ऐसे करें फूलों की खेती की शुरुआत

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  • अनुपम सिंह, कृषि विज्ञान विभाग, इंटीग्रल विश्वविद्यालय,
    लखनऊ, (उप्र)

    Email id- sanupamzzy@gmail.cm

15 जुलाई 2022, ऐसे करें फूलों की खेती की शुरुआत हर साल फूलों की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत में विशेष पूजा-अर्चना, त्यौहार व अन्य कार्यक्रमों में फूलों का खूब इस्तेमाल किया जाता है। यह नगदी फसल मानी जाती है। मप्र में मुख्यत: गुलाब, गेंदा, गुलदाउदी, लिलि, तारा, कंदाकार प्रमुख हैं। इन फूलों की खेती की संभावनाएं ज्यादा होती हैं फूलों की खेती करके किसान हर रोज पैसा कमा सकता है। फूलों को संग्रहित करके नहीं रखा जा सकता है, इसीलिए फूलों को पौधों से उतारने के बाद जल्द से जल्द बेच दिया जाता है। इससे हर रोज किसान को मुनाफ़ा होता है।

आधुनिकता के दौर में वैसे तो हर जानकारी इंटरनेट के माध्यम से ही मिल जाती है। फिर भी फूलों की शुरू करने से पहले किसान भाईयों को कृषि वैज्ञानिकों-विशेषज्ञों या अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से जरूर संपर्क करेें। फूलों की खेती करने वाले किसानों से भी मुलाकात करें, उनसे अच्छी गाइडेंस मिल सकती है। इसके अलावा, फूलों की खेती करने से पहले राज्य के कृषि विभाग से संपर्क करें। फूलों की खेती से जुड़े प्रशिक्षण में भाग लें। इससे फूलों की खेती के दौरान आने वाली मुश्किलों से निपटने में काफी हद तक आसानी होगी।

फूलों की खेती व्यवसाय योजना

एक सफल व्यवसाय योजना के कई तत्व हैं, इसके लिए आवश्यक भूमि और मशीनरी का अवसर मूल्यांकन, तकनीकी जानकारी, व्यवसाय सॉफ्टवेयर और पूंजी निवेश महत्वपूर्ण है। एक अच्छी व्यवसाय योजना में कुछ शीतलन उपकरण की आवश्यकता है, क्योंकि फूलों का जीवनकाल छोटा होता है।

मांग और मौसम के अनुसार करें फूलों की किस्म का चुनाव

मध्य प्रदेश की जलवायु उष्ण कटिबंधीय है यानी फूलों की खेती के लिए की मध्य प्रदेश की जलवायु और भूमि अनुकूल है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश के किसान आज परंपरागत खेती के स्थान पर फूलों की खेती पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अगर आप भी फूलों की खेती करना चाहते हैं तो जलवायु और मिट्टी के आधार पर फूल की किस्मों का चुनाव करें और बाजार में भी फूलों की मांग की जानकारी करें।

संरक्षित खेती की तकनीक

संरक्षित खेती वह तकनीक है जिसमें हम पौधों या फसल के पास ऐसा वातावरण तैयार करते हैं जो उनके लिए जरूरी होता है। संरक्षित खेती में किसान पौधों के अनुसार वातावरण में बदलाव कर सकते हैं। बदले हुए वातावरण में सालभर बेमौसमी फूलों और सजावटी पौधों आदि का उत्पादन कर सकते हैं। संरक्षित खेती का मुख्य उदेश्य फसल को जैविक और अजैविक कारकों से बचाकर उगाना होता है।

खुले में खेती करने के कुछ जैविक और अजैविक खतरे होते हैं, जो फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। जैविक खतरे में पौधों को कई तरह की बीमारियों का खतरा रहता है। वहीं अजैविक खतरों में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान, बहुत ज्यादा गर्मी, बरसात का न होना या बाढ़ जैसी स्थिति शामिल हैं, जो हमारी फसलों को प्रभावित करती है। इन तमाम कारकों से किसानों की कमाई घट जाती है।

संरक्षित खेती के तरीके

संरक्षित खेती के अंतर्गत पॉली हाउस, ग्रीन हाउस, नेट हाउस, वॉकिंग टनल और लो टनल जैसी कई संरचनाएं आती हैं। संरक्षित खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए किसान विपरीत परिस्थितियों में या बेमौसम खेती कर के गुणवत्ता वाली फसल ले सकते हैं। जिन किसानों के पास कम जमीन है, वे भी इस तरह की खेती कर सकते हैं।

सिंचाई प्रबंधन (टपक सिंचाई)

जाहिर है कि फूलों की खेती की में सिंचाई का अलग महत्व है। फूलों की खेती करने से पहले पानी की व्यवस्था का भी ध्यान रखें। अलग-अलग फूलों की किस्में उगाने के लिए पानी की काफी खपत होती है। इतना ही नहीं, अच्छी पैदावार के लिए उचित मात्रा में पानी का उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। किसान चाहें तो इस समस्या के समाधान के लिए टपक सिंचाई इस विधि से सिंचाई कर के पानी की बचत की जा सकती है एवं इस बिधि से सिंचाई करने पर पौधों द्वारा जल का उपयोग भी अधिक मात्रा में किया जाता है।

