फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान में खरपतवार प्रबंधन: सीधी बुवाई वाली ऊपरी भूमि (अपलैंड) में समय पर नियंत्रण के लिए ICAR-CRRI की सलाह

शुरुआती खरपतवार नियंत्रण से बढ़ती है धान की बढ़वार

01 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान में खरपतवार प्रबंधन: सीधी बुवाई वाली ऊपरी भूमि (अपलैंड) में समय पर नियंत्रण के लिए ICAR-CRRI की सलाह – सीधी बुवाई वाले अपलैंड धान में शुरुआती अवस्था में खरपतवारों का प्रकोप फसल की वृद्धि और उपज को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। खरपतवार पौधों से नमी, पोषक तत्व और प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे पौधों का विकास धीमा पड़ जाता है।

आईसीएआर-केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRRI), कटक द्वारा जारी जुलाई 2026 के द्वितीय पखवाड़े की कृषि परामर्श के अनुसार, खरपतवार नियंत्रण समय पर करना अत्यंत आवश्यक है। 

अनुशंसित शाकनाशी

संस्थान ने निम्नलिखित विकल्प सुझाए हैं—

  • बिसपायरीबैक सोडियम 10% एससी @ 120 मि.ली. प्रति एकड़, खरपतवार निकलने के 8–10 दिन बाद, जब खरपतवार 2–3 पत्ती अवस्था में हों।

वैकल्पिक रूप से,

  • फेनॉक्साप्रॉप-पी-एथिल 9 EC @ 260 मि.ली. प्रति एकड़, बुवाई के लगभग 20 दिन बाद, जब खेत में पर्याप्त नमी हो। 

जहां शाकनाशी का प्रयोग नहीं किया गया हो

ऐसी स्थिति में पहली हाथ से निराई अथवा फिंगर वीडर या व्हील हो से यांत्रिक निराई करने की सलाह दी गई है।

निराई के बाद 26 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ टॉप ड्रेसिंग के रूप में डालना लाभकारी रहेगा। 

समय पर नियंत्रण क्यों आवश्यक है

खरपतवारों का शुरुआती नियंत्रण फसल को बेहतर पोषण उपलब्ध कराता है तथा बाद की अवस्थाओं में उत्पादन हानि की संभावना को कम करता है।


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