अब खरीदनी पड़ेगी मौसम की जानकारी – मौसम विभाग के पूर्वानुमानों से संकट में पड़ा किसान

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भोपाल। केन्द्र और राज्य सरकारें किसानों की आमदनी बढ़ाने, खेती को लाभ का धंधा बनाने तथा मोबाईल पर किसानों को मौसम, विपणन आदि की अद्यतन जानकारी देने के लिए निरन्तर प्रयासरत एवं हलाकान है वहीं केन्द्र सरकार का महत्वपूर्ण मौसम विभाग किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी वर्षा की साप्ताहिक जानकारी देने के लिए शुल्क वसूल कर रहा है। यानी अब वर्षा की जानकारी मौसम विभाग से खरीदनी पड़ेगी। इस प्रकार की विसंगति से केन्द्र एवं राज्य सरकारों के प्रयासों को पलीता लग सकता है।
एक तरफ मौसम विभाग के अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होने के बाद भी मौसम का पूर्वानुमान सटीक नहीं बता पा रहा है जो किसानों के लिए सबसे ज्यादा दुखदायी है।
इस वर्ष लगभग 98 फीसदी मानसूनी बारिश होने का पूर्वानुमान लगाया गया था परन्तु शेष बचे लगभग 40 दिनों में यह कोटा पूरा होना मुश्किल है। म.प्र. में गत 16 अगस्त तक की स्थिति के मुताबिक मानसून के 60 दिन बीत गए हैं। परंतु राज्य में बारिश 60 से.मी. भी नहीं हुई है। अब तक 21 फीसदी कम वर्षा हुई है।
प्रदेश में मानसून के आगमन की तिथि ही गलत साबित हुई लगभग 13 दिन लेट मानसून 26 जून को प्रदेश में आया जबकि मौसम विभाग ने 14 से 16 जून के मध्य दस्तक देने का पूर्वानुमान जताया था। वैसे राज्य में मानसून आने की सामान्य तिथि 13 जून है। वहीं मौसम विभाग ने इस वर्ष पश्चिमी म.प्र. में 815 से 956 मि.मी. के मध्य वर्षा होने का अनुमान जताया है परंतु 16 अगस्त तक 451 मि.मी. वर्षा हुई है। यह वर्षा अब तक होने वाली वर्षा 566 मि.मी. से लगभग 20 फीसदी कम है। इसी प्रकार पूर्वी म.प्र. में 967 से 1135 मि.मी. वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है। परंतु 16 अगस्त तक 544 मि.मी. वर्षा हुई है जो अब तक होने वाली वर्षा 692 मि.मी. से 21 फीसदी कम है। इस प्रकार अभी तक दोनों क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी हुई है जो फसलों के लिए नुकसान दायक साबित हो रही है। मौसम विभाग का कहना है कि कमजोर वैदर सिस्टम तथा हर बार एक साल के अंतर से मानसून एक अलग फीचर लेकर आता है इस कारण सटीक अनुमान नहीं लग पाता। बहरहाल परिस्थितियां जो भी हों किसान तोता छाप- बैल छाप भविष्यवाणियों से खुशहाल कैसे होगा, यह प्रश्न विचारणीय है। मौसम का गलत पूर्वानुमान तथा ऊपर से जानकारी खरीदना किसान एवं उससे संबंधित लोगों की परेशानी का कारण बन गया है। केंद्र सरकार के कार्यालय में इस तरह का व्यवसाय उचित प्रतीत नहीं होता।

मौसम की साप्ताहिक जानकारी अब नि:शुल्क नहीं मिलेगी। इसके लिये भारत सरकार के निर्देश के मुताबिक शुल्क देना होगा। आवेदन देने पर शुल्क तय होगा।
                           डॉ. अनुपम काश्यपि
   निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र,भोपाल
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