खाली समय में थ्रेशर का रखरखाव

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थ्रेशर का उपयोग केवल फसलों के कटने के बाद केवल एक से दो महीने ही होता है। उसके उपरांत थ्रेशर को किसी सुरक्षित स्थान में रख देना चाहिए ताकि थ्रेशर के पुर्जो का मौसम और पानी से खराब होने की संभावना न हो। इसके लिए इस बारे में निम्नलिखित अनुदेशों का पालन करना चाहिए।

  • थ्रेशर के उपरांत थ्रेशर को खाली चलाना चाहिए जिससे उसमे से बचे हुए फसलों के डंठल और दाने सारे बाहर निकल जाएं।
  • थ्रेशर को शक्ति स्त्रोत से खोलकर अलग कर देना चाहिए और छलनियों से सारा भूसा, डंठल और दाने निकाल लेना चाहिए। जहां तक हो पंखे के रास्ते को, जिससे हवा खींची या बाहर फेंकी जाती है, साफ कर लेना चाहिए।
  • सभी रबड़ की बेल्ट, पट्टे बगैरह को निकाल देना चाहिए और टेग लगाकर ऐसे सुरक्षित स्थान पर रख लेना चाहिए जहां गर्मी, बरसात और धूल न आती हो।
  • थ्रेशर को पानी से धो लें और धूप मे रख कर सुखा लें।
  • थ्रेशर के पुर्जो की भली-भांति जांच कर लें और जिन पुर्जों की मरम्मत या बदली करनी हो, कर लें ताकि थ्रेशिंग के वक्त काम में बाधा न पड़े।
  • थ्रेशर के मरम्मत और पुर्जों के बदलने के बाद थ्रेशर का ग्रीस या मोबिल आयल की परत लगा देनी चाहिए ताकि उनमें जंग नहीं लगे।
  • यदि छलनियाँ ठीेक दशा मे हो तो छलनियों पर भी ग्रीस या मोबिल आयल की परत लगा देना चाहिए।
  • जिन पुर्जों में ग्रीस भरी जाती हो या तेल लगाया जाता हो उन्हे पहले मिट्टी के तेल से साफ कर लेना चाहिए और फिर उनमें ताजी ग्रीस भर लेनी चाहिए या तेज आवश्यकता अनुसार लगा देना चाहिए।
  • जहां तक संभव हो सारे रास्ते ठीेेक प्रकार बंद कर लेने चाहिए जिन से धूल अंदर जाने का खतरा हो।
  • इसके उपरांत थ्रेशर को किसी ऐसी सूखी जगह मे खड़ी करना चाहिए जहां पानी न भरा हो। अगर कोई शेड उपलब्ध न हो तो पालीथिन शीट, त्रिपाल या किसी वाटरप्रूफ कैनवास की शीट से ढ़क लेना चाहिए।
 थ्रेशर में आने वाली सम्भावित त्रुटियाँ और उनका निवारण:
थ्रेशर मे गहाई करते समय विभिन्न प्रकार की त्रुटियाँ व कठिनाइयाँ आती हैं। इनमे से समान्य रूप से आने वाली त्रुटियाँ, उनके कारण और उपचार निम्न सारणी में दिये गए हैं:-
  त्रुटियाँ                          कारण                                           निवारण   
  • अनाज का बिना थ्रेशिंग हुए ही निकल जाना
सिलेंडर का कम गति से चलना, बहुत कम फसल को डालना, कनकेव और सिलेंडर के बीच अधिक दूरी होना सिलेंडर की गति बढ़ाएं और संस्तुति गति के बराबर रखें।  फसल उचित मात्रा में डालें कनकेव और सिलेंडर के बीच की झिर्री कम करें।
  • बड़े – बड़े आकार के भूसे निकलना
सिलेंडर की गति मंद होना, सिलिंडर तथा कनकेव के बीच के दूरी का अधिक होना, फसल गीली होना उचित आकार की पुली लगाकर सिलेंडर की गति बढ़ाएं। नट-बोल्टों के सही समायोजन से सिलेंडर तथा कनकिव के बीच की दूरी को उचित बनाएं। सूखी फसल की ही गहराई करें।
