फसल की खेती (Crop Cultivation)

बीज उपचार में आईपीएम का महत्व

  • क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र
    मशीनरी स्टोर इमारत, एन.एच.-4, फरीदाबाद (हरियाणा)
    ईमेल : ipmhr07@nic.in

3 जून 2022, बीज उपचार में आईपीएम का महत्व –

बीज उपचार : बीज उपचार एक विधि है, जिसमें पौधों को बीमारियों और कीटों से मुक्त रखने के लिए रसायन, जैव कीटनाशकों या ताप से उपचारित किया जाता हैं अथवा यह बीजों के ऊपर रसायनों या जैव कीटनाशकों को लगाने की प्रक्रिया है, जो बीज के ऊपर या अंदर कीड़ों एवं बीमारियों को वाहकों को रोकता है।

बीज उपचार की विधियाँ – बीज उपचार किसी एक प्रकार से किया जा सकता है।

सूखा बीज उपचार 

बीजों को एक बर्तन में रखें, उसमें अनुमोदित रसायन या जैव कीटनाशक की अनुशंसित मात्रा मिलायें। बर्तन को बन्द करें और अच्छी तरह हिलाएँ/मिश्रित बीज की कुछ घंटों बाद बुवाई करें।

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भीगे बीज उपचार

पालीथिन शीट या पक्के फर्श पर बीज को फैला दें तथा उसमें हल्के पानी का छिडक़ाव करें। अनुमोदित रसायन या जैव कीटनाशक की अनुशंसित मात्रा बीज के ढेर पर डालकर हाथों में दस्ताने पहन कर अच्छी तरह मिलाकर छाया में सुखा लें तथा कुछ घंटों बाद बुवाई करें।

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स्लरी बीज उपचार 

स्लरी या घोल बनाने हेतु अनुमोदित रसायन या जैव कीटनाशक की अनुशंसित मात्रा को आवश्यकतानुसार पानी की मात्रा में किसी टब या बड़े बर्तन में अच्छी तरह मिला लें/अब इस घोल में बीज, कंद या पौधे की जड़ों को 10 से 15 मिनट तक डालकर रखें, फिर छाया में सुखा लें तत्पश्चात बुआई या रोपाई करें।

बीज पैलेटिंग

यह सर्वाधिक परिष्कृत बीज उपचार प्रौद्योगिकी है, जिससे बीज की पैलेटिबिलिटी तथा हैंडलिंग बेहतर करने के लिए बीज का शारीरिक आकार बदला जाता है। पैलेटिंग के लिए विशेष अनुप्रयोग मशीनरी तथा तकनीकों की आवश्यकता होती है। इस विधि द्वारा उपचारित बीज व्यावसायिक रूप से बाजार में उपलब्ध होते हैं।

बीजोपचार के उद्देश्य
  • बीज जनित रोगाणुओं को नष्ट करने के लिये।
  • बीजों को मृदाजनित रोगाणुओं के संक्रमण से बचाने के लिये।
  • दलहनी बीजों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणुओं के कल्चर से निषेचित करने के लिये।
  • बीजों की सुषुप्तावस्था को तोडऩे के लिये।
बीज उपचार के लाभ
  • अंकुरित होने वाले बीजों की, मिट्टी और बीज के रोगजनकों/कीटों से सुरक्षा करता है।
  • बीज अंकुरण अच्छा होता है।
  • अधिक प्रबल पौधे होते हैं।
  • फली की फसल में नॉड्यूलेशन बढ़ाता है।
  • आरम्भिक रोगों का प्रभावी नियंत्रण करता है।
  • प्रतिकूल परिस्थितियों में भी एक समान फसल।
  • स्वस्थ पौधों की संख्या अधिक होती है।
ट्राइकोडर्मा से बीज उपचार

