खरीफ तिलहनी फसलों की उन्नत किस्में एवं विशेषताएं

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  • अभय दशोरा ,भावना गोस्वामी, दिक्षा चौहान, हिमाँसुमन
  • उर्मिला, आनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन, राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर
    महाराणा प्रताप कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.)

4 जुलाई 2022, खरीफ तिलहनी फसलों की उन्नत किस्में एवं विशेषताएं – भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में तिलहन फसलें अनाज फसलों के बाद दूसरा महत्वपूर्ण स्थान रखती है। देश की विविध कृषि-पारिस्थितिकी स्थितियां 9 वार्षिक तिलहनी फसलें मूंगफली, सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, कुसुम, रामतिल, अरंडी और अलसी को उगाने के लिए अनुकूल है। अधिकांश तिलहन की खेती बारानी पारिस्थितियों में (लगभग 70 प्रतिशत) की जाती है। तिलहनी फसलों की अधिक पैदावार के लिये उन्नत किस्मों का प्रयोग आवश्यक है। विभिन्न तिलहनी फसल सुधार केन्द्रों के शोध के द्वारा जलवायु व क्षेत्र की दृष्टि से विभिन्न तिलहनी फसलों की किस्में विकसित की गई हैं। इस लेख में खरीफ की प्रमुख तिलहनी फसलों जैसे मूंगफली, सोयाबीन एवं तिल की विभिन्न किस्मों का फसलवार विवरण दिया गया है।

सोयाबीन
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    जे.एस. 335: अच्छी अंकुरण क्षमता वाली यह किस्म 100-105 दिन में पककर औसतन 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टर की उपज देती है। इस किस्म में फूल बैंगनी रंग के तथा फलियां रोये-रहित एवं चटकती नहीं हैं। यह किस्म जीवाणु पत्ती धब्बा एवं अंगमारी रोगों के लिये प्रतिरोधी तथा मोजेक एवं तना मक्खी के लिये सहनशील है।
  • एन.आर.सी. 37 (अहिल्या-4): उत्तम अंकुरण क्षमता वाली इस किस्म के फूल सफेद, दाना मध्यम आकार का तथा नाभिका गहरी भूरी होती है। यह किस्म 100-105 दिन में पक कर औसतन 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज देेती है। यह किस्म जीवाणु पत्ती धब्बा, अन्य पत्ती खाने वाले कीटों एवं गर्डल बीटल से मध्यम प्रतिरोधी हैं। इस किस्म में तेल की औसत मात्रा17-18 प्रतिशत तक पायी गई है।
  • जे.एस. 93-05: संकरी पत्ती एवं बैंगनी फूल वाली यह किस्म 90 दिन में पककर औसतन 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टर की उपज देेती है। उत्तम अंकुरण क्षमता वाली इस किस्म का दाना मध्यम आकार, हल्के पीले रंग तथा 100 दानों का वजन 10-12 ग्राम होता है।
  • जे.एस. 95-60: इस किस्म का दाना मोटा एवं तना, पत्तियाँ व फली रोयें-रहित होती है।

तिल
  • टी.सी. 25: यह किस्म 90-100 दिन में पककर, औसतन 4.25 क्विंटल प्रति हेक्टर की उपज देती है। इसमें तेल की मात्रा 49 प्रतिशत होती है।
    आर.टी. 46: यह 85-90 दिन में पककर औसतन 10-12 क्विंटल प्रति हेक्टर की उपज देती है। इसमें तेल की मात्रा 49 प्रतिशत होती है।
    आर.टी. 125: यह किस्म 80-85 दिन पककर, औसतन 10-12 क्विंटल प्रति हेक्टर की उपज देती है।
    आर.टी. 127: यह 75-84 दिन में पककर, औसतन 6-9 क्विंटल प्रति हेक्टर की उपज देती है। इसके बीज में 49.5 प्रतिशत तेल होता है।
    आर. टी. 346 (चेतक): यह किस्म 82-84 दिन में पककर, औसतन 7-9 क्विंटल प्रति हेक्टर की उपज देती है। इसमें तेल की मात्रा 50 प्रतिशत होती है।
    आर. टी. 351: यह किस्म लगभग 85 दिन में पककर, औसतन 7-10 क्विंटल प्रति हेक्टर की उपज देती है। इसमें तेल की मात्रा 50 प्रतिशत होती है।

 

