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राज्य कृषि समाचार (State News)

परंपरागत खेती से हटकर चिया सीड उगाया, 90 दिन में फसल तैयार; मजबूत सिंह को ₹25 हजार क्विंटल तक मिल रहा भाव  

27 सितंबर 2026, भोपाल: परंपरागत खेती से हटकर चिया सीड उगाया, 90 दिन में फसल तैयार; मजबूत सिंह को ₹25 हजार क्विंटल तक मिल रहा भाव – मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के ग्राम दौलतगंज निवासी कृषक मजबूत सिंह गुर्जर परंपरागत खेती की चुनौतियों और बढ़ती लागत से अलग कुछ नया करना चाहते थे। खेती में रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग और कम मुनाफे के कारण वे कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसलों के विकल्प तलाश रहे थे। उनका उद्देश्य सीमित संसाधनों के बावजूद कृषि को लाभप्रद और टिकाऊ व्यवसाय बनाना था।

कृषि विभाग के मार्गदर्शन से अपनाई चिया सीड की खेती

मजबूत सिंह गुर्जर की इस सोच को नई दिशा तब मिली, जब कृषि विभाग के बीटीएम (ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर) राकेश धाकड़ और जिला स्तरीय कृषि अधिकारियों ने गांव में चौपाल लगाकर किसानों को प्रेरित किया। कृषि विभाग के उप संचालक मुनेश शाक्यवार एवं बीटीएम के सतत मार्गदर्शन से प्रभावित होकर उन्होंने जैविक, प्राकृतिक एवं शून्य प्रतिशत लागत वाली चिया सीड की खेती अपनाने का संकल्प लिया।

एक बीघा में 1 किलो बीज, 90 दिन में फसल तैयार

मजबूत सिंह ने रबी सीजन में अपने खेत को एक जुताई और पटेला फेरकर तैयार किया। इसके बाद प्रति बीघा मात्र 1 किलोग्राम चिया सीड के बीज की बुआई की। इस फसल में किसी विशेष या महंगे रासायनिक खाद की आवश्यकता नहीं पड़ी। मात्र 90 दिनों में फसल पककर तैयार हो गई। उन्हें प्रति बीघा 2.25 से 3.5 क्विंटल तक उपज प्राप्त हुई। नीमच और मंदसौर जिले की मंडियों में चिया सीड का भाव ₹25,000 प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। इससे उन्हें कम समय और न्यूनतम लागत में बेहतर मुनाफा हासिल हुआ।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

इस सफलता के बाद मजबूत सिंह गुर्जर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बने हैं। वे गांव-गांव जाकर किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने, महंगी खादों से बचने तथा चिया सीड जैसी उच्च मूल्य वाली नकदी फसलों की खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और नवाचार से कम लागत में भी कृषि से बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है।

कृषि विभाग का जताया आभार

किसान मजबूत सिंह गुर्जर ने सरकार की योजना के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कृषि विभाग और जिला प्रशासन द्वारा किसानों के द्वार तक पहुंचकर दिए जा रहे सतत मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने उप संचालक कृषि मुनेश शाक्यवार, बीटीएम राकेश धाकड़ और कृषि विभाग की पूरी टीम का धन्यवाद किया। उनका कहना है कि विपरीत मौसम में भी अधिकारियों का खेत-खेत पहुंचकर मार्गदर्शन देना उनकी सफलता की मुख्य कुंजी बना।

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