ट्राइकोडर्मा से बीज उपचार विभिन्न फसलों के मृदाजनित एवं बीज जनित रोगों जैसे उकठा रोग, गेहूं का करनाल बंट, अन्य फसलों में जड़ विगलन, कंद विगलन, कौलर विगलन, आद्र्रगलन, सफेद तन गलन, फल सडऩ, तनाझुलसा इत्यादि रोगों के कारकों जैसे पीथियम, फाइटोफ्थोरा, राइजोक्टोनिया, स्क्लेरोटीनिया, स्क्लेरोशियम, फ्यूजेरियम इत्यादि को नष्ट कर या उनकी वृद्धि रोक कर फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

अलग-अलग फसलों पर बीजोपचार के लिए अनुमोदित रसायनों तथा जैव कीटनाशकों की अधिक जानकारी के लिए केन्द्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति की वेबसाइट पर जाएं  (http:ppqs.gov.in/divisions/cib-rc/major-uses-of-pesticides)

प्रमुख फसलों के लिए बीज उपचार की सिफारिश

गेहूं

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कीट/रोग – बंट/फाल्स स्मट/लूज स्मट/कवर्ड स्मट

बीज उपचार : थीरम 75 प्रतिशत डब्ल्यूएस अथवा कार्बोक्सिन 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2-2.5 ग्राम/किलोग्राम बीज अथवा कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 ग्राम/किलोग्राम बीज अथवा कार्बेंडाजिम 25त्न+मैंकोजेब 50 प्रतिशत डब्ल्यूएस 30-35 ग्राम/10 किलोग्राम बीज अथवा डिफेनोकोनाजोल 3 प्रतिशत डब्ल्यूएस अथवा टेबुकोनाजोल 5.4 प्रतिशत डब्ल्यू/डब्ल्यू एफएस 3.0 एम.एल./ 10 किलोग्राम बीज अथवा कार्बोक्सिन 37.5त्न + थीरम 37.5 प्रतिशत डब्ल्यूएस 3.0 ग्राम/किलोग्राम अथवा स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस 1.75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 5 ग्राम/किलोग्राम बीज (बीजोपचार), 05 ग्राम/लीटर (छिडक़ाव) अथवा ट्राइकोडर्मा विरिडी 1.15 प्रतिशत डब्ल्यूपी 4 ग्राम/किलोग्राम बीज।

पत्ता गोभी, फूल गोभी, ब्रोकोली, मूली, सरसों

कीट/रोग – मिट्टी/बीज से जनित रोग (डैम्पिंग ऑफ)
बीज उपचार : ट्राइकोडर्मा विरिडी 1.0 प्रतिशत डब्ल्यूपी 4 ग्राम/किलोग्राम बीज (बीजोपचार), 2.50 किलोग्राम/हेक्टेयर (मिट्टी उपचार) अथवा कैप्टेन 75 प्रतिशत डब्ल्यूएस 20-30 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से अथवा मेटालेक्सिल 35 प्रतिशत डब्ल्यूएस 600 ग्राम/100 किलोग्राम बीज।

टमाटर

कीट/रोग – मिट्टी जनित फफूँद रोग, अर्ली ब्लाईट, डैम्पिंग ऑफ, विल्ट
बीज उपचार : ट्राइकोडर्मा विरिडी 1.5 प्रतिशत डब्ल्यूपी 20 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से अथवा कैप्टेन 75 प्रतिशत डब्ल्यूएस 20-30 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से अथवा स्यूडोमोनास फ्लोरसेंस 0.5 प्रतिशत डब्ल्यूपी 10 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से।

मिर्च 

कीट/रोग – एंथ्रेक्नोज, डैम्पिंग ऑफ
बीज उपचार : ट्राइकोडर्मा विरिडी 4 ग्राम/किलोग्राम बीज अथवा कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 ग्राम/किलोग्राम बीज अथवा मेटालेक्सिल एम 31.8 प्रतिशत ईसी 2 ग्राम/कि.ग्रा. बीज।

