उन्नत बीज और तकनीक से महिला किसान को मिली बड़ी सफलता, 1 हेक्टेयर में हुई 16 क्विंटल सरसों की पैदावार
19 जनवरी 2026, रायपुर: उन्नत बीज और तकनीक से महिला किसान को मिली बड़ी सफलता, 1 हेक्टेयर में हुई 16 क्विंटल सरसों की पैदावार – भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ खेती केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव भी है। छत्तीसगढ़ में किसान आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के सहयोग से लगातार प्रगति कर रहे हैं। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के विकासखंड लोरमी के ग्राम बिंदावल की महिला किसान बजरहीन बाई गोंड ने सरसों की खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
बजरहीन बाई गोंड पिछले 30 वर्षों से खेती से जुड़ी हुई हैं और उनके परिवार की आजीविका पूरी तरह कृषि पर निर्भर है। वर्ष 2025-26 में उन्होंने कृषि विभाग की टिफा (फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन) योजना के अंतर्गत सरसों फसल प्रदर्शन कार्यक्रम में भाग लिया। इस योजना के तहत उन्हें 1.970 हेक्टेयर क्षेत्र में उन्नत किस्म के सरसों बीज उपलब्ध कराए गए।
कृषि विभाग के सहयोग से मिली तकनीकी मदद
कृषि विभाग लोरमी द्वारा उन्हें केवल उन्नत बीज ही नहीं, बल्कि समय-समय पर खाद, रोग-व्याधि नियंत्रण किट और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। वैज्ञानिक मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक प्रभाव फसल पर साफ नजर आया, जिससे सरसों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
असिंचित क्षेत्र में भी शानदार उत्पादन
आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने का परिणाम यह रहा कि बजरहीन बाई गोंड को असिंचित क्षेत्र में भी 1 हेक्टेयर से 16 क्विंटल सरसों का उत्पादन प्राप्त हुआ, जो क्षेत्र की औसत उपज से कहीं अधिक है। बेहतर उत्पादन के कारण उनकी आय में वृद्धि हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।
आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
बजरहीन बाई गोंड बताती हैं कि कृषि विभाग की योजनाओं और वैज्ञानिक मार्गदर्शन ने उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ आत्मविश्वास भी दिया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय कृषि विभाग लोरमी और जिला प्रशासन मुंगेली को देते हुए आभार व्यक्त किया है। उनकी यह सफलता अन्य किसानों, विशेषकर महिला किसानों के लिए उन्नत तकनीक अपनाने और सरकारी योजनाओं से जुड़ने की प्रेरणा बन रही है।
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