डीबीटी की आटोप्सी करने आई भारत सरकार

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भोपाल। आटोप्सी। जी हाँ याने पोस्टमार्टम! बिना तैयारी के सरकारी योजनाओं का क्या हश्र होता है, इसका ताजा प्रमाण है उर्वरक वितरण में डीबीटी। केंद्र सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना भी एक और मकबरा साबित हो रही है। प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन एवं तैयारी के लिए बनाई गई नोडल एजेंसी एनएफएल का और भी बुरा हाल है। 1 जून से लागू होने वाली यह योजना अब तक प्रदेश में लागू नहीं हो पायी है इस कारण गत दिनों केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव को योजना का पोस्टमार्टम करने के लिए बैठक का आयोजन करना पड़ा। प्रदेश में न तो पर्याप्त मात्रा में पीओएस मशीनें हैं और न ही प्रशिक्षण देने की व्यवस्था। स्टाफ की कमी का रोना रोकर सभी जिम्मेदार पल्ला झाड़ रहे हैं और खरीफ सीजन अपने चरम पर है। नोडल एजेंसी भी ऐसी कि बात करने के लिए कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं है।

हालांकि संयुक्त सचिव श्री धर्मपाल भी डीबीटी की बैठक लेने नहीं आए थे वे राष्ट्रपति चुनाव के समन्वय के लिये आए थे परंतु समय का सदुपयोग करने के दृष्टिकोण से उन्होंने मंत्रालय में बैठक ली, जिसमें कंपनियों के प्रतिनिधि, सहकारी संस्थाओं के अधिकारी व कृषि के अधिकारियों ने भाग लिया।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 6100 पी.ओ.एस. मशीनें उपलब्ध करायी गई हैं परंतु इसमें से मात्र 1675 मशीनें स्टाल की जा सकी हैं। इसमें भी लगभग 1600 मशीन कार्य कर रही हैं। ऐसा लगता है मशीनों को स्टाल करने में ही खरीफ सीजन बीत जाएगा।
कंपनियों को चेतावनी – वैसे संयुक्त सचिव श्री धर्मपाल ने बैठक लेकर इस डीबीटी योजना में गति लाने का प्रयास किया है। उन्होंने कंपनियों को चेतावनी भी दी है कि 1 अगस्त से खाद वितरण किया जाएगा, चाहे पी.ओ.एस. मशीन लगे या न लगे, फिर सब्सिडी के लिये कंपनियां स्वयं जिम्मेदार होंगी। उन्होंने निर्देश दिया कि सहकारी समितियों को पी.ओ.एस. मशीन लगाने में प्राथमिकता दें। साथ ही आधारकार्ड के अलावा वोटर आई डी कार्ड को भी मान्य किया जाए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत सरकार के ऑनलाईन के लिये 10 सर्वर कार्य कर रहे हैं इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी।

नौ दिन चले अढ़ाई कोस
उर्वरक डीबीटी योजना के लिये नेशनल फर्टिलाइजर लि. को नोडल एजेंसी बनाया गया है, परंतु इसका हाल नौ दिन चले अढ़ाई कोस जैसा है। कार्य में गति लाने का कोई विशेष प्रयास नहीं किया जा रहा है। कृषक जगत ने जब डीबीटी योजना के संबंध में दूरभाष पर बात करने का प्रयास किया तो एनएफएल के लैण्ड लाईन फोन पर श्री लाखे ने फोन रिसीव कर कहा कि मीटिंग चल रही है बाद में बात करिये। बाद में लगाने पर फोन व्यस्त कर दिया गया। अगर नोडल एजेंसी और उसके दूरभाष ऐसे ही कार्य करेंगे तो खरीफ क्या रबी सीजन भी निकल जाएगा और किसान को खाद नहीं मिलेगी तथा कंपनियां सब्सिडी से वंचित रह जाएगी।
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