राज्य कृषि समाचार (State News)

किसानों की आवाज़ सरकार तक पहुँचेगी या फिर दब जाएगी रिपोर्टों में?

06 अप्रैल 2025, जयपुर: किसानों की आवाज़ सरकार तक पहुँचेगी या फिर दब जाएगी रिपोर्टों में? –  राजस्थान किसान आयोग ने गुरुवार को जयपुर के पंत कृषि भवन में एक बैठक की। अध्यक्ष सी.आर. चौधरी की अगुवाई में हुई इस बैठक में किसानों, पशुपालकों और कृषि श्रमिकों की समस्याओं पर बात हुई। आयोग अब इनके समाधान के लिए एक रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगा। लेकिन क्या इससे वाकई कोई ठोस बदलाव आएगा, ये देखने वाली बात होगी।

बैठक में क्या हुआ?

बैठक में कई विभागों के अधिकारियों ने अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। इनमें संभावित सुधार और नए विचारों पर भी चर्चा हुई। चौधरी ने कहा, “कृषक कल्याण के लिए राज्य सरकार सदैव कटिबद्ध है।” उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे योजनाओं से ज्यादा से ज्यादा किसानों और पशुपालकों को जोड़ें। उनका तर्क था कि राजस्थान में ज्यादातर लोग खेती और पशुपालन से जुड़े हैं, लेकिन इनकी संख्या घट रही है।

चौधरी ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही और इसे मिशन मोड में अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने योजनाओं को लागू करने में आ रही दिक्कतों को दूर करने की भी बात की, ताकि ज्यादा किसानों तक फायदा पहुंचे। आयोग को विभागों और किसानों के बीच सेतु की भूमिका निभाने के लिए देखा जा रहा है।

चौधरी ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा को आयोग की सिफारिश से 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया गया है। फार्म पॉन्ड के लक्ष्य भी बढ़ाए गए हैं। इसके अलावा, उन्होंने कृषि यंत्रों पर अनुदान, अतिवृष्टि से फसल नुकसान का मुआवजा जल्द देने, बुआई से पहले प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने, जैविक खेती को बढ़ाने और जैविक उत्पादों के लिए मंडियों में सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए। लेकिन इन निर्देशों का असर कितना होगा, ये जमीन पर लागू होने पर ही पता चलेगा।

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बैठक में कृषि, उद्यान, पशुपालन, जलग्रहण विकास, सहकारिता जैसे विभागों के अधिकारी मौजूद थे। राजफेड, बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण संस्था, उदयपुर, जोबनेर, जोधपुर और बीकानेर के कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इसके अलावा, केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान केंद्र और राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन के लोग भी वहां थे।

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आयोग अब एक रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें किसानों की समस्याओं और उनके हल सुझाए जाएंगे। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये रिपोर्ट सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या सचमुच कुछ बदलाव लाएगी? खेती और पशुपालन से जुड़े लोगों की मुश्किलें कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है, और इसका नतीजा आने वाले दिनों में दिखेगा।

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