फसल की खेती (Crop Cultivation)

गेहूं में दाना भरने की चिंता: मार्च की गर्मी में गेहूं के लिए म्यूरेट ऑफ पोटाश और पोटेशियम नाइट्रेट क्यों जरूरी?

02 मार्च 2026, नई दिल्ली: गेहूं में दाना भरने की चिंता: मार्च की गर्मी में गेहूं के लिए म्यूरेट ऑफ पोटाश और पोटेशियम नाइट्रेट क्यों जरूरी? – मार्च का महीना गेहूं की फसल के लिए अत्यंत निर्णायक होता है क्योंकि इसी समय दाना भरने की प्रक्रिया अपने चरम पर होती है। इस अवस्था में यदि तापमान अचानक बढ़ जाए या गर्म हवाएं चलने लगें तो दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते और उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में मार्च के दौरान अल्पावधि गर्मी की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे किसानों के बीच दाना सिकुड़ने और टेस्ट वेट घटने की चिंता बढ़ी है। ऐसे परिदृश्य में पोटाश आधारित पोषण प्रबंधन, विशेषकर म्यूरेट ऑफ पोटाश और पोटेशियम नाइट्रेट, को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

दाना भरने की अवस्था में पोटाश क्यों महत्वपूर्ण है?

दाना भरने के समय पौधे में प्रकाश संश्लेषण से बने कार्बोहाइड्रेट को पत्तियों से दानों तक पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। पोटाश इस स्थानांतरण में प्रमुख भूमिका निभाता है। यह कोशिकाओं में जल संतुलन बनाए रखता है, रंध्रों के खुलने-बंद होने को नियंत्रित करता है और एंजाइम क्रियाओं को सक्रिय रखता है। यदि इस समय पोटाश की कमी हो या पौधे पर तापमान का तनाव बढ़ जाए, तो दाना भरने की अवधि कम हो सकती है और दाने हल्के रह जाते हैं।

म्यूरेट ऑफ पोटाश: मिट्टी आधारित आधारभूत पोषण

म्यूरेट ऑफ पोटाश, जिसे पोटेशियम क्लोराइड भी कहा जाता है, गेहूं में पोटाश की पूर्ति के लिए सबसे सामान्य रूप से उपयोग किया जाने वाला उर्वरक है। यह सामान्यतः बुवाई के समय या शुरुआती अवस्थाओं में मिट्टी में दिया जाता है ताकि पौधे की जड़ प्रणाली मजबूत बने और पूरे जीवनचक्र में पोटाश की उपलब्धता बनी रहे।

यदि खेत में पहले से संतुलित मात्रा में म्यूरेट ऑफ पोटाश दिया गया है तो फसल मार्च की गर्मी का सामना बेहतर ढंग से कर सकती है। जिन खेतों में पोटाश का संतुलन कमजोर होता है, वहां गर्मी के समय दाना भरने की प्रक्रिया अधिक प्रभावित हो सकती है। इसलिए दीर्घकालिक दृष्टि से मिट्टी परीक्षण के आधार पर म्यूरेट ऑफ पोटाश का संतुलित उपयोग दाना भरने की चिंता को कम करने का आधार बनता है।

हालांकि, जब फसल पहले से दाना भरने की अवस्था में हो और अचानक तापमान बढ़ जाए, तब केवल मिट्टी में सुधार पर्याप्त नहीं होता। ऐसे समय में त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।

पोटेशियम नाइट्रेट: त्वरित राहत के लिए पर्णीय छिड़काव

मार्च में यदि अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच जाए और लगातार बना रहे, तो पोटेशियम नाइट्रेट का 2 प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव लाभकारी माना जाता है। यह घोल सामान्यतः 200 लीटर पानी में लगभग 4 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट मिलाकर प्रति एकड़ तैयार किया जाता है।

पोटेशियम नाइट्रेट का लाभ यह है कि यह पत्तियों के माध्यम से सीधे अवशोषित होकर पौधे को तत्काल पोटाश और नाइट्रोजन दोनों प्रदान करता है। पोटाश पौधे में जल संतुलन और तनाव सहनशीलता बढ़ाता है, जबकि नाइट्रेट नाइट्रोजन दाना विकास की प्रक्रिया को सक्रिय रखता है। इससे दाना भरने की अवधि को स्थिर रखने और दानों के वजन को बनाए रखने में सहायता मिलती है।

जब मिट्टी से पोषक तत्वों का अवशोषण गर्मी के कारण प्रभावित हो रहा हो, तब पर्णीय छिड़काव एक प्रभावी विकल्प बन जाता है। शाम के समय छिड़काव करने से वाष्पीकरण कम होता है और घोल का प्रभाव बेहतर रहता है।

समन्वित पोषण प्रबंधन: दाना भरने की सुरक्षा की कुंजी

दाना भरने की चिंता को केवल एक उपाय से हल नहीं किया जा सकता। संतुलित आधारभूत उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई, और आवश्यकता पड़ने पर पोटेशियम नाइट्रेट का पर्णीय छिड़काव—इन सभी का समन्वित उपयोग ही बेहतर परिणाम देता है। जिन खेतों में पहले से पर्याप्त म्यूरेट ऑफ पोटाश दिया गया है और मार्च में तापमान बढ़ने पर पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव किया गया है, वहां दानों का आकार और वजन अपेक्षाकृत बेहतर पाया गया है।

बदलती जलवायु में दाना भरने की रणनीति

जलवायु परिवर्तन के चलते मार्च में तापमान का उतार-चढ़ाव अब सामान्य बात हो गई है। ऐसे में किसानों को दाना भरने की अवस्था को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा। पोटाश आधारित प्रबंधन न केवल उत्पादन की रक्षा करता है बल्कि गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायक होता है।

अंततः, दाना भरने की अवस्था में लिए गए सही पोषण संबंधी निर्णय ही अंतिम उपज और बाजार मूल्य को निर्धारित करते हैं। म्यूरेट ऑफ पोटाश से मिट्टी में मजबूत आधार तैयार करना और आवश्यकता पड़ने पर पोटेशियम नाइट्रेट का समय पर छिड़काव करना, मार्च की गर्मी के बीच गेहूं की फसल को सुरक्षित रखने की एक प्रभावी रणनीति साबित हो सकता है।

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