बैंगन

कीट/रोग – विल्ट, रूट रॉट डम्पिंग ऑफ
बीज उपचार : ट्राइकोडर्मा विरिडी 1 प्रतिशत 5 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से और नर्सरी डालते समय बीज बैड को ट्राइकोडर्मा विरिडी 250 ग्राम/ 400 वर्ग मीटर से उपचारित करें अथवा स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस 1 प्रतिशत 20 ग्राम/किलोग्राम बीज की दर से अथवा ट्राइकोडर्मा विरिडी 1.5 प्रतिशत डब्ल्यूपी ञ्च 20 ग्राम/किग्रा बीज से नर्सरी बैड का उपचार करें।

चना

कीट/रोग – विल्ट एवं डम्पिंग ऑफ
बीज उपचार : ट्राइकोडर्मा विरिडी 9 ग्राम/ किलोग्राम बीज की दर से, मृदा उपचार 2.5 किग्रा प्रति हैक्टेयर।

धान

कीट/रोग – धान का जीवाणु जनित झुलसा रोग, झोंका रोग (ब्लास्ट), शीथ ब्लाइट रोग, भूरा पत्ती धब्बा (ब्राउन लीफ स्पॉट), बकाने/फुट रोट।
बीज उपचार : स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस 2.0 प्रतिशत एएस या बैसिलस सबटिलिस 2.0 प्रतिशत एएस 10 मिली/लीटर पानी से पौध उपचार तथा 1.87-2.50 लीटर/हेक्टेयर (500 लीटर पानी में) से स्प्रे। स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस 1.5 प्रतिशत डब्ल्यूपी 5 ग्राम/किलोग्राम बीज तथा 2.5 किग्रा/हेक्टेयर से मृदा उपचार। स्यूडोमोनास फ्लोरसेंस 0.5 प्रतिशत डब्ल्यूपी 10 ग्राम/किलोग्राम बीज, 1 किग्रा/हेक्टेयर से मृदा उपचार तथा पत्तों पर छिडक़ाव। स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस 1.5 प्रतिशत एलएफ 45 मिली प्रति किलो बीज तथा 6.0 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिडक़ाव। ट्राइकोडर्मा विरिडी 1.0 प्रतिशत डब्ल्यूपी 5-10 ग्राम/लीटर पानी (500 लीटर पानी में) 15 दिनों के अंतराल पर तीन बार छिडक़ाव करें। कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 ग्राम/किलोग्राम बीज। ट्राइकोडर्मा विरिडी 5.0 प्रतिशत लिक्विड फॉम्र्युलेशन: 500 लीटर/हेक्टेयर की दर से पत्तों पर छिडक़ाव। ट्राइकोडर्मा हार्जियनम 2.0 प्रतिशत एएस 30 मिली/लीटर पानी से पौध उपचार/सीडलिंग रूट डिप ट्रीटमेंट तथा 2.5 लीटर/हेक्टेयर से मृदा उपचार। थिरम 75 प्रतिशत डब्ल्यूएस धान के बीज जनित रोगों से रोकथाम के लिए।

कपास

कीट/रोग – कपास का कोणीय धब्बा रोग, जड़ विगलन तथा जीवाणु जनित झुलसा रोग

बीज उपचार : स्यूडोमोनास फ्लोरसेंस 0.5 प्रतिशत डब्ल्यूपी 10 ग्राम/किलोग्राम बीज तथा 0.2 प्रतिशत से पत्तों पर छिडक़ाव। थीरम 75 प्रतिशत डब्ल्यूएस कपास के बीज जनित रोगों से रोकथाम के लिए, फ्लुक्सापाइरोक्सड 333 ग्राम/लीटर कपास के पौध रोगों के लिए। टेट्राकोनाजोल 11.6 प्रतिशत डब्ल्यूएसएल, काबोक्सिन 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2-2.5 ग्राम/किग्रा बीज। कार्बोक्सिन 37.5 प्रतिशत + थिरम 37.5 प्रतिशत डब्ल्यूएस कपास के बीज जनित रोगों के रोकथाम के लिए।

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