मध्य प्रदेश में फसल- किस्मवार बीज खरीफ-2022
महत्वपूर्ण खबर: बीज उपचार में आईपीएम का महत्व
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंफसल उत्पादन (Crop Cultivation) उन्नत तकनीकें
नवीनतम फसल खेती जानकारी यहाँ उपलब्ध है। आधुनिक कृषि पद्धतियां और Crop Cultivation नवाचार अपनाएं। बुआई समय तथा वैज्ञानिक बीज उपचार तकनीकें उपज बढ़ाती हैं। खरपतवार नियंत्रण, रोग प्रबंधन और कीट सुरक्षा उपाय फसल पैदावार हेतु आवश्यक हैं।
यह खंड गेहूं उत्पादन, चना खेती, मूंग, सोयाबीन, धान तथा मक्का जैसी अनाज फसलों पर केंद्रित है। आलू, कपास, जीरा, प्याज और टमाटर की नई किस्में यहाँ देखें। फसल कीट नियंत्रण और रोग नियंत्रण विशेषज्ञ सलाह यहाँ प्राप्त करें। Crop Cultivation प्रक्रिया में सोयाबीन, गेहूं और धान बीज उपचार अनिवार्य है।
मशरूम खेती, जिमीकंद और औषधीय फसल उत्पादन जानकारी यहाँ संकलित है। जुकिनी, ड्रैगन फ्रूट, बैंगन तथा टमाटर खेती के वैज्ञानिक गुर सीखें। आम, नींबू, अमरूद, पपीता और लहसुन खेती की हर बारीकी यहाँ उपलब्ध है। पूसा अरहर-16 तथा सरसों उन्नत किस्में (स्टार एग्रीसीड्स) अधिक लाभ देती हैं। अफीम खेती कानूनी प्रक्रिया और लाइसेंस जानकारी इस Crop Cultivation गाइड में समाहित है।
महत्वपूर्ण खबर: बीज उपचार में आईपीएम का महत्व
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंक्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्रमशीनरी स्टोर इमारत, एन.एच.-4, फरीदाबाद (हरियाणा) ईमेल : ipmhr07@nic.in 3 जून 2022, बीज उपचार में आईपीएम का महत्व – बीज उपचार : बीज उपचार एक विधि है, जिसमें पौधों को बीमारियों और कीटों से मुक्त
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें3 जून 2022, छिंदवाड़ा । शून्य बजट प्राकृतिक कृषि के अच्छे परिणाम मिलेंगे – गुजरात से आये राज्यस्तरीय मास्टर ट्रेनर एवं उप संचालक कृषि श्री एच.जे. जिंदल ने जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया।
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें2 जून 2022, इंदौर । पौधे के साथ सहजीविता रखने वाला माइकोराइजा फ़र्टिलाइज़र – भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद- भारतीय सोयाबीन अनुसन्धान संस्थान के वैज्ञानिकद्वय दीपांती चौरसिया और डॉ महावीर पी शर्मा के अनुसार माइकोराइजा एक प्रकार का फ़ंगस है, जो
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें2 जून 2022, धान की उन्नत खेती और सही पैदावार के लिए अपनाएं यह तरीका – एक अच्छी पैदावार लेने के लिए भूमि का अच्छी तरह से तैयार किया जाना अति आवश्यक है। अच्छी तरह से तैयार की गयी खेती
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें1 जून 2022, नई दिल्ली । जानिए उच्च गुणवत्ता जीवामृत बनाने की विधि – बार-बार प्रयोग करने के पश्चात् परिणाम निकला कि एक एकड़ जमीन के लिए 10 कि.ग्रा. गोबर के साथ गोमूत्र, गुड़ और दो-दले बीजों का आटा या बेसन
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें21 मई 2022, इंदौर । सोयाबीन कृषकों के लिए उपयोगी सलाह – भाकृअप – भारतीय सोयाबीन अनुसन्धान संस्थान, इंदौर ने किसानों को आगामी खरीफ सत्र के लिए उपयोगी सलाह दी है , जो निम्नानुसार है – मौसम विभाग द्वारा जारी
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें19 मई 2022, गहरी जुताई से गहरा लाभ – जुताई का वैज्ञानिक अर्थ मिट्टी काटकर इस प्रकार पलट देना है कि भूमि की ऊपरी सतह की मिट्टी नीचे जाये और नीचे की मिट्टी ऊपर आ जाए। अत: गर्मी की जुताई
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंनिमिष गंगराड़े 18 मई 2022, नई दिल्ली । बासमती धान में क्रांति लाएंगी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की 3 नई किस्में – धान के झोंका, झुलसा रोग से किसान भाई अब राहत महसूस करेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा हाल ही में धान
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंडॉ. प्रियंका कुमावतसहायक प्राध्यापक, श्री कर्ण नरेंद्र कृषि महाविद्यालय, जोबनेर डॉ. वर्षा कुमारी ,पंकज कुमारसहायक प्राध्यापक, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार 11 मई 2022, तिलहनी फसलों में गंधक का महत्व – तिलहन फसलों में गंधक तेल निर्माण के
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