इस वर्ष 510 कस्टम हायरिंग केन्द्र स्थापित होंगे

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भोपाल। खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2012-13 से कस्टम हायरिंग केन्द्र स्थापित करने की योजना प्रारंभ की गई है इसमें लघु एवं सीमांत किसानों को किराए पर ट्रैक्टर एवं कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाते हैं। जिससे समय एवं श्रम की बचत होती है तथा उत्पादन बढ़ता है। विगत 5 वर्षों में म.प्र. में 1786 कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं। इस वर्ष 2017-18 में राज्य में 510 कस्टम हायरिंग केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया है। जिसकी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। यह जानकारी कृषि अभियांत्रिकी के संचालक श्री राजीव चौधरी ने कृषक जगत को दी।

योग्यता एवं अनुदान

श्री चौधरी ने बताया कि इस वर्ष प्रत्येक जिले में 10 केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिये शैक्षणिक आर्हता में संशोधन किया गया है। अब तक स्नातक उम्मीदवार केंद्र के लिये आवेदन कर सकते थे। परंतु इस वर्ष 12वीं उत्तीर्ण ग्रामीण युवक को भी पात्र बनाया गया है। उन्होंने बताया कि 25 लाख तक के ट्रैक्टर एवं कृषि यंत्र किराए पर चलाने के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर क्रय किए जा सकते हैं इसमें लागत का 40 फीसदी अधिकतम 10 लाख रुपये का अनुदान बेक एडेड सब्सिडी के रूप में बैंक ऋण के विरूद्ध दिया जाता है। यह सब्सिडी ऋण चुकाने के बाद बैंक द्वारा समायोजित की जाती है। सब्सिडी के बराबर राशि पर बैंक द्वारा ब्याज नहीं लिया जाता है।

 म.प्र. का मॉडल बंगाल भी अपनाएगा

म.प्र. की कस्टम हायरिंग योजना माडल को अब अन्य राज्य भी अपनाने की योजना बना रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अब इस योजना मॉडल को जानने एवं समझने के लिए गत दिनों पश्चिम बंगाल के कृषि विभाग ने कोलकाता में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया जिसमें म.प्र. के संचालक कृषि अभियांत्रिकी को आमंत्रित किया। बैठक में कस्टम हायरिंग योजना के संबंध में संचालक ने विस्तार के जानकारी दी जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने सराहा। श्री चौधरी के मुताबिक मध्य प्रदेश के इस कस्टम हायरिंग मॉडल के संबंध में राजस्थान, तेलंगाना एवं केरल जैसे राज्यों ने भी रूचि दिखाई है।

कृषकों को लाभ

संचालक ने बताया कि प्रदेश में अब तक स्थापित प्रत्येक केंद्र से औसतन लगभग 100 से 125 कृषक लाभ ले रहे हैं। इस कस्टम हायरिंग मॉडल को अन्य राज्य भी अपना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना से प्रदेश के फार्म पावर को बढ़ाने में भी मदद मिली है। वर्ष 2012-13 में फार्म पावर 0.85 किलोवाट प्रति हेक्टेयर था वह बढ़कर 2015-16 में 1.85 किलोवाट प्रति हेक्टेयर हो गया है।

  • 10 लाख की सब्सिडी।
  • 0.85 किलोवाट से बढ़कर फार्म पावर 1.85 हुआ।
  • 1786 सेन्टर अभी तक।
  • 510 सेन्टर इस वर्ष।
  • 7 मशीनें एक सेन्टर में।

सेन्टर के लिये अनिवार्य यंत्र
श्री चौधरी ने बताया कि इस योजना से लाभान्वित होकर किसान अब उन्नत एवं कीमती यंत्रों को कम करने में भी रूचि ले रहे हैं। वर्तमान में कृषि कार्य के लिये प्रत्येक केन्द्र में एक ट्रैक्टर (35 बीएचपी से 55 बीएचपी तक) एक प्लाऊ, एक रोटावेटर, एक कल्टीवेटर या डिस्क हेरो, एक सीड कम फर्टिलाईजर ड्रिल, एक ट्रैक्टर चलित थ्रेशर या स्ट्रा रीपर एवं एक रेज्ड बेड प्लांटर या राईस ट्रांसप्लांटर यंत्र को क्रय करना अनिवार्य किया गया है।

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