  • दानों का टूट जाना
गहराई सिलेंडर की गति तीव्र होना, सिलेंडर तथा कनकेव के बीच की जगह का कम होना, मशीन मे जाने वाली फसल का कम और ज्यादा होना गहराई सिलेंडर की गति को निर्धारित स्तर से अधिक नही होने दें। यह कार्य प्राइम मूवर या थ्रेशर किसी की भी पुली को बदलकर किया जा सकता है। सिलेंडर के बाहरी सिरे तथा कनकेव के बीच की झिर्री नट-बोल्टों के जरिए अधिक कर दें। फसल का समान रूप से डालते रहने का प्रचालन को अभ्यास करवाएं।
  • दाने के साथ भूसे का चले जाना
ब्लोअर/एस्पिरेटर की गति मंद होना, छलनियों का समुचित प्रकार से नहीं लगा होना पुली बदलकर ब्लोअर/एस्पिरेटर की गति बढ़ा दें। हवा का बहाव ज्यादा करें। जिन नट-बोल्टों के जरिए छलनियाँ टंगी रहती है, उन्हें कम कर छलनियों का ढ़लान कम कर दें। चूशक पाइप तथा स्क्रीन के बीच दूरी कम कर दें।
  • भूसों के साथ दानों का  चला जाना
पंखे की गति का तेज होना ब्लोअर की गति कम कर दें। हवा वहन के द्वार को छोटा कर दें। छलनियों के छिद्रों को बुश से साफ कर लें।
  • गांठों, मोटे भूसों आदि के साथ दानों का चला जाना
ऊपर की छलनी के छिद्रों का बंद हो जाना, छलनी का ढ़लान उचित नही होना, अनाज को तेजी से हिलाया जाना या स्ट्रोक का जरूरत से ज्यादा लम्बा होना। ऊपर की छलनी को साफ कर दें। छलनी की ढ़लान को नट-बोल्टों की मदद से ठीक प्रकार व्यवस्थित करें। छलनी को बदलकर उचित आकार की छलनी लगाए। सही आकार वाली पुली लगाएं तथा स्ट्रोक को छोटा कर दें।
  • सिलेंडर का अवरूद्ध हो जाना
जरूरत से ज्यादा फसल डाला जाना, बेल्ट का ढ़ीला होना सिलेंडर की गति का बहुत मंद होना, फसल का पूरी तरह सूखा नही होना ,फसल में अधिक और हरे खरपतवार का विद्यमान होना कनकेव की जाली और सिलिंडर के बीच अंतर कम होना। फसल कम और समुचित मात्रा में डाली जाए। बेल्टों की जॉच करके उन्हे कस दें। सिलेंडर की पुली बदलकर या बेल्ट के कसाव के सही समायोजन से गति को ठीक कर लें। सूखी फसल की ही थ्रेशिंग करें। ऐसा प्रयत्न करे कि फसल में कम से कम हरे खरपतवार हो। नट-बोल्टों को कम कर कनकेव झिर्री उचित मात्रा मे रखें।
  • कार्य करते समय थ्रेशर में कंपन होना
थ्रेशर के विभिन्न अंगो का फ्रेम से ठीक से नहीं जुड़ा होना, किसी पुर्जों का घिसा पिटा होना,फ्लाई व्हील का ठीक से संतुलित न होना। फ्रेम के विभिन्न अंगो को ठीक से कस दें। घिसे पिटे पुर्जों को बदल दें। फ्लाई व्हील को संतुलित करें।
  • समूचे थ्रेशर का  सामंजस्य नहीं होना
जरूरत से ज्यादा या असमान रूप से फसल डालना। कनकेव जाली का अवरूद्ध होना फसल डाले जाने की मात्रा को एकसार रखें। कनकेव जाली की सफाई करें।
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