धान में ब्राउन स्पॉट रोग प्रबंधन: समय पर पहचान और नियंत्रण की सलाह
05 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान में ब्राउन स्पॉट रोग प्रबंधन: समय पर पहचान और नियंत्रण की सलाह –
ब्राउन स्पॉट रोग से घट सकती है उपज
ब्राउन स्पॉट (Brown Spot) धान का एक प्रमुख फफूंदजनित रोग है, जो पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे बनाकर पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता को प्रभावित करता है। रोग के बढ़ने पर पौधों की वृद्धि रुक सकती है और उपज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
आईसीएआर–केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRRI), कटक ने किसानों को सलाह दी है कि खेत का नियमित निरीक्षण करें और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।
रोग दिखते ही करें नियंत्रण
संस्थान के अनुसार रोग की पुष्टि होने पर प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी अथवा मैनकोजेब 75 डब्ल्यूपी या कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोजेब 63% डब्ल्यूपी का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव किया जा सकता है। समय पर किया गया उपचार रोग के फैलाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नियमित निगरानी है सबसे प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार ब्राउन स्पॉट का सफल प्रबंधन तभी संभव है जब किसान नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करें और रोग के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर किया गया फफूंदनाशी छिड़काव पौधों को अधिक नुकसान से बचा सकता है।
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