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फसल की खेती (Crop Cultivation)

किसानों के लिए फायदेमंद बैंगन की ये 5 हाइब्रिड किस्में, कम लागत में मिलेगी 600 क्विंटल तक उपज

13 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: किसानों के लिए फायदेमंद बैंगन की ये 5 हाइब्रिड किस्में, कम लागत में मिलेगी 600 क्विंटल तक उपज – बदलते मौसम, बढ़ती लागत और पानी की कमी के बीच किसानों के लिए सही फसल और किस्म का चयन बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में बैंगन की उन्नत संकर किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही हैं, जो कम पानी और कम लागत में भी अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं। इन किस्मों की खासियत है कि ये न केवल ज्यादा उपज देती हैं, बल्कि कई प्रमुख रोगों के प्रति सहनशील भी होती हैं, जिससे खेती का जोखिम कम हो जाता है।

1. पीबी-67:
यह किस्म जीबीएयू एंड टी, पंतनगर द्वारा वर्ष 2009 में विकसित की गई है। यह जल्दी तैयार होने वाली किस्म है और जीवाणु विल्ट व फोमोप्सिस रोग के प्रति प्रतिरोधी मानी जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 410 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसके लिए 400 से 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है और इसे मुख्यतः खरीफ मौसम में उगाया जाता है। यह पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के लिए उपयुक्त है।

2. रसिका:
बेजो शीतल सीड्स प्रा. लिमिटेड, जालना द्वारा विकसित यह संकर किस्म लंबे फलों वाली है, जिनकी लंबाई लगभग 16.37 सेंटीमीटर होती है। इसकी उपज क्षमता 400 से 580 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। इसकी बुवाई खरीफ मौसम में की जाती है और इसके लिए 150 से 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज पर्याप्त होता है। यह भी पंजाब, यूपी, बिहार और झारखंड में उपयुक्त मानी जाती है।

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3. शामली:
सेमिनिस सीड्स द्वारा विकसित यह लंबी फल वाली संकर किस्म है, जिसकी उपज क्षमता 350 से 650 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। यह खरीफ मौसम के लिए उपयुक्त है और इसके लिए 150 से 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की जरूरत होती है। यह किस्म भी पंजाब, यूपी, बिहार और झारखंड के लिए उपयुक्त है।

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4. VNR-51C:
वीएनआर सीड्स प्रा. लिमिटेड, रायपुर द्वारा विकसित यह किस्म छोटे गोल फलों वाली है। इसकी उपज क्षमता 450 से 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। इसके लिए 150 से 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है और इसे खरीफ मौसम में बोया जाता है। यह किस्म पंजाब, यूपी, बिहार और झारखंड के किसानों के लिए उपयुक्त है।

5. HABH-8:
आईसीएआर-आईसीईआर, रांची द्वारा विकसित यह संकर किस्म छोटे गोल फलों वाली है। इसकी उपज क्षमता 375 से 544 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। इसकी खासियत यह है कि इसे खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में उगाया जा सकता है। इसके लिए 150 से 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है और यह कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पांडिचेरी के लिए उपयुक्त है।

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