात 3-4 घंटे छाया में सुखाने के पश्चात बुवाई करें।

प्रकन्द रोपण विधि

मेडऩाली विधि – खेत तैयार करने के पश्चात् 603 45 से.मी. की दूरी पर मेड़ बनाकर 5 से.मी. गहराई पर प्रकन्दो की बुवाई करते हंै।
नालीमेड़ विधि – इस विधि से 60 से.मी. की दूरी पर नाली बना लेते है और 40-45 से.मी. की दूरी पर प्रकन्दो की बुवाई करते है। रोपण के 60 दिन के पश्चात खाद डालकर फसल पर मिट्टी चढ़ाते है ।

खाद एवं उर्वरक

अरबी की खेती के लिए 12-15 टन गोबर की खाद यदि खाद उपलब्ध नहीं है तो 5 ली. ट्राईकोडर्मा, 2 ली. जेड.एस.बी., 2 ली. के. एस. बी. 50 किलो गोबर की खाद में मिलाकर खेत में छिड़काव करें साथ ही नाइट्रोजन 80 कि.ग्रा., फास्फोरस 60 कि.ग्रा. और पोटाश 80 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें। नत्रजन की आधी मात्रा, फास्फोरस और पोटाष की पूरी मात्रा खेत के तैयारी के समय उपयोग करें, शेष नत्रजन की मात्रा दो भागों में टापड्रेसिंग के रूप में देें।

रोग एवं नियंत्रण

पत्तीधब्बा रोग – इस रोग से प्रभावित पत्तियां छोटे वृत्ताकर धब्बे बनने लगते हैं, जिनके किनारे पर बैंगनी और मध्य भाग राख के समान हो जाता है। इस रोग के नियंत्रण हेतु मैंकोजेब 2.5 ग्राम प्रति ली. पानी की दर से छिड़काव करें।
पत्ती अंगमारी रोग – इस रोग से प्रभावित पत्तियों पर छोटे- छोटे गोल या अण्डाकार भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे फैलकर डंठल को भी प्रभावित करते हंै, इसके प्रभाव से प्रकन्द का भी विकास रूक जाता है । इसके नियंत्रण हेतु प्रारम्भिक अवस्था में रिडोमिल जेड एम-72 का 2.5 ग्राम प्रति ली. पानी की दर से छिड़काव करें।
प्रकन्द सडऩ रोग – यह भण्डारण के समय अत्यधिक छति पहुंचाता है। इसमें प्रकन्द के ऊपरी सतह पर सूखा फफूंद चूर्ण बिखरा रहता है। इसके नियंत्रण हेतु 5 ग्राम स्ट्रप्टोसाइकिलीन प्रति 20 ली. पानी से उपचारित कर भण्डारण करें।

कीट एवं नियंत्रण

तम्बाकू की इल्ली – तम्बाकू की इल्ली हरी पत्तियों को खा जाती हंै । केवल शिराएं ही दिखाई देते हंै, इसके नियंत्रण हेतु प्रोफेनोफास 2 एम.एल. प्रति ली. पानी की दर से छिड़काव करें।

माहू एवं थ्रिप्स – इसके कीट पत्तियों के रस चूसकर क्षति पहुंचाते है। इसमें पत्तियां छोटी, पीली एवं ऊपर की तरफ सिकुड़ जाती है। इसके नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोरोप्रिड 6 एम.एल. 15 ली. पानी के साथ घोल बनाकर छिड़काव करें।

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