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फसल की खेती (Crop Cultivation)

लाल सड़न से बचें: गन्ने की खेती में एक गंभीर समस्या

08 जून 2024, भोपाल: लाल सड़न से बचें: गन्ने की खेती में एक गंभीर समस्या – लाल सड़न रोग गन्ने की खेती में एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिसने उत्तर प्रदेश और बिहार के गन्ना किसानों को काफी नुकसान पहुंचाया है। हाल ही में, लोकप्रिय Co 0238 किस्म इस रोग से प्रभावित हुई है, जिससे इसकी खेती में भारी गिरावट आई है। इस रोग की घटनाएँ पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में भी देखी जा रही हैं।

आईसीएआर-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR) और अन्य अनुसंधान केंद्रों ने लाल सड़न की घटनाओं पर व्यापक सर्वेक्षण किया हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, Co 0238 की खेती लगभग 65% क्षेत्र में की जाती है, और इस किस्म में लाल सड़न की घटनाएँ 25% से 75% तक पाई गई हैं। हरियाणा और पंजाब में यह घटनाएँ 10% से 35% तक हैं, जो आने वाले सीजन में गन्ने की खेती के लिए खतरा बन सकती हैं।

प्रबंधन रणनीतियाँ

ICAR-IISR  ने इस रोग से निपटने के लिए कई प्रबंधन रणनीतियाँ सुझाई हैं। रोगग्रस्त क्षेत्रों में बीज बदलने का कार्यक्रम अनिवार्य है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण बीज का उपयोग करें। थीओफेनेट मिथाइल (0.1%) जैसे प्रणालीगत फफूंदनाशी का उपयोग करके बीज का उपचार किया जाना चाहिए।

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रोग नियंत्रण के लिए प्रभावित क्षेत्रों में फफूंदनाशी का छिड़काव तीन सप्ताह के अंतराल पर किया जाना चाहिए। मई से जुलाई के बीच 2-3 बार फफूंदनाशी छिड़काव की सलाह दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों की फसल को तुरंत काट कर हटाया जाना चाहिए और फफूंदनाशी का उपयोग करके खेत को साफ किया जाना चाहिए।

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बीज की तैयारी प्रक्रिया

बीज की तैयारी के लिए, गन्ना मिल के कर्मचारी निगरानी करें और स्वस्थ बीज नर्सरी स्थापित करें। बीज का उपचार थीओफेनेट मिथाइल (0.1%) से किया जाना चाहिए और नर्सरी फसल को ट्राइकोडर्मा कल्चर युक्त जैविक खाद या वर्मी कम्पोस्ट से उगाया जाना चाहिए।

फसल चक्रण और विविधता

रोगग्रस्त क्षेत्रों में एक मौसम के लिए चावल-गेहूं फसल चक्रण या तिलहन फसल उगाई जा सकती है। गन्ना मिलों को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्रों में विभिन्न किस्मों की मिश्रित खेती करें और किसी एक किस्म का 40% से अधिक क्षेत्र में विस्तार न करें। अनुशंसित किस्में जैसे CoLk 14201, CoLk 15201, CoS 13235, Co 15023 आदि का उपयोग किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों की सलाह

डॉ. आर. विश्वनाथन, निदेशक, भारतीय गणना अनुसंधान संस्थान , लखनऊ ने बताया कि लाल सड़न रोग को नियंत्रित करने के लिए बीज की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। डॉ. दिनेश सिंह, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, गन्ने पर एआईसीआरपी, आईसीएआर-आईआईएसआर ने कहा कि किसानों को स्वस्थ बीज के उपयोग के लिए शिक्षित किया जाना चाहिए और बीज उत्पादन एवं वितरण में उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

इस प्रकार के उपाय अपनाकर हम लाल सड़न के प्रकोप को नियंत्रित कर सकते हैं और गन्ने की खेती को सुरक्षित रख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए ICAR-IISR, लखनऊ से संपर्क करें।

ईमेल: director.sugarcane@icar.gov.in (डॉ. आर. विश्वनाथन)

ईमेल: pcs.iisr@icar.gov.in (डॉ. दिनेश सिंह)

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