नरसिंहपुर के विजय ने डेयरी को बनाया फायदे का सौदा
10 जनवरी 2026, नरसिंहपुर: नरसिंहपुर के विजय ने डेयरी को बनाया फायदे का सौदा – जिले की जनपद गोटेगांव के अंतर्गत आने वाले ग्राम करकबेल के प्रगतिशील पशुपालक श्री विजय शुक्ला ने अपनी मेहनत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से डेयरी फार्मिंग को एक सफल व्यवसाय का रूप दिया है।
पशुपालक श्री शुक्ला के डेयरी फार्म में 10 उन्नत मुर्रा नस्ल की भैंस, 14 संकर व भारतीय देशी नस्लों की गाएं हैं। उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता के लिए मुर्रा नस्ल भैंस मानी जाती है, जो उनके डेयरी फार्म की मुख्य ताकत है। साथ ही भारतीय नस्लों के गोवंश के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं। इससे 120 लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन कर उन्हें करीब 30 हजार रुपये की मासिक आय प्राप्त हो रही है। श्री शुक्ला बताते हैं कि पशुपालन में आने वाली सबसे बड़ी समस्या हरे चारे की उपलब्धता होती है, वे स्वयं ही इस समस्या का समाधान करते हैं। उन्होंने अपने खेतों में उन्नत चारा फसलों का उत्पादन किया, जिससे उनके पशुओं को पौष्टिक और हरा चारा मिलता है। इसके अलावा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए वे संतुलित पशु आहार और मिनरल मिश्रण का नियमित उपयोग करते हैं।
श्री शुक्ला पशु नस्ल सुधार के लिए वे कृत्रिम गर्भाधान- एआई जैसी आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। श्री शुक्ला केवल कच्चा दूध बेचने तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने दूध की प्रोसेसिंग- प्रसंस्करण शुरू कर बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है। दूध से शुद्ध पनीर, दानेदार खोया, ताजी क्रीम, मठा जैसे अन्य उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जो सीधे ग्राहकों तक प्रसंस्करण उत्पाद पहुंचाने से उन्हें दूध के मुकाबले कहीं अधिक मुनाफा मिल रहा है। पशुपालक श्री शुक्ला ग्राम करकबेल क्षेत्र के अन्य पशुपालकों व किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उनका मानना है कि यदि पशुपालन को पारंपरिक तरीके के बजाय वैज्ञानिक और व्यावसायिक तरीके से किया जाए, तो यह अर्थव्यवस्था को बदलने की ताकत रखता है।
उप संचालक पशु चिकित्सा विभाग नरसिंहपुर डॉ. सुनील बृजपुरिया ने बताया कि जिले में ऐसे अनेक प्रगतिशील पशुपालक हैं, जो उन्नत नस्लों का पालन कर अपनी आय को दोगुना कर रहे हैं और लाभ ले रहे हैं। दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के अंतर्गत ऐसे कई पशुपालक सामने आए, जिससे इनके द्वारा अन्य पशुपालकों को प्रेरणा मिली है।
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