बिहार में उर्वरक की कालाबाजारी पर जीरो टालरेंस नीति

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14 जुलाई 2021, पटना ।  बिहार में उर्वरक की कालाबाजारी पर जीरो टालरेंस नीति – बिहार में धान की बुआई का समय नजदीक आने के साथ रासायनिक खाद विशेषकर यूरिया की मांग में वृद्धि होने लगी है I मांग में वृद्धि के साथ ही यूरिया की कालाबाजारी , निर्धारित मूल्य से अधिक मूल्य पर बिक्री जैसी शिकायतें जोर पकड़ने लगी हैं I प्रदेश के कृषि विभाग ने राज्य में इस विषय पर जीरो टालरेंस नीति के आदेश जारी कर दिए हैं I

बिहार के कृषि निदेशक श्री आदेश तीतरमारे द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा जीरो टालरेंस नीति के अंतर्गत निर्धारित मूल्य पर ही उर्वरक किसानों को उपलब्ध करने का निर्णय लिया गया है I आदेश में सभी उर्वरक आपूर्तिकर्ताओं और निमाताओं को निर्देश दिए गए हैं कि उर्वरकों को बिक्री केंद्र तक पहुँचाने की जिम्मेदारी आपूर्तिकर्ता कंपनी की होगी, यदि इसमें किसी तरह की त्रुटी पाई जाती है और उर्वरक निर्धारित मूल्य से अधिक पर बिकने की शिकायत आती है तो सम्बंधित कंपनी के विरुद्ध एफसीओ 1985 एवं ईसी एक्ट के अनुसार कार्यवाही की जाएगी I कृषि विभाग ने इस नीति के पालन के लिए पंचायत स्तर तक व्यवस्था बनाई है और विभाग के अधिकारीयों की जवाबदेही भी तय की है I

बिहार में खरीफ सीजन में धान और प्याज के साथ अन्य खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आने लगी है I यूरिया नियंत्रित उर्वरक होने के कारण राज्यवार इसका वितरण केंद्र द्वारा निर्धारित किया जाता है I राज्य को मिले कोटे के अंतर्गत प्राप्त यूरिया की राज्य के अन्दर सुचारू वितरण व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है I बिहार में इस खरीफ सीजन में लगभग 10 लाख टन यूरिया की खपत अनुमानित है I इसी तरह लगभग 3.50 लाख टन डीएपी और 2 लाख टन एनपीके की खपत इस सीजन में होने की संभावना है I 

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