ब्राउन प्लांट हॉपर का अब निश्चित अंत: स्वाल का जैपर

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  •  हेमन्त मीणा
    नेशनल क्रॉप मैनेजर ,
    स्वाल कॉर्पोरेशन

2 अगस्त 2021,  ब्राउन प्लांट हॉपर का अब निश्चित अंत : स्वाल का जैपर – भारत में चावल का उत्पादन राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक और दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। उत्पादन वित्त वर्ष 1980 में 53.6 मिलियन टन से बढक़र वित्त वर्ष 2020-21 में 120 मिलियन टन हो गया। इस वृद्धि का अधिकांश भाग पैदावार में वृद्धि का परिणाम है, इस अवधि के दौरान हेक्टेयर की संख्या में वृद्धि नहीं हुई।

चावल भारत के प्रमुख अनाजों में से एक है। इसके अलावा, भारत में चावल की खेती के तहत सबसे बड़ा क्षेत्र है, क्योंकि यह प्रमुख खाद्य फसलों में से एक है। वास्तव में यह देश की प्रमुख फसल है और इस फसल के प्रमुख उत्पादकों में से एक है।

प्रमुख चावल उत्पादक राज्य

चावल भारत के तकरीबन हर राज्य में होता है हालांकि उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, केरल इनमें प्रमुख हैं।

चावल में आने वाले प्रमुख कीट

चावल की फसल को सबसे अधिक नुकसान होता है विभिन्न प्रकार के कीटों के कारण हर साल चावल में लगभग 30-40 प्रतिशत तक के उत्पादन का नुकसान होता है। विभिन्न प्रकार के हानिकारक कीटों में से सबसे ज्यादा चावल की फसल पर नुकसान करने वाले कीट इस प्रकार है – तना छेदक, लीफ फोल्डर (पत्ता लपेट इल्ली) और ब्राउन प्लांट हॉपर हैं। इन कीटों में जो सबसे ज़्यादा नुकसानदायक कीट ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH) है।

ब्राउन प्लांट हॉपर

ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH) के हमले से खेत के विभिन्न हिस्सों में गोल जैसे आकार दिखाई देते हैं जिसे हॉपर बर्न भी कहा जाता है। बीपीएच पौधे में नीचे से ऊपर की ओर द्रव चूसता है और साथ ही एक चिपचिपा तरल पदार्थ छोड़ता है जो फंगल संक्रमण का कारण बनता है। सामान्य तौर पर ब्राउन प्लांट हॉपर (क्चक्क॥) का सबसे ज़्यादा प्रभाव फ़सल में मध्य अगस्त से मध्य सितंबर के बीच देखा जा सकता है।

स्वाल का अनूठा उपाय: जैपर (पाइमेट्रोजिन 50 प्रतिशत (WG)
  • जैपर अनोखे तरीके से काम करने वाला उत्पाद है जो ब्राउन प्लांट हॉपर पर दे लंबा और प्रभावी नियंत्रण। यह एक से अधिक तरीकों से इनकी संख्या को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह लंबी अवधि के नियंत्रण के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन भी प्रदान करता है। आइए जैपर के बारे में और जानें।
  • जैपर कीट की भक्षण प्रणाली को रोकता है जिससे निम्फ एवं व्यस्क भूख से मर जाते हंै और आगे की पीढ़ी को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। 
  • यह पौधे के अंदर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर तक घूमता रहता है जिससे मिले लंबा एवं प्रभावी नियंत्रण।
  • यह कीट के संपर्क में आते ही काम करना चालू कर देता है और कीट के पीछे के पैरों पर लकवा मार देता है जिससे वह पौधे से नीचे गिर जाते हैं और कुछ खा नहीं पाते। 2-3 दिन के भीतर या तो वो भूख से मार जाते हैं या फिर पानी में डूबने से।

अगर जैपर का सही समय पर इस्तेमाल किया जाए तो फसल रहती है ब्राउन प्लांट हॉपर के आतंक से मुक्त जिससे फसल रहे हरी भरी, तंदुरुस्त और उत्पादन मिले ज्यादा।

जैपर के बारे में कुछ बातों का ध्यान रखें
  • जैपर का पहला छिडक़ाव करें 55-60 दिन की फसल में और दूसरा छिडक़ाव करें 65-70 दिन की फसल में।
  • 120 ग्राम जैपर 150-200 लीटर पानी में मिलायें और हमेशा पौधे के नीचे की तरफ (basal region of plant) अच्छे से छिडक़ाव करें।
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