दलहनी फसलों में आत्मनिर्भरता के लिये किसानों का सराहनीय प्रयास

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पूरे देश में जहां इस वर्ष अभी तक सामान्य वर्षा हुई है। वहीं मध्यप्रदेश में यह सामान्य से 18 प्रतिशत अधिक हुई। छत्तीसगढ़ में यह सामान्य तथा राजस्थान में यह सामान्य से 28 प्रतिशत अधिक हुई है। जहां देश में खरीफ मौसम में सामान्यत: 1025.02 लाख हेक्टर में खेती होती है वहीं इस वर्ष यह 1064.42 लाख हेक्टर तक पहुंचने का अनुमान है। 39.40 लाख हेक्टर में बुआई के रकबे में बढ़ोत्तरी एक शुभ संकेत है। मध्यप्रदेश में जहां खरीफ में सामान्यत: 118.70 लाख हेक्टर में खरीफ की फसलें ली जाती थीं। वहीं इस वर्ष यह 131.11 लाख हेक्टर में लिए जाने का अनुमान है। बुआई क्षेत्र में 12.40 लाख हेक्टर की वृद्धि सामान्य वृद्धि नहीं है। राजस्थान में भी इसमें 2.38 लाख हेक्टर तथा छत्तीसगढ़ में 1.47 लाख हेक्टर वृद्धि का अनुमान है। मध्यप्रदेश में जहां सोयाबीन तथा अन्य तिलहनी फसलों का रकबा 64.34 लाख हेक्टर रहता है इस वर्ष यह घटकर 61.11 लाख हेक्टर रह गया। रकबे में यह 3.23 लाख हेक्टर की कमी सोयाबीन के रकबे में कमी के कारण हुई है। सोयाबीन की खेती लगातार उन्हीं खेतों में करना व फसल चक्र न अपनाने के कारण आने वाली समस्याओं के कारण यह कमी आ रही है और जाने वाले वर्षों में सोयाबीन के रकबे में और कमी की संभावना है। जबकि राजस्थान में तिलहनी फसलों के रकबे में 1.87 लाख हेक्टर वृद्धि होने की संभावना है व छत्तीसगढ़ में भी तिलहनी फसलों के रकबा में 47 हजार हेक्टर बढ़ा है।
इस वर्ष देश व प्रदेश के किसान दलहनी फसलों की ओर आकर्षित हुए हैं। जहां देश में सामान्यत: 107.59 लाख हेक्टर में खरीफ दलहनी फसलों की खेती की जाती है वहीं इस वर्ष यह 146.24 लाख हेक्टर में ली गयी है। दलहनी फसलों में 45.5 प्रतिशत की वृद्धि देश की आवश्यकता के अनुरूप है और देश के किसानों द्वारा दलहन फसलों में भी देश को आत्मनिर्भर बनाने में पहला कदम सिद्ध होगा। केंद्रीय व राज्य सरकारों को भी उनके इस प्रयास का सम्मान करते हुए उनके हितों का ध्यान रखना होगा ताकि उन्हें अपने उत्पात का सही मूल्य मिल सके। इसमें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के किसानों का भी योगदान है। जिन्होंने किसी न किसी दलहन के रकबे में वृद्धि कर दलहन उत्पादन में अपना योगदान देने का प्रयास किया है। जहां मध्यप्रदेश के  किसानों में अरहर 1.82 लाख, उड़द 5.13 लाख, मूंग 1.23 लाख हेक्टर अधिक क्षेत्र में लगा कर अपना योगदान दिया है। वहीं राजस्थान के किसानों ने उड़द 1.90 लाख तथा मूंग 5.78 लाख हेक्टर अधिक क्षेत्र में लगाया है। वहीं छत्तीसगढ़ में अरहर 84 हजार, उड़द 53 हजार तथा मूंग 25 हजार अतिरिक्त क्षेत्र में लगाकर दलहन फसलों में देश को आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दिया है जिसके लिए इन तीनों प्रदेशों के किसान बधाई के पात्र है। दलहनी किसानों के हितों को देखना व उन्हें दलहनों के उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना राज्य सरकारों का काम है, अन्यथा उनके इन प्रयासों को धक्का लगेगा।

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