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पशुपालन (Animal Husbandry)

बकरियों में पीपीआर एक घातक बीमारी

  • डॉ. मनीष जाटव
    पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ
    पशु पालन एवं डेयरी विभाग

1 नवंबर 2021, बकरियों में पीपीआर एक घातक बीमारी – भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसमे अधिकांश भाग में किसान अपनी आजीविका पूर्ण करने हेतु कृषि के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं पशु पालन में अधिकांश गाय, भैंस, बकरी, भेड़, आदि पालते हंै इन सभी में बकरियाँ किसानों के लिए आर्थिक उन्नति पाने का अति उत्तम स्रोत होता है क्योंकि बकरियों को कम लागत एवं कम जगह में आसानी से पाला जा सकता है परंतु बकरी पालन के समय किसानों को बकरियों में होने बाली बीमारियों से ध्यान रखें उन्हीं सभी होने वाली घातक बीमारियों में से एक है पीपीआर जिसे सामान्यत: बकरियों का प्लेग भी कहा जाता है।

पीपीआर (पेस्टिस डि पेटटिस कमीनेंट) एक जानलेवा विषाणु बीमारी है जो कि जुगाली करने वाले छोटे जानवरों में होती है यह बकरी एवं भेड़ में बहुत ही भयानक बीमारी है क्योंकि यह बीमारी बकरियों के आपस में रहने, बैठने एवं खाना खाने से फैलती है।

रोग का कारण

यह बीमारी सामान्यत: पेरामिक्सोविरिडी परिवार के मोरविली विषाणु से होती है जो कि गाय, भैंस में रिडरपेस्ट के जैसे ही बीमारी जनित करता है।

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रोग के लक्षण
  • पशु को अत्यंत तीव्र बुखार (400-410 से.) तक हो जाता है
  • पशु मुरझाया हुआ दिखाई देता है।
  • पशु चारा खाना व जुगाली करना बंद कर देता है।
  • पशु की चमड़ी सूखी हो जाती है।
  • पशु को लगातार छीकों के साथ नाक एवं मुंह से पानीदार स्राव आने लगता है।
  • आंखें लाल पड़ जाती हंै एवं आँखों की शलेषमा सफेद पड़ जाती है। 
  • मुहँ एवं जीभ में छाले पड़ जाते है।
  • पशु के मुंह से मवाद युक्त बदबू आने लगती है। 
  • इस बीमारी के चलते पशु को एक-दो दिन में दस्त आने शुरू हो जाते हंै।
  • मुहँ में मवादयुक्त श्राव होने की वजह से पशु को सांस लेने मे तकलीफ होती है।
रोग का उपचार

यह एक विषाणु से होने बाली बीमारी है अत: इसका कोई विशिस्ट उपचार नहीं है फिर भी साथ में होने वाले जीवाणुओं के संक्रमण को रोकने के लिए एंटीवयोटिक्स से उपचारित किया जाता है। रोगी पशु के शरीर में पानी एवं भोजन की आवश्यकता हेतु डेक्सट्रोस को 5-6 दिनों तक दें।

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ऑक्सीट्रेक्टासाईक्लीन एवं क्लोरटेक्टासाईक्लिन एंटीबायोटिक्स को उपयोग किया जाता है।

रोकथाम एवं बचाव
  • इस बीमारी की रोकथाम हेतु प्रथम प्रक्रिया इस बीमारी से बचाव है जो कि स्वस्थ बकरी की समय-समय पर निगरानी रखते हुए पीपीआर का टीका लगवाते रहें। बकरियों के रहने की जगह को साफ सुथरा रखें।
  • रोगी बकरी को कभी भी स्वस्थ बकरी के साथ नहीं रखें।
  • यदि कोई बकरी इस रोग से संक्रमित पाई जाती है तो उस बकरी को एक अलग स्थान पर सभी बकरियों से दूर रखें तथा उसके खाने पीने का इंतजाम भी अलग करें।
  • रोगी क्षेत्र की भेड़ व बकरियों के आवागमन पर पूर्ण तरीके से रोकथाम लगा देें।
  • मृत होने वाले पशुओं का एवं उनके संपर्क वाली वस्तुओं का पूर्ण रूप से निस्तारण कर देें।