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दुधारू पशुओं में टीकाकरण का महत्व

खुरपका एवं मँहपका (एफएमडी) – यह विषाणु से होने वाला एक प्रमुख रोग है, जिसमें पशुओं के जीभ, ऊपरी जबड़े एवं खुर पर फफोले पड़ जाते हैं इस रोग से ग्रसित पशु लंगड़ानेे लगता है एवं चारा पानी बंद कर देता है, जिससे पशुओं के दूध उत्पादन में कमी आ जाती है और कार्य करने की क्षमता घट जाती है।
गलघोटू (एचएस) – यह जीवाणु से होने वाला एक प्रमुख रोग है, जिसमें पशुओं में तेज बुखार, नाक से अत्यधिक स्राव, सांस लेने में परेशानी एवं गर्दन में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
लंगड़ी रोग (बीक्यू) – यह जीवाणु से होने वाला रोग है, जिसमें पशुओं में तेज बुखार, खाना-पीना बंद कर देना, सांस लेने में परेशानी एवं पशुओं में लंगड़ापन  जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
गिल्टी रोग (एन्थैक्स) – यह जीवाणु से होने वाला एक प्रमुख रोग है। जिसे फांसी एवं कलपुली भी कहते हैं। इसमें पशुओं में अचानक तेज बुखार आना, सांस लेने में परेशानी, नाक, योनि एवं गुदा से रक्त स्राव एवं अचानक मौत जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
बु्रसिलोसिस – यह जीवाणु से होने वाला एक प्रमुख रोग है। जिसमें पशुओं में गर्भपात, जीर का रूकना एवं नपुंसकता जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
थाइलेरियोसिस – यह प्रोटोजोओं से होने वाला एक प्रमुख रोग है। जिसमें पशुओं में बुखार आना, गिल्टी का बड़ा होना, शरीर का नीला पडऩा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
टीका- टीका वह पदार्थ है जिसमें हम रोग करने वाले जीवाणु, विषाणु एवं प्रोटोजोआ को असक्रिय अवस्था में पशु के शरीर में डालते हंै और यह शरीर में जाने के बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करता है, जो पशुओं को रोगों से सुरक्षा करता है।
टीकाकरण – पशु में टीका लगाने की विधि को टीकाकरण कहते हैं।

केला के प्रमुख रोग एवं निदान

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