राजस्थान के कृषकों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की विशेष सलाह

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बुवाई के लिए 15-20 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करें

28 जून 2022, राजस्थान के कृषकों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की विशेष सलाह –

मुख्य फसल स्थिति अवस्था/ सलाह
मूंग बुवाई के लिए उपयुक्त किस्में एस एम एल-668, आर एम जी-975, आर एम जी-62, एम एस जी-118, आर एम जी-268, आर एम जी-492 और आर एम जी-344, आई पी एम-02-3 मूंग की उन्नत किस्में हैं। 
ग्वार बुवाई ग्वार फसल की बुवाई का उपयुक्त समय है किसानों को करन ग्वार-1, आरजीसी-1033, आरजीसी-1066, आरजीसी-1038, आरजीसी-1031, आरजीसी-936, आरजीसी-1017 और आरजीसी-1055 उन्नत किस्मों के बीज का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। बुवाई के लिए 15-20 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर का प्रयोग करें, अंगमारी रोग की रोकथाम हेतु बीज को बुवाई से पहले प्रति किलों बीज को 250 पी पी एम एग्रोमाईसीन के घोल से उपचारित करें । पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें।
बाजरा बुवाई बाजरा की बुवाई का उपयुक्त समय जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के तृतीय सप्ताह तक है। किसानों को आर एच बी 223, आर एच बी-234, आर एच बी-177, आर एच बी-173, आर एच बी-154, एच एच बी-299, एच एच बी-67 इम्प्रुड, राज.171, एम पी एम एच-17, एम पी एम एच-21 उन्नत किस्मों के बीज का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। बुवाई के लिए 4-5 किलोग्राम बीज/हेक्टेयर का प्रयोग करें, अरगट रोग के प्रबंधन के लिए बुवाई से पहले बीज को 20% नमक के घोल में उपचारित करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 40-45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी रखें।
मिर्च, टमाटर, बैगन पौध जिन किसानों के पास मिर्च, टमाटर व बैगन की पौध तैयार है, उन्हें खेत में रोपाई की सलाह दी जाती है।
मूंगफली बुवाई मूंगफली की बुवाई उचित समय है आर. जी. 382, टी.जी. 37-ए, आर. जी. 425, आर. जी. 510, आर. जी. 559-3 व गिरनार -2 उन्नत किस्मे है | मूंगफली की झुमका किस्मों के लिए 100 किलोग्राम एवं फेलने वाली किस्मों के लिए 80किलोग्राम बीजदर प्रति हेक्टेयर रखे | मूंगफली को कॉलर रोट रोग से बचाव के लिये बुवाई से पहले प्रति किलों बीज में कार्बोक्सिन 37.5%+थाईरम 3 ग्राम मिलाकर उपचारित करे |
खरीफ फसलें जैसे बाजरा, ज्वार, मक्का मूंग, मोठ और ग्वार इनपुट व्यवस्था बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ और ग्वार आदि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए बीज, उर्वरक और रसायनों की अग्रिम व्यवस्था करें ताकि मानसून की शुरुआत में इन फसलों की समय पर बुवाई की जा सके। और बीज को उपचार के बाद बोया जाना चाहिए।
 
भिण्डी   भिण्डी में सफेदमख्यी और जसिड्स: किसानों को सलाह दी जाती है की भिण्डी में सफेदमख्यी और जसिड्स के नियंत्रण के लिए, 5% नीम के बीज के अर्क या 500 मिलीलीटर नीम के तेल या एसेफेट 75% एसपी @ 1.5 ग्राम या इमिडाक्लाइड 17.8 एसएल @ 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
नींबू   नींबू के बगीचे में रस चूसने वाले कीटों का प्रबंधन के लिए डाइमेथोएट 30% ईसी @ 1.0 मिली या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 % एस एल @ 0.3 मिली प्रति लीटर पानी में मिलकर छिड़काव करें। छिड़काव सुबह या शाम के समय करना चाहिए।
चरी बाजरा/ज्वार   किसानों को सलाह दी जाती है कि बरसात के मौसम के लिए बाजरा और ज्वार जैसी चारे वाली फसल की बुवाई करें|
भेंस / गाय   पशुओं को थनेला रोग से बचाव के लिए दूध निकालने की पूर्ण हस्त विधि का उपयोग करे-

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