राज्य कृषि समाचार (State News)

विभिन्न फसलों के लिए किसानों को उपयोगी सलाह

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15 दिसम्बर 2022, खंडवा: विभिन्न फसलों के लिए किसानों को उपयोगी सलाह – उप संचालक कृषि, खंडवा ने विभिन्न फसलों तुवर,गेहूं ,चना , मटर और सरसों के लिए किसानों को उपयोगी सलाह दी है। जिसका पालन करने से अच्छी पैदावार ली जा सकती है।

उप संचालक कृषि ने किसानों को सलाह दी है कि यदि अरहर में चित्तीदार फली भेदक के नियंत्रण हेतु प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी. (2 मिली /ली) या डीका 6 पी (2 ग्राम/ली.) का पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। जून से बोई गई अरहर की कम अवधि की किस्मे इस माह कटाई के लिए तैयार हो जाती है। फसल का रंग सुनहरा भूरा होने पर कटाई कर लेनी चाहिए। गेहूं  उत्पादक  किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की बुवाई के 20-21 दिन बाद मुख्य जड़ बनने की अवस्था पर सिंचाई अवश्य करें। देरी से बुवाई की दशा में बीज की अनुशंसित मात्रा में 20-25 कि.ग्रा./ है की दर से बढाकर बुआई करें। सिंचित दशा में देरी से बोने हेतु उपयुक्त पछेती प्रजातियां एच.आई.1418, एम.पी 4010, जेडब्ल्यू 1202, जेडब्ल्यू 1203, एच. डी 2932 ( पूसा-111), एमपी 3336, राज 4238, इत्यादि किस्मों का चयन क्षेत्र की अनुकूलता के आधार पर करें। गेहूँ में यूरिया का उपयोग सिंचाई उपरान्त ही करे, जिससे नत्रजन का समुचित उपयोग हो सके।

इसी तरह चना उत्पादक किसानों को सलाह दी है कि जब चने की फसल 20-25 सेमी की हो जाए तो खटाई (निपिंग) अवश्य करें, जिससे पौधों पर अधिक शाखाएँ निकले और उपज में वृद्धि हो सके। चने की खुटाई बुवाई के 30-40 दिनों के भीतर पूर्ण करे। इसे 40 दिन बाद नहीं करनी चाहिए। सिंचित दशा में पहली सिंचाई  शाखाएँ  बनते समय तथा दूसरी सिचाई फली बनते समय देना चाहिए। सिंचाई  हल्की करे, सिंचाई स्प्रिंकलर द्वारा की जा सकती है। चने में फूल बनने की सक्रिय अवस्था में सिचाई नहीं करनी चाहिए। प्रायः चने की खेती असिंचित दशा में की जाती है। यदि पानी की सुविधा हो तो फली बनते समय एक सिंचाई  अवश्य करें । चने के खेत में कीट नियंत्रण हेतु टी आकार की खूटियाँ (35-40/हे.) लगाये। चने की फसल में चने की इल्ली का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर (1-2 लार्वा/मी पक्ति) तक पहुँच  जाये तो इसके नियंत्रण हेतु क्यूनालफास या प्रोपेनोफास कीटनाशी दवा को 2.मिली/ली पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

उप संचालक कृषि ने बताया है कि मटर की फसल में एक या दो सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई बुवाई के 45दिन बाद तथा यदि दूसरी सिचाई की आवश्यकता हो तो फली बनने के समय देना चाहिए। मटर की फसल की पत्तियों पर धब्बे दिखाई दे तो मेन्काजेब 2ग्रा. या कार्बेन्डाजिम + मेन्काजेब (साफ) 2 ग्रा/ ली पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। मसूर फसल में पहली निदाई (निराई) बुवाई के 20-25 दिन बाद तथा दूसरी 45-60 दिन बाद करके खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता है। सिंचित क्षेत्रों में सामान्यतः बुवाई के 45-60 दिन बाद एक हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है। फसल में फूल व फलियां  बनने की अवस्था में सिंचाई करने से फसल की हानि होती है। गन्ना उत्पादक किसान भाई शीतकालीन गन्ने की फसल में गुड़ाई  करे। खेत में नमी की कमी होने पर सिंचाई कर सकते हैं ।

सरसों की फसल में पौधों  की संख्या अधिक होने पर बुवाई के 20-25 दिन बाद निराई गुदाई कर छटाई करें ।  घने  पौधों को निकालकर पौधों  के बीच  की दूरी 15-20 से.मी. रखें । जिससे पौधों  का विकास अच्छा हो। सरसों में सिंचाई, जल की उपलब्धता के आधार पर करें। यदि एक सिंचाई  उपलब्ध हो तो 50-60 दिनों की अवस्था पर करें। दो सिंचाई उपलब्ध होने की अवस्था में पहली सिंचाई , बुवाई के 40 50 दिनों बाद एवं दूसरी 90-100 दिनों बाद करें। यदि तीन सिंचाई उपलब्ध है तो पहली 30-35 दिन पर व अन्य दो 30 -35 दिनों के अन्तराल पर करें बुवाई के लगभग 2 माह बाद जब फलियों  में दाने भरने लगे उस समय दूसरी सिंचाई  करें। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में तापमान में तीव्र गिरावट के कारण पाले की भी आशंका रहती है। इससे फसल बढवार और फली विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है। इससे बचने के लिए सल्फर युक्त रसायनों का प्रयोग लाभकारी होता है। डाई मिथाइल सल्फो आक्साइड का 0.2 प्रतिशत अथवा 01 प्रतिशत थायो  यूरिया  का छिडकाव लाभप्रद होता है। थायोयूरिया 500 ग्राम 500 लीटर पानी में घोल बनाकर फूल आने के समय एवं दूसरा छिड़काव फलिया बनने के समय प्रयोग करें। इससे फसल का पाले से भी बचाव होता है। उन्होंने बताया है कि सिंचाई  हेतु स्प्रिंकलर. रेन-गन, ड्रिप इत्यादि का उपयोग करें  जिससे सिंचाई के जल का समुचित उपयोग हो सके। रबी दलहन में हल्की सिंचाई (4-5 सेमी) करनी चाहिए क्योकि अधिक पानी देने से अनावश्यक वानस्पतिक वृद्धि होती है एवं दाने की उपज में कमी आ जाती है। रबी फसलों की पत्तियो पर धब्बे दिखाई दे तो मेन्काजेब 2 ग्रा. या कार्बेन्डाजिम + मेन्काजेब (साफ) 2 ग्रा/ ली पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें। जब भी पाला पड़ने की आशंका ही या मौसम विभाग द्वारा पाले की चेतावनी दी गई हो तो फसल में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए।

महत्वपूर्ण खबर: कपास मंडी रेट (14 दिसम्बर 2022 के अनुसार)

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