मिट्टी की जांच कराना

किसान भाइयों को चाहिए कि वे अपने खेतों की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं मिट्टी की जांच के लिए वे निकटतम मृदा स्वास्थ्य परीक्षण प्रयोगशाला व कृषि विज्ञान केंद्र जाकर परीक्षण करा सकते हैं व स्वॉइल हेल्थ कार्ड से भी मिट्टी की जांच की जा सकती है।

जैव उर्वरक का प्रयोग

किसान भाइयों को चाहिए कि वे रसायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैव उर्वरक जैसे एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम पीएसबी आदि का प्रयोग करके मिट्टी की गुणवत्ता को भी बनाए रख सकते हैं साथ ही साथ उत्पादन भी बढ़ा सकते हैं। जैव उर्वरक के प्रयोग से लागत भी कम आती है।

रोग एवं कीट से प्रतिरोधी प्रजातियों का चयन

फूलों की खेती की करने के लिए रोग एवं कीट प्रतिरोधी प्रजातियों का चयन बहुत महत्वपूर्ण कारक है किसानों को चाहिए कि वे प्रजातियों को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली एवं राष्ट्रीय वानस्पतिक अनुसंधान संस्थान, लखनऊ व निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र से प्रामाणित बीज खरीद कर ही खेती की शुरुआत करें।

एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन
  • जैविक खाद/उर्वरक
  • फसल अवशेष
  • जीवाणु खाद
  • रसायनिक खाद
मुनाफा और लागत का लेखा-जोखा

फूलों की खेती में उन तकनीकों को अपनायें, जिनसे लागत कम और मुनाफा ज्यादा हो।
उदाहरण के लिए एक हेक्टेयर भूमि पर फूलों की खेती करने के लिए 25 हज़ार रुपये का खर्च आयेगा। इसमें फूलों के बीज की खरीद से लेकर, खाद-उर्वरक, सिंचाई और निराई-गुड़ाई भी शामिल है। अगर किसानों के पास अपनी जमीन और उपकरण होंगे, तो खाद, बीज, उर्वरक, सिंचाई के साथ ट्रांसपोर्ट और भंडारण में खर्च होगा। हालांकि, शुरूआत में फूलों की खेती में परिवारिक लोगों के श्रम से मजदूरी के खर्चे को कंट्रोल किया जा सकता हैं। अगर व्यवसायिक तौर पर फूलों की खेती कर रहे हैं, तो सालाना 75,000 रुपये तक कमा सकते हैं।

शुरूआत से अंत तक का हो स्मार्ट प्लान

खेती-किसानी में लाभ कमाने के लिए चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए हमेशा प्लान-2 तैयार रखें। जाहिर है कि फूलों की खेती के दौरान में कई प्रकार के कीट और रोगों के पनपने की संभावना भी रहती है। फसल को कीट-रोगों से बचाने के लिए पॉलीहाउस में खेती करने का विकल्प चुनें। इसके अलावा, फूलों की तुड़ाई के बाद उनका भंडारण करना भी चुनौतपूर्ण काम है। क्योंकि फूलों की उपज को बाजार और मंडियों तक की जिम्मेदारी किसान की होती है। इसलिए फूलों का सही प्रकार भंडारण करना जरूरी है। ताकि जब फूल ग्राहक तक पहुंचे तो फूलों की खुशबू बरकरार रहे और फूल ताजा-गुणवत्तापूर्ण दिखें। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर आप भी फूलों की खेती करके सफल किसान बन सकते हैं।

फूलों की कटाई एवं भंडारण

किसान भाइयों को चाहिये कि जब वे अपने खेतों में फूलों की कटाई करें तब वे यह ध्यान रखें कि सुबह के समय को चुनें क्योंकि सुबह के समय आसमान से जो ओश गिरती है वह फूलों की पंखुडिय़ों पर रहती है और फूलों को तरोताजा बनाये रखने में मदद करती है। जो फूल पूरी तरह से खिले न हो यदि किसान इस तरह के फूलों की कटाई करते हैं तो वह बाजार में अच्छे दाम में बिकते हैं क्योंकि की यह धीरे-धीरे खुलते हैं और इस तरह से उनकी भंडारण की क्षमता भी बढ़ती है। यदि हमारे किसान भाई पूरे तरह से खुले फूलों की कटाई करते हैं तो ऐसे फूलों की भंडारण क्षमता कम हो जाती है।

यदि कटे हुए फूलों का भंडारण करना है तो यह ध्यान देने योग्य बात है कि फूलों को अखबार में लपेट दें ताकि वे हवा से नमी को न खींच सकें। फिर उनसे किसी बॉक्स में रख दें ताकि फूलों को बाहरी वातावरण से बचाया जा सके उसके रखते समय यह ध्यान दें वह जगह अधिक सूखी एवं अत्यधिक नम न हो।

आवश्यक परमिट

आपके फूलों की खेती के व्यवसाय के लिए जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य है। फूलों की खेती के व्यवसाय के लिए उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन, उद्यमिता कार्यक्रम और बैंक ऋण भी उपलब्ध हो सकते हैं।

 

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One thought on “ऐसे करें फूलों की खेती की शुरुआत

  • जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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