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मैंने असिंचित अवस्था में सुजाता गेहूं लगाया है अच्छा अंकुरण हुआ है कहीं-कहीं चांस में गेहूं उकट रहा है। कारण तथा उपाय बतायें।

समाधान– असिंचित अवस्था में गेहूं में अंकुरण के बाद का उकटा दो कारणों से होता एक दीमक के प्रकोप के कारण तो दूसरा फफूंदी के कारण दोनों को पहचाना जा सकता है। पोई के साथ जड़ आये और खोखला दाना हो तो वह फफूंदी के कारण होता है। इसका उपचार करने की जरूरत ही नहीं पड़ती यदि बुआई पूर्व बीज का उपचार थाईरम से क्लोरोपाईरीफास द्वारा किया गया हो तो अच्छा होगा। खड़ी फसल में अब प्रकोप बढऩे की संभावना कम है आपने बीजोपचार नहीं किया जो भविष्य के लिये सबक होगा। यदि प्रकोप कहीं-कहीं हो तो यथासंभव खाली स्थान पर स्वस्थ उपचारित बीज डाले और झारे से सिंचाई करें ताकि पौध संख्या कम होकर उत्पादन प्रभावी नहीं हो पाये। क्लोरोपायरीफास 20 ई.सी. दवा 2 मि.ली./ लीटर पानी में घोल बनाकर ग्रसित क्षेत्र में डालें ताकि दीमक के प्रकोप पर विराम लग सके।

– प्रेम नारायण शर्मा, विदिशा

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