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स्वामित्व योजना: ग्रामीणों को मिला संपत्ति का कानूनी अधिकार, जानें इसके फायदे

20 जनवरी 2025, नई दिल्ली: स्वामित्व योजना: ग्रामीणों को मिला संपत्ति का कानूनी अधिकार, जानें इसके फायदे – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वामित्व योजना के तहत देशभर में 65 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्डों का वितरण किया। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति का अधिकार सुनिश्चित करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। दिल्ली से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने लाभार्थियों से संवाद भी किया।

मध्यप्रदेश के 15.63 लाख लाभार्थियों समेत देशभर के 50 हजार से अधिक गांवों में संपत्ति कार्ड वितरित किए गए। प्रधानमंत्री ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह ग्रामीण विकास को नई दिशा देगा।

ग्रामीण संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार

स्वामित्व योजना, जिसे 2020 में शुरू किया गया था, के तहत ड्रोन तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण संपत्तियों का सर्वेक्षण और जीआईएस प्रणाली से नक्शा तैयार किया गया। अब तक देश के लगभग आधे गांवों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और 2.25 करोड़ ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड प्रदान किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना से 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक गतिविधियों का रास्ता खुलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संपत्ति अधिकारों के अभाव में गरीबों की संपत्ति “डैड कैपिटल” बन जाती है, जिसका वे उपयोग नहीं कर पाते। इस योजना से ग्रामीण संपत्तियों का कानूनी दस्तावेज तैयार हुआ है, जिससे विवादों की संभावना कम होगी और संपत्ति का आर्थिक उपयोग संभव हो सकेगा।

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संयुक्त राष्ट्र सर्वेक्षण का उल्लेख

प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि प्रॉपर्टी राइट्स 21वीं सदी की एक बड़ी चुनौती है। कई देशों में गरीबों के पास संपत्ति अधिकार नहीं हैं, जिससे उनकी संपत्ति का उपयोग आर्थिक गतिविधियों के लिए नहीं हो पाता। स्वामित्व योजना इस समस्या का समाधान प्रदान करती है।

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प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में इस योजना को अहम बताया। कई राज्यों में संपत्ति अधिकार पत्रों में महिलाओं के नाम शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना की रजिस्ट्री में भी महिलाओं का नाम जोड़ा गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामित्व योजना महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना से ग्राम पंचायतें आर्थिक रूप से सशक्त होंगी। आपदाओं के बेहतर प्रबंधन और ग्रामीणों को समय पर क्लेम मिलने में भी यह योजना सहायक होगी।

भू-अधार नंबर और डिजिटलीकरण

देश में अब तक 23 करोड़ भू-अधार नंबर जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ ही भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण संपत्तियों का डेटा सुरक्षित और सुलभ हो सके।

मध्यप्रदेश में 15 लाख से अधिक लाभार्थी

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में हितग्राहियों को संपत्ति कार्ड वितरित किए। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीणों को न केवल संपत्ति का अधिकार देती है, बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाती है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सिंचाई क्षमता बढ़ाने और किसानों को खुशहाल बनाने की योजना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सूबे में सिंचित भूमि का दायरा 48 लाख हेक्टेयर तक बढ़ा है, जिसे अगले पांच वर्षों में एक करोड़ हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले 7 रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए गए हैं। आने वाले समय में जिला स्तर पर भी ऐसे कार्यक्रम किए जाएंगे।

स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण संपत्तियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को अपने अधिकार स्पष्ट रूप से मिल सकें। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विवादों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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