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किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)

राजस्थान में सामुदायिक सोलर सिंचाई से किसानों का पलायन रूका

19 जुलाई 2024, भोपाल: राजस्थान में सामुदायिक सोलर सिंचाई से किसानों का पलायन रूका – दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर जिले के हमीरपुरा गांव में सामुदायिक सौर ऊर्जा चालित सिंचाई प्रणाली ने किसानों की किस्मत बदल दी है। इसने उन्हें प्रदूषण फैलाने वाले डीजल पंपों और बारिश पर निर्भरता से मुक्ति दिलाई है। इस सौर ऊर्जा चालित परियोजना ने न केवल उनकी सिंचाई लागत को कम किया है, बल्कि उन्हें बेहतर आय भी दी है।

डूंगरपुर के किसानों की खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर है, जिसके कारण फसल की सिंचाई की लागत अधिक आती थी और महंगे डीजल पंपों का उपयोग करना पड़ता था। इन पंपों से प्रदूषण के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता था। ग्राम स्वराज समूह ने वाग्धारा के ‘सच्ची खेती’ कार्यक्रम के तहत सामुदायिक सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई प्रणाली लागू की, जिससे करीब 40-50 परिवार और 300 बीघा कृषि भूमि को लाभ मिला है।

सौर ऊर्जा से चलने वाली सिंचाई प्रणाली ने किसानों को महंगे डीजल पंपों से मुक्ति दिलाई है। इससे न केवल सिंचाई की लागत कम हुई है, बल्कि फसल उत्पादन और आय में भी वृद्धि हुई है। अब किसान तीनों मौसम (रबी, खरीफ और जायद) में फसल उगा रहे हैं। गेहूं और मक्का के अलावा वे मूंग, मिर्च, भिंडी, बैंगन, करेला, मूली और पालक की खेती भी कर रहे हैं।

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इस सौर सिंचाई प्रणाली से हमीरपुरा गांव के 40-50 परिवारों को लाभ मिला है और 300 बीघा कृषि भूमि की सिंचाई हुई है। पहले जहां किसान केवल एक फसल उगाते थे और बाकी समय गुजरात के सूरत और अहमदाबाद में मजदूरी करते थे, वहीं अब वे तीनों मौसमों (रबी, खरीफ और जायद) में फसल उगा सकते हैं। किसानों का सालाना सिंचाई खर्च भी लगभग खत्म हो गया है, जिससे उनकी आय और समृद्धि बढ़ रही है।

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हमीरपुर की तुलसी कांति देवी कहती हैं कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनके जैसे कई किसान मूंग, मिर्च, भिंडी, बैगन, करेला, मूली, पालक जैसी सब्जियों की खेती करने लगे हैं और अच्छा उत्पादन भी ले रहे हैं। सिंचाई मुफ्त होने और मजदूरों की कम जरूरत होने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

ग्राम स्वराज समूह ने जलग्रहण क्षेत्र का नक्शा बनाया, पाइपलाइन खोदी और पंप हाउस बनाया। समूह के सदस्य सिंचाई के लिए नियम और मानदंड बनाकर इस प्रणाली का प्रबंधन करते हैं। सौर ऊर्जा सिंचाई प्रणाली ने खेती की श्रम-तीव्रता को कम किया है और पाइपलाइनों के भूमिगत होने के कारण पानी की बर्बादी को भी रोका है।

इस परियोजना के तहत करीब 40 डीजल पंप हटाए गए हैं, जिससे कार्बन फुटप्रिंट में कमी आई है। ग्राम स्वराज समूहों की सक्रियता ने दूरसंचार और सामुदायिक स्वामित्व की भावना को बढ़ावा दिया है। सौर सिंचाई प्रणाली ने किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है।

हमीरपुर की तुलसी कांति देवी कहती हैं, “कई किसानों ने सोलर प्लांट लगाकर मूंग की खेती शुरू की है और अच्छी उपज मिल रही है। एक बीघा में 1.5 क्विंटल मूंग का उत्पादन हुआ है, जिससे अच्छी आमदनी हो रही है।”

इस सामुदायिक सौर सिंचाई प्रणाली से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी यह एक सकारात्मक कदम साबित हुआ है। अब डूंगरपुर के किसान पलायन नहीं कर रहे हैं और अपने गांव में खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

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