खरीफ फसलों दलहन और तिलहन की मूल्य नीति पर चर्चा बैठक नई दिल्ली में संपन्न
11 फरवरी 2026, इंदौर: खरीफ फसलों दलहन और तिलहन की मूल्य नीति पर चर्चा बैठक नई दिल्ली में संपन्न – कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (केन्द्रीय कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्रालय) द्वारा देश में उत्पादित खरीफ फसलों दलहन और तिलहन के विपणन सत्र 2026-27 के लिए मूल्य नीति पर चर्चा एवं विचार विमर्श के लिए एक मीटिंग चेयरमेन डॉ. विजय पाल शर्मा की अध्यक्षता में कृषि भवन, नई दिल्ली में गुरुवार को सम्पन्न हुई |
यह जानकारी देते हुए ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सुरेश अग्रवाल ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि मीटिंग में दलहन और तिलहन के विपणन सत्र 2026-27 के लिए मूल्य नीति पर गंभीरतापूर्वक चर्चा एवं विचार विमर्श किया गया | ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन की ओर से सरकार को यह सुझाव दिया कि केंद्र सरकार द्वारा भारत में मटर का आयात भारी मात्रा मे किया जा रहा है, मटर के निरंतर आयात से देश के किसानों को उनकी कृषि उपज का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है, इससे किसानों को अत्यधिक नुकसान हो रहा है, मटर पर कम से कम 50% आयात शुल्क लगाने की आवश्यकता है | साथ ही तुअर, उड़द, मसूर, चना का आयात भी निरंतर हो रहा है, देश में अधिक मात्रा में मसूर, चना, तुअर का आयात होने के कारण भारत के किसान आयात से परेशान हो रहें हैं । आयात ज़्यादा होने से देश के किसानों को उनकी कृषि उपज की कीमत बहुत कम प्राप्त हो रही है और खेती में नुकसान हो रहा है | अधिक नुकसान होने से किसान अन्य कृषि उपज की खेती की ओर आकर्षित हो रहें हैं |
13 बिंदुओं में दिए सुझाव – देश के किसानों को उनकी कृषि उपज के लागत मूल्य से अधिक मूल्य मिलने पर ही उनकी उन्नति एवं प्रगति संभव हो सकेगी, देश का किसान संपन्न होगा, तो वह अपने एवं अपने परिवार के लिए गृह उपयोगी वस्तुएं खरीद सकेगा, जिससे देश के अन्य उद्योग धंधों में भी वृद्धि होगी । संस्था की ओर से दाल इंडस्ट्रीज़ का प्रतिनिधित्व करते हुए अध्यक्ष श्री सुरेश अग्रवाल ने 13 बिंदुओं में अपने सुझाव दिए जिनमें तुअर की खेती में समय ज़्यादा लगने और कीमत कम मिलने , हर ऋतु में मेहनत करने वाले किसानों को उपज का वाज़िब मूल्य मिलने , मजदूरी एवं कृषि आदान महंगे होने से तुअर का समर्थन मूल्य कम से कम 9000/- से 9500/- रुपए प्रति क्विंटल (100 KG), उड़द का समर्थन मूल्य कम से कम 9000/- से 9500/- रूपए प्रति क्विंटल (100 KG), तथा गेहूं का समर्थन मूल्य 3300/- रूपए प्रति क्विंटल (100 KG) किया जाना चाहिए। बाहर से तुअर आने की वजह से देश के किसानों को उनकी कृषि उपज की कम कीमत मिलने ,देश में समर्थन मूल्य बढ़ने पर मूंग, तुअर, उड़द, गेहूं का उत्पादन बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करने,मूंग, तुअर, उड़द का उत्पादन कम रहने पर हम अन्य देशों पर आश्रित हो जाते है, विदेशों से दलहन मंगवाना पड़ता है, आज विदेशों से तुअर, उड़द, मसूर आयात करके भारत में कमी को पूरा किया जा रहा है, जबकि तुअर, उड़द, मसूर का उत्पादन भारत में बढ़े, इस प्रकार की पॉलिसी सरकार द्वारा बनाने ,नेफेड द्वारा खरीदी गई कृषि उपज को लगभग 3 साल तक भण्डारण करके रखा जाता है,जिससे कृषि उपज की गुणवत्ता खराब होती है, अतः सरकारी एजेंसी द्वारा ख़रीदे गये दलहन (कृषि उपज) को एक वर्ष में विक्रय करने ,सरकारी एजेंसियों के द्वारा दलहनों की बिक्री समर्थन मूल्य से नीचे ना करने ,सभी तरह के दलहन, खाद्यान्न जो कि समर्थन मूल्य पर खरीद होते है, उनकी गुणवत्ता सरकारी एजेंसियों के द्वारा प्रमाणित करने ,सभी प्रकार के दलहनों की FAQ क्वालिटी खेत में एक जैसी उत्पन्न नहीं होने से बड़ा दाना, छोटा दाना, डैमेज दाना, कम डैमेज दाना तुअर, मूंग व उड़द का फसलों में अलग – अलग प्रकार का होता है। इस प्रकार अनेक क्वालिटी अनेक भाव में क्वालिटी अनुसार कम ज्यादा भाव में किसानों की फसल विक्रय होती है। इसलिए उत्तम बीज की व्यवस्था करने, तुअर की खेती करने के लिए कोई मशीने नहीं है, तुअर का बीज हाथ से लगाना पड़ता है, इसमें ट्रैक्टर व अन्य उपकरण से मदद नहीं मिलने ,फसल की सफाई व कटाई मजदूरों से करवाने से यह मेहनत की खेती है | आजकल किसान भी ट्रैक्टर व बिजाई की मशीनों की खेती में ज्यादा रुचि लेने , कुछ समय से भारत के किसानों का दलहन के उत्पादन के स्थान पर सोयाबीन, सरसों, कपास, गन्ना व अन्य फसलों के उत्पादन की ओर ध्यान देने से दलहन का उत्पादन कम होने से पिछले कुछ वर्षों से कनाड़ा और ऑस्ट्रेलिया से मसूर का काफी आयात हुआ है, ऑस्ट्रेलिया से चना, कनाड़ा से मसूर तथा रूस एवं कनाड़ा से अभी चना एवं मटर काफी मात्रा मे आयात होने से देश के किसानों को मटर में नुकसान हो रहा है। इन सब कारणों को देखते हुए संस्था ने देश के किसानों की उन्नति के लिए तुअर, उड़द, मसूर एवं चना के मूल्यों में वृद्धि करने तथा देश के बाहर से मटर और तुअर का आयात बंद करने का सुझाव दिया है।
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