सोयाबीन को जीवनदान
मध्य प्रदेश में खरीफ की प्रमुख फसल सोयाबीन को दूसरे दौर की वर्षा प्रारंभ होने से नया जीवनदान मिल गया है। किसानों की चिंताएं कुछ कम हुई है। पूर्व में शुरूआती मानसून के बाद लबे सन्नाटे के कारण राज्य के
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंफसल उत्पादन (Crop Cultivation) उन्नत तकनीकें
नवीनतम फसल खेती जानकारी यहाँ उपलब्ध है। आधुनिक कृषि पद्धतियां और Crop Cultivation नवाचार अपनाएं। बुआई समय तथा वैज्ञानिक बीज उपचार तकनीकें उपज बढ़ाती हैं। खरपतवार नियंत्रण, रोग प्रबंधन और कीट सुरक्षा उपाय फसल पैदावार हेतु आवश्यक हैं।
यह खंड गेहूं उत्पादन, चना खेती, मूंग, सोयाबीन, धान तथा मक्का जैसी अनाज फसलों पर केंद्रित है। आलू, कपास, जीरा, प्याज और टमाटर की नई किस्में यहाँ देखें। फसल कीट नियंत्रण और रोग नियंत्रण विशेषज्ञ सलाह यहाँ प्राप्त करें। Crop Cultivation प्रक्रिया में सोयाबीन, गेहूं और धान बीज उपचार अनिवार्य है।
मशरूम खेती, जिमीकंद और औषधीय फसल उत्पादन जानकारी यहाँ संकलित है। जुकिनी, ड्रैगन फ्रूट, बैंगन तथा टमाटर खेती के वैज्ञानिक गुर सीखें। आम, नींबू, अमरूद, पपीता और लहसुन खेती की हर बारीकी यहाँ उपलब्ध है। पूसा अरहर-16 तथा सरसों उन्नत किस्में (स्टार एग्रीसीड्स) अधिक लाभ देती हैं। अफीम खेती कानूनी प्रक्रिया और लाइसेंस जानकारी इस Crop Cultivation गाइड में समाहित है।
मध्य प्रदेश में खरीफ की प्रमुख फसल सोयाबीन को दूसरे दौर की वर्षा प्रारंभ होने से नया जीवनदान मिल गया है। किसानों की चिंताएं कुछ कम हुई है। पूर्व में शुरूआती मानसून के बाद लबे सन्नाटे के कारण राज्य के
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंबाजार में अच्छे दाम किसान भाईयों के लिए एक अतिरिक्त आय का साधन भी होता है। वर्तमान समय में जब खेख्सा का फल बाजार में आता है तो उसका मूल्य रूपये 90 से 100 रूपये तक प्रति किग्रा तक मिलती
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंउम्मीद से बेहतर मानसून ने किसानों को खुश कर दिया है तो उनकी जवाबदारी भी बढ़ा दी है। किसानों ने खरीफ फसलों की लगभग बुवाई कर दी है। किसान के लिए फसल अपने बच्चे की तरह होती है। कोई भी
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंसोयाबीन भारतवर्ष की एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल सोयाबीन भारतवर्ष की एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है देश में इसकी खेती लगभग 65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है। जिससे प्रतिवर्ष लगभग 78 लाख टन उत्पादन प्राप्त होता है सोयाबीन उगाने
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंभारतीय बीज कंपनियों के शीर्ष संगठन नेशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनएसए) के अध्यक्ष श्री मांडव प्रभाकर राव के मुताबिक बाजार कारकों के असर और मानसून की अनिश्चितताओं से आगामी खरीफ सीजन में फसलों के पैटर्न में बड़ा बदलाव आएगा
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंभिन्न-भिन्न ऊंचाई एवं भिन्न-भिन्न रंगों के कारण लेण्ड स्केप की खूबसूरती बढ़ाने के भी काम आता है। यह क्यारियों में तथा हरबेसियस बॉर्डर के रूप में आसानी से उगाया जाने वाला पौधा है। इसके साथ सबसे महत्वपूर्ण एवं फायदेमंद बात
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंवर्ष 2015 का खरीफ शुरू होने को है। खरीफ का महत्व क्षेत्रफल तथा फसल विविधता की दृष्टि से विशेष है। खरीफ में पैदा किये जाने वाली प्रमुख फसलें धान, सोयाबीन, मूंगफली, मूंग, उड़द तथा अरहर है जिनमें से सबसे अधिक
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंपोषक मूल्य पोष्टिकता की दृष्टि से यह विटामिन एवं खनिज लवणों का स्त्रोत है। इसके फल विटामिन ए व सी से भरपूर होते हैं। मिर्च का तीखापन उसमें उपस्थित एल्कालॉयड कैपसाइसिन के कारण होता है। जलवायु निमाड़ की जलवायु मिर्च
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंमिट्टी की जांच क्यों आवश्यक है:1. मिट्टी की उर्वराशक्ति एवं पोषक तत्वों की उपलब्धता ज्ञात करने के लिये।2. परीक्षण के आधार पर फसल की आवश्यकतानुसार उर्वरकों की मात्रा निर्धारित करने के लिए।3. ऐसी भूमि जहां उर्वरकों की आवश्यकता नहीं है,
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंबढ़ती जनसंख्या के भरण-पोषण के लिये प्रति इकाई उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास में अंधाधुंध सिंचाई, असंतुलित उर्वरक उपयोग कृषि में होने के कारण भूमि के स्वास्थ्य पर विपरीत असर देखे जाने लगे जो वर्तमान में एक चुनौती बनकर उभरे हैं।
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