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फसल की खेती (Crop Cultivation)

भिंडी की किस्म ‘काशी चमन’ देती है बंपर पैदावार

14 जुलाई 2022, नई दिल्ली: भिंडी की किस्म ‘काशी चमन’ देती है बंपर पैदावार – भिंडी पूरे भारत में उगाई और खाई जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सब्जियों में से एक है। यह कई पोषक तत्वों में समृद्ध है और विशेष रूप से विटामिन – सी और के में उच्च है। 

भिंडी एंटी-ऑक्सीडेंट से समृद्ध है जो गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करता है, सूजन को रोकता है और समग्र स्वास्थ्य में योगदान देता है। इसमें पॉलीफेनोल्स होते हैं जो दिल और दिमाग के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। भिंडी में लेक्टिन नाम का प्रोटीन भी होता है जो कैंसर रोधी होता है।

वर्ष 2019 में ‘भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर/ICAR) – भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान’, वाराणसी, उत्तर प्रदेश में विकसित भिंडी किस्म – काशी चमन की खेती गर्मी और बरसात दोनों मौसमों में की जा सकती है।

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रोग प्रतिरोधी भिंडी किस्म काशी चमन

यह किस्म येलो वेन मोज़ेक वायरस (YVMV) और ओकरा एनेशन लीफ कर्ल वायरस (OELCV) रोगों के प्रति सहिष्णु है, जो भिंडी की फसल के लिए सबसे खतरनाक रोग हैं और भिंडी की खेती में एक बड़ी समस्या है। इस किस्म की उपज क्षमता इसके क्षेत्र में लगभग 21.66% अधिक है, जिसके कारण यह किस्म उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा में लोकप्रिय हो रही है और लगभग 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में अभी तक बोई गई है।

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बंगालीपुर गांव, अराज़ीलिन ब्लॉक, वाराणसी के उपेंद्र सिंह पटेल ने 10 बिस्वा (0.3 एकड़) भूमि में भिंडी किस्म काशी चमन के बीज बोए थे और इसके उत्पादन के लिए अनुशंसित कृषि पद्धतियों का पालन किया था। उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए अनुशंसित उर्वरकों और रसायनों का भी उपयोग किया।

किसान 
उपेंद्र सिंह पटेल, बंगालीपुर गांव, वाराणसी
काशी चमन की उपज और लाभ

भिंडी की पहली कटाई बुवाई के 46 दिन बाद की गई। उसके बाद, उन्होंने 3 से 4 दिनों के अंतराल में 35 से 40 किलोग्राम भिंडी की नियमित फसल कीकटाईली और अक्टूबर 2021 के अंतिम सप्ताह तक 90 दिनों की अवधि में 668 किलोग्राम की कुल उपज 0.3 एकड़ भूमि से 19 कटाई में ली। खेती की लागत और बाजार में परिवहन लागत को घटाने के बाद रुपये 21,376/- का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ ।

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