फसल की खेती (Crop Cultivation)

मटर की ये 7 धांसू किस्में देती हैं रिकॉर्डतोड़ पैदावार,  जानिए इनकी खासियत और बुवाई का सही समय

05 नवंबर 2025, नई दिल्ली: मटर की ये 7 धांसू किस्में देती हैं रिकॉर्डतोड़ पैदावार,  जानिए इनकी खासियत और बुवाई का सही समय – मटर की खेती भारतीय किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प रही है, लेकिन अब कृषि विज्ञान और नवाचार के चलते मटर की नई किस्मों ने खेती के खेल को पूरी तरह बदल दिया है। यह किस्में उच्च उपज, कम परिपक्वता समय और रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ आती है। इन किस्मों के जरिए किसान कम समय में बंपर  उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

2023 में कृषि विभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा पेश की गई मटर की ये 7 धांसू किस्में किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। इन किस्मों की विशेषताएँ न केवल उनकी अधिक उपज देने की क्षमता को दिखाती हैं, बल्कि ये किस्में कम समय में परिपक्व भी हो जाती हैं, जिससे किसानों को कम समय में ज्यादा मुनाफा होता है। तो आइए, जानते हैं इन 7 मटर की बेहतरीन किस्मों के बारे में, उनकी खासियत, और इनकी बुवाई का सही समय।  

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1. IPFD 2014-2 (2018)

उपज (क्विंटल/हेक्टेयर): 22-23
परिपक्वता (दिन): 105-110 दिन

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विशेषताएँ: IPFD 2014-2 किस्म, उच्च उत्पादन और कम परिपक्वता के लिए प्रसिद्ध है। यह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र, गुजरात और राजस्थान के दक्षिणी भाग में बेहद सफल साबित हुई है। इसकी कम समय में परिपक्वता किसानों के लिए एक बड़ा फायदा है, क्योंकि यह उन्हें जल्दी मटर की उपज प्राप्त करने में मदद करता है।

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बुवाई का सही समय: इस किस्म की बुवाई अक्टूबर से नवम्बर तक की जानी चाहिए, जिससे इसके परिपक्व होने का समय कम और उपज ज्यादा हो सके।

2. Pant Pea 243 (2018)

उपज (क्विंटल/हेक्टेयर): 19-20
परिपक्वता (दिन): 105-110 दिन
विशेषताएँ:
Pant Pea 243 किस्म भी उच्च उपज और कम परिपक्वता समय के लिए जानी जाती है। यह खासतौर पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के दक्षिणी भाग में खेती के लिए उपयुक्त है। इसके पौधे मजबूत होते हैं और कम समय में अच्छी उपज देने की क्षमता रखते हैं।

बुवाई का सही समय: यह किस्म नवंबर से दिसंबर के बीच बोई जा सकती है, ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके।

3. TRCP 9 (2018)

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उपज (क्विंटल/हेक्टेयर): 21-22
परिपक्वता (दिन): 85-90 दिन


विशेषताएँ: TRCP 9, विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों जैसे त्रिपुरा और आस-पास के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इसकी खासियत यह है कि यह बहुत जल्दी परिपक्व हो जाती है, यानी किसान 85 से 90 दिन के भीतर अपनी फसल तैयार कर सकते हैं। यह किस्म उच्च उपज देने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी रखती है, जिससे इसका उत्पादन अधिक सुरक्षित होता है।

बुवाई का सही समय: TRCP 9 को जून से जुलाई के बीच बोना चाहिए, ताकि यह अपनी पूरी परिपक्वता हासिल कर सके।

4. IPFD 9-2 (2018)

उपज (क्विंटल/हेक्टेयर): 15-16
परिपक्वता (दिन): 105-110 दिन

विशेषताएँ: यह किस्म विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उपयुक्त पाई गई है। इसका उत्पादन अच्छा होता है और यह किसानों को कम समय में फसल प्राप्त करने का मौका देती है। इसकी खास बात यह है कि यह मटर के रोगों से भी बचाव करती है, जिससे उत्पादन सुरक्षित रहता है।

बुवाई का सही समय: यह किस्म अक्टूबर से नवम्बर में बोई जा सकती है, ताकि इसकी परिपक्वता का समय जल्दी हो सके।

5. IPFD 12-2 (2017)

उपज (क्विंटल/हेक्टेयर): 22-25
परिपक्वता (दिन): 110 दिन

विशेषताएँ:
IPFD 12-2 किस्म का उत्पादन क्षमता बहुत अधिक है, और यह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र, गुजरात और राजस्थान के दक्षिणी भाग में सर्वोत्तम परिणाम देती है। इसके पौधे मजबूत होते हैं और कम समय में अधिक मटर की उपज प्राप्त होती है।

बुवाई का सही समय: इस किस्म की बुवाई नवंबर के महीने में करना सबसे उचित होता है।

6. RFP 2009-1 (Indira Matar 1) (2016)
उपज (क्विंटल/हेक्टेयर): 17-18
परिपक्वता (दिन): 100-105 दिन
विशेषताएँ:
यह किस्म मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। Indira Matar 1 किस्म रोग प्रतिरोधक क्षमता से भरपूर है, और इसकी बुवाई करने के बाद, किसान 100-105 दिनों में पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

बुवाई का सही समय: नवंबर से दिसंबर के बीच इसकी बुवाई की जा सकती है।

7. IPFD 11-5 (2016)
उपज (क्विंटल/हेक्टेयर):
19-20
परिपक्वता (दिन): 105-110 दिन

विशेषताएँ: IPFD 11-5 किस्म मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र, गुजरात और राजस्थान के दक्षिणी भाग में अधिकतर सफल पाई गई है। इसकी उच्च उपज और कम परिपक्वता अवधि इसे किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाती है।

बुवाई का सही समय: इसकी बुवाई अक्टूबर से नवम्बर में की जा सकती है, जिससे इसकी फसल जल्दी पककर तैयार हो जाती है।

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