राज्य कृषि समाचार (State News)

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद 10 मार्च से शुरू

गेहूं खरीद के लिए टारगेट 80 लाख मीट्रिक टन रखा गया

28 फरवरी 2026, भोपाल: न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद 10 मार्च से शुरू – मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद 10 मार्च से शुरू होने वाली है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गए हैं। मप्र में गेहूं खरीद के लिए टारगेट 80 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। गेहूं खरीदी की तैयारियों के बीच इस बार राज्य सरकार ने इस खरीदी के लिए अग्रिम राशि 20 हजार करोड़ रुपए केंद्र से मांगी गई है, ताकि बकाया को लेकर आगे दिक्कत न हो।
 गौरतलब है कि मप्र में हर साल गेहूं का बंपर उत्पादन होता है। सरकार हर साल रिकॉर्ड गेहूं खरीदती है। इस दौरान किसानों को होने वाले भुगतान में देरी भी होती है। ऐसे में इस बार सरकार की कोशिश है कि खरीदी के तुरंत बाद ही किसानों का भुगतान किया जा सके।
मप्र में सरकार ने गेहूं खरीदी की तैयारी शुरू कर दी है। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा रबी में हुई गेहूं की खरीदी के 2894 करोड़ रुपए और खरीफ धान खरीदी के 2024 के 3482.78 करोड़ रुपए का पुनर्भुगतान की समय सीमा 30 सितंबर 2025 नियत की गई थी। आरबीआई से इसके पुनर्भुगतान की समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया है, परंतु सहमति नहीं मिली है। इसलिए 4217 करोड़ रुपए का भुगतान तत्काल करवाने का कष्ट करें, ताकि साख का निर्धारण हो सके और राज्य सरकार बैंक से लोन का निर्धारण कर खरीदी के लिए बैंकों से लोन लिया जा सके।

मप्र की रबी में गेहूं खरीदी के लिए उपार्जन नीति 10 मार्च तक घोषित होगी। इसके पहले 6 मार्च को दिल्ली में खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के साथ मप्र के खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के अफसरों की बैठक होना है। इसी के बाद गेहूं उपार्जन की नीति तय की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव हाल ही में दो मर्तबा मंत्री प्रहलाद जोशी से चर्चा कर चुके हैं। प्रदेश में गेहूं और धान की खरीदी के लिए दो एजेंसी तय है इसमें खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड। यह राशि मार्कफेड से संबंधित थी जिसके लिए पत्र लिखा गया था इसके बाद कैबिनेट से 1 हजार करोड़ रुपए और केंद्र से राशि मिलने के बाद राशि जमा कर दी गई है। इस पत्र में रबी एवं खरीफ की वर्ष 2011-12 से 2016-17 तक के बकाया 3139 करोड़ रुपए की भी मांग की है। 2020 से लेकर 2025 तक के 7593 करोड़ रुपए बकाया है। इस तरह कुल 10733 करोड़ रुपए बकाया है।  इधर, कांग्रेस के विधायक बाला बच्चन ने सवाल पूछा है कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि बैंकों का 72 हजार करोड़ रुपए कर्जा है, जबकि केंद्र से तो मात्र 10 हजार 133 करोड़ रुपए बकाया लेना है तो बाकी राशि कौन से कर्ज की है। इस बारे में भी सरकार को स्थिति स्पष्ट करना चाहिए। इस साल गेहूं पर 160 रुपए प्रति क्विंटल बोनस तय कर समर्थन मूल्य 2585 रुपए तय किया है।

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