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  • आर.बी. सिंह, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि.
    (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति – ”कला निकेतन”,
    ई-70, विथिका संख्या-11, जवाहर नगर, हिसार-(हरियाणा), मो.: 94667-46625,
    rbsinghiffdc@gmail.com

14 जुलाई 2021, भोपाल ।  क्या है मिसब्राँड सीड – बीज, उर्वरक तथा कीटनाशी, कवकनाशी कृषि के आदान हैं, तीनों प्रमुख हैं और इनको किसानों के खेतों तक बीज, उर्वरक, कीटनाशी व्यवहारी पहुंचाते हैं। ये बीज व्यवहारी इस को अपनी जीविकोपार्जन ही नहीं मानते बल्कि प्रथम एवं द्वितीय कोरोना की लहर में आदानों को पहुंचाने में अन्य वर्गों की तरह समर्पण, सत्यनिष्ठा, कर्मनिष्ठा से सम्पादित किया और कई बीज व्यवहारी इस विभिषिका के शिकार भी हुए परन्तु न शासकीय अधिकारियों और न ही इन आदान विक्रेताओं के संघों, युनियनों ने इन्हें योद्धा घोषित कराने की आवाज उठाई। ये भी अपने कार्य क्षेत्र में मेडीकल तथा पैरा मेडीकल कार्यकर्ताओं की भान्ति सेवा देने के लिए सतत तैनात रहे और इसी का प्रतिफल है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी सकल घरेलू उत्पाद (त्र.ष्ठ.क्क.) सम्भल पाई।

देश के कृषि आदान व्यवहारियों को हेय दृष्टि से देखा जाता है और उन्हें वह सम्मान, आदर जिसके वह अधिकारी हैं कभी नहीं मिल पाता। उनका इस व्यवसाय के प्रति समर्पण वरदान के बजाय अभिशाप बन रहा है। बीज, उर्वरक कीटनाशी कानूनों की कृषि अधिकारियों द्वारा अपनी सहुलियत के अनुसार व्याख्या कर व्यवहारियों को प्रताडि़त हतोत्साहित करना सगल बन गया है। पिछले कई दिन से कृषि आदान व्यवहारियों एवं कृषि अधिकारियों में एक प्रश्न तैर रहा है कि बीज उर्वरक तथा कीटनाशी मिसब्राँड होते हैं या अमानक। मैं कानूनों में दर्ज प्रावधानों को बीज व्यवहारियों के संज्ञान में लाने का प्रयत्न कर रहा हूँ ताकि बीज व्यवहारियों के मनोमस्तिष्क में स्थिति स्पष्ट हो सके:-

मिसब्राँड सीड

बीजों की गुणवत्ता नियंत्रण हेतु बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 तथा बीज नियंत्रण आदेश 1983 है। इन तीन कानूनों में कहीं भी मिस ब्राँड शब्द का उल्लेख नहीं है बल्कि केवल स्ह्लड्डठ्ठस्रड्डह्म्स्र और स्ह्वड्ढह्यह्लड्डठ्ठस्रड्डह्म्स्र शब्द का उल्लेख है परन्तु कृषि अधिकारी भी न्यायालयों में दायर दावों में धड़ल्ले से रूद्बह्यड्ढह्म्ड्डठ्ठस्र बीज शब्द का उल्लेख करते रहते हैं। भारत सरकार समय-2 पर भारतीय न्यूनत बीज प्रमाणीकरण मानक जारी करती रहती है और विगत में वर्ष 1971, 1988 तथा निकट भूतकाल में 2013 में न्यूनतम बीज मानक संशोधित एवं प्रकाशित किए गये हैं और बीज निरीक्षकों द्वारा परिक्षणशालाओं में नमूने टैस्ट होने पर मानकों की आवश्यकताएँ न पूरी करने वाले बीज अधोस्तर कहलाएंगे। ध्यान रहे कठोर बीज तथा टोलरैन्स का लाभ बीज व्यवहारियों को मिलना चाहिए।

नये बीज अधिनियम का बिल (प्रस्ताव) विगत काल में लोक सभा में रखा गया परन्तु कुछ संशोधनों के लिए लौटा दिया गया। संशोधन के बाद पिछले सत्रों में कोरोना महामारी या समय की कमी के कारण बिल लोक सभा में प्रस्तुत नहीं किया जा सका परन्तु अब निकट भविष्य में जल्दी प्रस्तुत/पास किया जा सकता है। इस आने वाले अधिनियम में रूद्बह्यड्ढह्म्ड्डठ्ठस्र (कालकूट) बीज की विस्तृत परिभाषा दी गई है और मैंने अपने पिछले लेखों में परिभाषा को विस्तृत रूप से समझाया/ बताया था। इतना ही नहीं नये बीज अधिनियम में जाली बीज (स्श्चह्वह्म्द्बशह्वह्य) को भी परिभाषित किया है।

मिसब्राँड कीट/कवकनाशी

इनसैक्टीसाईड एक्ट 1968 की धारा 3 ्य में मिसब्राँड कीट एवं कवकनाशी को विस्तार से परिभाषित किया गया है और लगभग 8 उपधाराओं में व्याख्या दी हुई है। इस अधिनियम को बदलकर भारत सरकार कीटनाशी प्रबंधन अधिनियम 2020 जो लोकसभा से 12.02.2020 को पास हो गया और उसमें भी Misbrand Insecticide एवं स्Misbrand Insecticide जाली  Insecticide को भली विधि परिभाषित किया गया है।

मिसब्राँड उर्वरक

उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order 1985) तदन्तर संशोधित संस्करण 2015 के अनुसार कोई उर्वरक Misbrand Fertilizer नहीं होता है बल्कि भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों की तरह धारा 2(q) में उल्लेख है कि इस आदेश के भाग A में उर्वरकों के मानक दिए हैं और उन मानकों के अनुसार न होने वाले उर्वरक अधोस्तर (Substandard) तथा मानकों की पालना करते हुए उर्वरक Standard Fertilizer कहलाएंगे। ध्यान रहे उर्वरकों में भी सहनशीलता स्तर का लाभ उर्वरक व्यवहारी ले सकते हैं।

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