खेती को लाभकारी बनाने 5 बातों का ध्यान रखना जरूरी

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(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। देश एवं प्रदेश के किसानों की लागत को कम कर उत्पादन बढ़ाना होगा तथा नई तकनीक का प्रयोग करना होगा। 5 प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान देना वर्तमान की आवश्यकता है। अपनी बात को विस्तार देते हुए कृषि एवं लागत  मूल्य आयोग नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रोफेसर विजय पाल शर्मा ने कृषक जगत को विशेष मुलाकात में बताया कि मध्य प्रदेश सोयाबीन स्टेट के नाम से जाना जाता है। परंतु अब राज्य में सोयाबीन की उत्पादकता लगभग स्थिर हो गई है इसे नई तकनीक का प्रयोग कर बढ़ाना चाहिए जिससे उत्पादकता में वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि नई मशीनें, विपुल उत्पादन देने वाली किस्में जैसी तकनीक अपनाकर उत्पादन में वृद्धि करनी चाहिए।
उन्होंने उत्पादकता के संबंध में कहा कि देश के कई प्रदेशों में उत्पादकता में काफी अंतर है। पंजाब और म.प्र. की उत्पादकता में असमानता है। उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास करने होंगे।
अध्यक्ष ने बताया कि कृषि विस्तार के क्षेत्र में भी ध्यान देने की जरूरत है। किसानों को आवश्यकता अनुसार आदान उपलब्ध करना होगा। उन्होंने कहा कि लागत में कमी कर अधिक लाभ लिया जा सकता है। जिस क्षेत्र में जो फसल अधिक होती है उसे लेना चाहिए।
कटाई बाद प्रबंधन के संबंध में श्री शर्मा ने बताया कि इसमें हम पीछे हैं अभी देश में इस दिशा में गंभीरता से प्रयास नहीं हुआ। किसानों में जागरूकता के अभाव में 30-40 प्रतिशत नुकसान कटाई बाद हो जाता है, जिस पर रोक लगाना जरूरी है। साथ ही फसलों का  मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडीशन) स्थानीय स्तर पर होगा तो किसान के मुनाफे में बढ़ौतरी होगी।
भारत की जीडीपी में कृषि  की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है, वहीं एक अनुमान के मुताबिक 60-70 प्रतिशत बड़ी जनसंख्या खेती पर ही निर्भर है। कृषि से निर्भरता कम करने के लिये खेती से युवा वर्ग को दूसरे उद्योग धंधों, कौशल विकास एवं अन्य गैर कृषि क्षेत्रों की ओर भी प्रेरित करना होगा।
प्रोफेसर शर्मा ने खाद्यान्न आयात के मुद्दे पर बेबाकी से कहा कि राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में और तुलनात्मक हितों को दृष्टिगत रखते हुए समर्थन मूल्य निर्धारण किया जाता है। वहीं आपने जोर दिया कि घरेलू किसानों के हित को अनदेखा कर गेहूं-चावल नहीं आयात करना चाहिए।
अध्यक्ष ने बताया आय में वृद्धि करने के लिये ग्रामीण एवं कृषि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ जिला स्तर पर किसानों को प्रशिक्षण देना होगा। उन्होंने बताया कि आल इंडिया बेस पर समर्थन मूल्य तय किये जाते है जिसमें सभी मुख्य मुद्दों को ध्यान में रखा जाता है।
श्री शर्मा ने बताया कि अगले खरीफ के लिये मूल्य निर्धारण नीति की बैठक अन्य राज्यों में की जाएगी। उन्होंने बताया कि समर्थन मूल्य निर्धारण के लिए आयोग के अधिकारियों को भी फील्ड में जाकर वस्तुस्थिति को जानना, किसानों की समस्याओं को समझना समीचीन है।  उन्होंने बताया कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तभी किसान को फायदा होगा।

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