जमनापारी नस्ल से बकरी पालन व्यवसाय लाभकारी बना

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नीमच जिले की मनासा तहसील के गाँव तलाउ के बालचंद परम्परागत खेती से जैसे-तैसे अपने घर-परिवार का गुजर-बसर कर रहे थे। अब बालचंद ने खेती के साथ-साथ बकरी पालन का काम भी शुरू किया। लेकिन मन-माफिक फायदा नहीं मिलता था। एक दिन बालचंद वेटनरी डॉक्टर राजेश पाटीदार के सम्पर्क में आये तो उन्हें पशु पालन विभाग की योजना में नर जमनापारी बकरा प्रदाय के बारे में जानकारी मिली साथ ही योजना के फायदे भी समझ में आये।
बालचंद ने इस योजना का लाभ लेने की ठानी। उसने पशुपालन विभाग से सम्पर्क किया तो विभागीय योजना में उसे जमनापारी नस्ल का बकरा मिला। बालचंद ने बकरियों के जमनापारी नस्ल से बकरियों का प्रजनन करवाया। इस प्रयास से उसे बकरी पालन व्यवसाय में अच्छा लाभ होने लगा है। यह लाभ परम्परागत बकरी पालन से कई गुना अधिक है। वर्तमान में बालचंद के पास उन्नत नस्ल की 30 बकरियाँ है जिसमें से 17 जमनापारी नस्ल की तथा 13 देशी नस्ल की हैं।
अब बालचंद जमनापारी नस्ल की 25-30 बकरियो के बच्चे हर साल बेच रहा है। इससे उसे 75 हजार से एक लाख रूपये तक प्रति वर्ष आय हो रही है। यही नहीं, आज बालचंद को देशी बकरी से 500 से 600 ग्राम दूध तथा जमनापारी बकरी से 900 ग्राम से एक लीटर तक दूध मिल रहा है। इससे उसकी आर्थिक स्थिति और बेहतर हो गई है।
आज बालचंद और उसका परिवार बकरी पालन व्यवसाय को अपनाकर सुखी है और अच्छा मुनाफा भी कमा रहा है।

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