फसल की खेती (Crop Cultivation)

सोयाबीन बीज का सही उपचार: फंगीसाइड और कीटनाशी से फसल बचाने का तरीका

17 जून 2025, नई दिल्ली: सोयाबीन बीज का सही उपचार: फंगीसाइड और कीटनाशी से फसल बचाने का तरीका – सोयाबीन की फसल के शुरुआती दिनों में फंगस (कवक) और कीटों से नुकसान होने का खतरा रहता है, जिससे पौधों की संख्या कम हो जाती है और फसल की पैदावार घट सकती है। ICAR – नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टिट्यूट, इंदौर की ताज़ा सिफारिशों के अनुसार, फंगीसाइड और कीटनाशी से बीज उपचार करना फसल की सुरक्षा और अच्छी वृद्धि के लिए आवश्यक है।

फंगीसाइड और कीटनाशी का मिश्रित उपचार

किसानों को सलाह दी जाती है कि वे बीज को “एजोसिस्टोबिन 2.5% + थायोफानेट मिथाइल 11.25% + थियामेथोक्सम 25% FS” जैसी तैयार मिश्रित दवा से उपचारित करें। इसे 10 मिलीलीटर प्रति किलो बीज की दर से छिड़काव करना चाहिए। यह मिश्रण बीजों को कवक और कीट दोनों से बचाता है, जिससे बीज स्वस्थ रहते हैं और पौधे मजबूत उगते हैं।

वैकल्पिक दो चरणों में बीज उपचार

यदि मिश्रित दवा उपलब्ध न हो तो किसान पहले कवकनाशी जैसे ‘पेनफ्लूफेन + ट्राइफ्लोक्सिस्ट्रोबिन’ (1 मिलीलीटर प्रति किलो बीज), या ‘थिरम + कार्बोक्सिन’ (3 ग्राम प्रति किलो बीज), या ‘थिरम + मैनकोजेब’ (3 ग्राम प्रति किलो बीज) का उपयोग कर सकते हैं। बीजों को सुखाने के बाद कीटनाशी ‘थियामेथोक्सम 30 FS’ (10 मिलीलीटर प्रति किलो बीज) या ‘इमिडाक्लोप्रिड 48 FS’ (1.25 मिलीलीटर प्रति किलो बीज) से उपचारित करना चाहिए। इस प्रकार का दो चरणों वाला उपचार बीजों को अधिक प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है।

बीज उपचार का सही समय और तरीका

बीज उपचार बुवाई से पहले करना चाहिए ताकि दवाएं सूख जाएं और बीजों पर अच्छी तरह से लग जाएं। सही तरीके से उपचारित बीज बीज सड़न, डंपिंग-ऑफ और कीटों से बचाव करता है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है और पौधों का विकास सही तरीके से होता है।

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