मूंगफली
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    टी.जी. 37 ए: यह मूंगफली की एक झुमका किस्म है जो 95-98 दिन में पककर शुष्क फलियों की औसत उपज 28-30 क्विंटल प्रति हेक्टर देेती है। इसके 100 दानों का वजन 48 ग्राम एवं तेल की मात्रा 48-50 प्रतिशत है। यह किस्म अगेती एवं पिछेती धब्बा, कलिका विषाणु रोग, ग्रीवा विगलन रोग से सामान्य प्रतिरोधी है।
    टी.ए.जी. 24: यह मूंगफली की एक झुमका किस्म है जो 100-105 दिन में पककर शुष्क फलियों की औसत उपज असिंचित वर्षा-पोषित क्षेत्रों में 14-15 क्विंटल प्रति हेक्टर देेती है। इस किस्म में तेल की मात्रा लगभग 48 प्रतिशत है एवं इस किस्म पर टिक्का रोग का प्रकोप कम होता है।
    प्रताप मूँगफली-2: यह किस्म 95-99 दिन में पककर 25-28 क्विंटल प्रति हेक्टर तक शुष्क फलियों की पैदावार देती है। इसके 100 दानों का वजन 40-44 ग्राम होता है एवं इसके दानों में तेल की मात्रा 48-50 प्रतिशत होती है। यह किस्म अगेती व पिछेती धब्बा एवं मूंगफली का कलिका विषाणु रोग से सामान्य प्रतिरोधी है।
    प्रताप राज मूंगफली (यू.जी.-5): यह किस्म 95-97 दिन में पककर 16-22 क्विंटल प्रति हेक्टर तक शुष्क फलियों की पैदावार देती है। इसके दानों में तेल की मात्रा लगभग 48 प्रतिशत होती है। यह किस्म प्रमुख रोगों एवं कीटों से मध्यम प्रतिरोधी है।
    जी.पी.बी.डी.-4: यह मूंगफली की झुमका किस्म है जो 95-99 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इसमें तेल की मात्रा 49 प्रतिशत है। बारानी क्षेत्रों में शुष्क फलियों की औसत में उपज 14-15 क्विंटल प्रति हेक्टर होती है। यह किस्म अगेती व पिछेती धब्बा रोग, विषाणु रोग, ग्रीवा व तना विगलन रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।
    आर. जी. 382: यह एक फैलने वाली किस्म है जो कि 128-133 दिन में पक कर तैयार हो जाती है। यह किस्म रेतीली एवं दोमट भूमि में सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। सिंचित क्षेत्रों में इसकी औसत पैदावार 22-25 क्विंटल प्रति हेक्टर है। इसमें तेल की मात्रा लगभग 55 प्रतिशत है।
    डी.एच.-86: यह मूंगफली की झुमका किस्म हैं। इसकी औसत उपज 30-32 क्विंटल प्रति हेक्टर होती है। 125-128 दिन में पककर तैयार होने वाली इस किस्म में तेल की मात्रा 48-50 प्रतिशत एवं फलियों में दानों का अनुपात 70 प्रतिशत तक होता है। इसके 100 दानों का वजन लगभग 38 ग्राम होता है।
    जी. जी.-7: यह झुमका किस्म 95-100 दिन में पककर शुष्क फलियों की औसत उपज 23-25 क्विंटल प्रति हेक्टर देेती है। इसके 100 दानों का वजन 48 ग्राम तथा दानों में तेल की मात्रा 51 प्रतिशत है।
    प्रताप मूंगफली-3 (यू.जी.-116): यह मूंगफली की एक झुमका किस्म है जो 97-116 दिन में पककर असिंचित अवस्था में शुष्क फलियों की औसतन उपज 20 क्विंटल प्रति हेक्टर एवं सिंचित अवस्था 30-35 क्विंटल प्रति हेक्टर देेती है। इसके 100 दानों का वजन 44 ग्राम एवं तेल की मात्रा 46-48 प्रतिशत है। यह किस्म प्रमुख रोगों एवं कीटों से मध्यम प्रतिरोधी है।
    आर. जी. 425 (राज. दुर्गा): यह एक अद्र्ध-विस्तारित किस्म है जो कि 125-130 दिन में पक कर तैयार हो जाती है। असिंचित क्षेत्रों में इसकी औसत उपज 15-18 क्विंटल तथा सिंचित क्षेत्रों में 32-36 क्विंटल प्रति हेक्टर है। यह किस्म कॉलर गलन रोग से रहित है। शीघ्र

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