जैविक खेती में गौमूत्र का उपयोग

Share

नैगवां (कटनी)। ग्राम लिगरी वि.ख.-बहोरीबंद, जिला- कटनी में पोषण स्मार्ट ग्राम के अंतर्गत महिला बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण में पर्यवेक्षक, पुष्पा आरख ने प्रशिक्षण का उद्देश्य, विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं, सुपोषण अभियान, स्वच्छता आदि की जानकारी दी गई।
संचालक जैविक कृषि पाठशाला नैगवां श्री रामसुख दुबे ने जैविक खेती का महत्व, मिट्टी परीक्षण, ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, अंधाधुंध रसायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाइयों के उपयोग से उत्पादित अनाज, भूमि एवं पर्यावरण को हो रहे नुकसान के विषय में बताया। जैविक खेती में गोमूत्र एवं गोबर का उपयोग, विभिन्न जैविक कीटनाशक तथा फसल अवशेष, फूल आने से पूर्व खरपतवार, वानस्पतिक कचरे से खाद बनाने, नीमपत्ती, अकौआ, धतूरा, करंज, सीताफल आदि की पत्तियों से कीटनाशक दवा बनाने की विधि बतायी। ग्राम में ही उपलब्ध संसाधनों से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने, सहभागिता गारंटी प्रणाली के अंतर्गत आत्मा परियोजना के माध्यम से जैविक कृषि उत्पादों का पंजीकरण कराने की सलाह दी गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमनलता, कृषक ओंकार सिंह एवं काफी संख्या में महिला एवं पुरुष कृषक उपस्थित थे।

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.