कृषि क्षेत्र में जल के उचित उपयोग को बढ़ावा देना होगा

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नाबॉर्ड की ऋण संगोष्ठी ‘पर ड्राप मोर क्रॉप’ पर केन्द्रित

भोपाल। वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के मिशन को हासिल करने के लिए सरकार, बैंक और विकास कार्य में लगी हुई अन्य एजेंसियों को संयुक्त रूप से मिलकर प्रयास करना होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2018-19 का विषय जल संरक्षण प्रति बूंद अधिक फसल रखा गया है।
यह विचार गत दिनों मध्य प्रदेश कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबॉर्ड) के स्टेट क्रेडिट सेमिनार में निकलकर आए। इस दौरान ‘स्टेट फोकस पेपर’ भी जारी किया गया। सेमिनार में नाबॉर्ड की ओर से बताया गया कि वर्ष 2018-19 के लिए बैंकों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत 1,52,106 करोड़ रुपए की ऋण संभाव्यता का आंकलन किया गया है। स्टेट फोकस पेपर में बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध कराए जाने की संभावना को दर्शाया जाता है। सेमिनार में मुख्य अतिथि कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पीसी मीणा थे। उन्होंने नाबॉर्ड द्वारा एक व्यापक दस्तावेज तैयार किए जाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बैंकों से मध्य प्रदेश शासन की योजनाओं में भी ऋण प्रदान करने की अपील की। सेमिनार में प्रमुख सचिव, कृषि डॉ. राजेश राजौरा, भारतीय रिजर्व बैंक की प्रभारी अधिकारी मंजूला रतन, सेन्ट्रल बैंक के फील्ड महाप्रबंधक श्री अजय व्यास, नाबॉर्ड के डीजीएम श्री के. अर्दनारेशवरण ने भी संबोधित किया।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक श्री केआर राव ने कहा कि इस बार वाटर कैंपेन को ज्यादा महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करना और कृषि क्षेत्र में जल के उचित उपयोग को बढ़ावा देना है। बैंकों के बढ़ते एनपीए को लेकर उन्होंने कहा कि एग्रीकल्चर सेक्टर में बैंकों का एनपीए कम है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कृषि बीमा का कवरेज 41 प्रतिशत हो चुका है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्रत्येक कृषक को कवर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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