फिर किसान का झोला खाली क्यों ?

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(अतुल सक्सेना)

एक समय था जब कहा जाता था कि उत्तम खेती, मध्यम व्यापार। परंतु वर्तमान में स्थितियां बदल चुकी है। अब किसान, नीतियों का सही क्रियान्वयन न होने के कारण बदहाल है। हालांकि विगत वर्षों में देश एवं प्रदेश का उत्पादन बढ़ा है नई एवं उन्नत तकनीकों का भी विकास हुआ है। इस कारण म.प्र. की झोली में लगातार 5वीं बार कृषि कर्मण अवार्ड भी गिर रहा है परंतु किसान का झोला क्यों खाली है यह यक्ष प्रश्न है? किसान की हालत नहीं सुधरी है। इसका सबसे बड़ा कारण है किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता। आजादी के बाद से अब तक किसानों की उपज मूल्यों में मात्र 19 गुना वृद्धि हुई है जबकि उसकी लागत की कीमतों में लगभग 100 गुना वृद्धि हो गई है। यह बड़ा अंतर किसान को आंदोलन करने पर मजबूर करता है तब सरकारें नींद से जागती है। हाल ही में म.प्र. में हुए किसान आंदोलन के बाद सरकार की नींद हराम हो गई है। केंद्र एवं राज्य सरकारें किसान की आमदनी दोगुना करने के उपायों पर माथा पच्ची कर रही है। प्रधानमंत्री ने 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का दिवास्वप्न राज्य सरकारों को दिखाया है जिसे पूरा करने में म.प्र. आगे चल रहा है। नित नई योजनाएं बन रही है घोषणाएं मुख्यमंत्री कर रहे हैं। क्या इनसे किसान को राहत मिलेगी? आय दोगुनी होगी?

लागत आयोग एवं विपणन तथा समिति का गठन

अभी हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने म.प्र. कृषि उत्पाद लागत एवं विपणन आयोग को अस्तित्व में लाने के लिए पद निर्मित करने का निर्णय लिया है। यह आयोग कृषि उत्पाद लागत एवं विपणन की बेहतर सुविधाओं के लिये अनुशंसा करेगा। दूसरी तरफ प्रदेश के चहुमुखी विकास का रोडमैप बनाने के लिये 14 समितियों का गठन किया गया है। कृषि आय दोगुना करने के लिये प्रदेश के कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, उद्यानिकी राज्य मंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीना, सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग, एपीसी श्री पी.सी.मीना, प्रमुख सचिव सहकारिता श्री अजीत केसरी, प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा एवं प्रमुख सचिव उद्यानिकी श्री अशोक वर्णवाल को शामिल कर समिति बनाई गई है। यह समिति आय दोगुनी करने की कार्यवाही के रोडमैप पर नजर रखकर मार्गदर्शन देगी।बेहतर सुविधाओं के लिये अनुशंसा करेगा। दूसरी तरफ प्रदेश के चहुमुखी विकास का रोडमैप बनाने के लिये 14 समितियों का गठन किया गया है। कृषि आय दोगुना करने के लिये प्रदेश के कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, उद्यानिकी राज्य मंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीना, सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग, एपीसी श्री पी.सी.मीना, प्रमुख सचिव सहकारिता श्री अजीत केसरी, प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा एवं प्रमुख सचिव उद्यानिकी श्री अशोक वर्णवाल को शामिल कर समिति बनाई गई है। यह समिति आय दोगुनी करने की कार्यवाही के रोडमैप पर नजर रखकर मार्गदर्शन देगी।सूखे की दस्तकयह कार्यवाही प्रदेश के विकास की दृष्टि से ठीक हो सकती है परंतु दूसरी तरफ राज्य के सभी जिलों में 20 से 40 प्रतिशत तक कम वर्षा हुई है और सूखे ने दस्तक दी है इससे किसान कैसे निपटेगा। खरीफ का जो होगा वह बीत गया अब रबी का क्या होगा यह विचारणीय प्रश्न है? सूखे की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार होने के बाद पता चलेगा कि रबी में किसान को कैसे राहत मिलेगी। सरकार कम वर्षा की स्थिति में उपयुक्त फसलों का बीज तथा सिंचाई की कैसी व्यवस्था करेगी जिससे किसानों को राहत मिले।अगले वर्ष प्रदेश में चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री किसानों को साधने के प्रयास कर रहे है तथा भावान्तर भुगतान जैसी योजनाएं क्रियान्वित कर रहे है परंतु इसमें सावधानी की आवश्यकता है। किसानों से संबंधित मुख्यमंत्री की अन्य घोषणाएं भी केवल चुनावी वादे न रहें इसलिये उन्हें अमली जामा पहनाना आवश्यक है क्या शासकीय नीतियां और सहायता भी अब राजनीति की अवसरवादिता और सत्ता प्राप्ति की संभावना तय करेगी। यदि नहीं तो सरकार को किसानों से किए वादे पूरे करने होंगे जो सरकार की छवि बनाने में मददगार साबित होगें।
प्रमुख सचिव कृषि की महती भूमिका किसानों की आय दोगुना करने के लिये राज्य सरकार तरह-तरह के उपाय एवं योजनाएं बना रही है इसमें प्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि  डॉ. राजेश राजौरा की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि वे विगत 4 वर्षों से कृषि विभाग की कमान सम्हाल रहे है। अब तक इतने लम्बे समय का कार्यकाल किसी भी पूर्व प्रमुख सचिव या सचिव का नहीं रहा। इस लम्बे कार्यकाल के लिये उन्होंने मुख्यमंत्री का विश्वास अर्जित किया है। भावान्तर भुगतान योजना जिसकी वर्तमान में दिल्ली से भोपाल, महाराष्ट्र, राजस्थान एवं हरियाणा में चर्चा है वह उन्हीं की देन है। यह अलग बात है कि योजना क्रियान्वित होने के बाद किसान को राहत पहुंचाती है या नहीं। योजना में किसानों का पंजीयन किया जा रहा है।केन्द्र भी पीछे नहींकेंद्र सरकार भी किसानों की आय दोगुना करने को लेकर अपनी योजनाएं गिना रही है। सरकार का कहना है कि बजट में कृषि के लिये 62376 करोड़ का आवंटन किया गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री कहते हैं कि 2022 तक प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, फसल बीमा योजना, स्वाईल हेल्थ कार्ड योजना, ई-नाम योजना, ग्रामीण सड़क विकास योजना एवं परम्परागत कृषि विकास योजना के सहारे किसानों की आय दोगुना करेंगे. परंतु आय तभी बढ़ेगी जब योजनाएं वास्तव में जमीनी हकीकत बनेंगी। केंद्र सरकार जीडीपी के आंकड़ों को क्रीम, पाउडर लगा कर अपना चेहरा चमकाने की जुगत कर रही है पर बनारस से बडऩगर और बल्लारशाह तक किसानों की पेशानी पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही है। कम वर्षा ने खरीफ में कमी की अब सूखा रबी में न सुखाए, इससे किसान को बचाना होगा, क्योंकि मानसून विदा हो रहा है किसान को फिर जूझना होगा।

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