राज्य कृषि समाचार (State News)

टीकमगढ़ में बेमौसम बारिश से गेहूं फसल पर असर, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कटाई और भंडारण में सावधानी की दी सलाह  

24 मार्च 2026, टीकमगढ़: टीकमगढ़ में बेमौसम बारिश से गेहूं फसल पर असर, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कटाई और भंडारण में सावधानी की दी सलाह – मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में पिछले दिनों अचानक मौसम में बदलाव से कई जगह पर बेमौसम, ओलावृष्टि या तेज हवाओ से रबी फसलें जैसे गेंहूँ, चना, मसूर, सरसों आदि अपने परिपक्वता या कटने की अवस्था में है पर अभी कोई बुरा प्रभाव नहीं है। चूँकि दूसरे दिन से मौसम साफ हो गया और तेज धुप से हुई बारिश का पानी सूख गया लेकिन मार्च और अप्रैल में अक्सर ऐसे मौसम आते है जब फसल कटाई की अवस्था में होती है।

इसलिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को यह सलाह दी जाती है कि बेमौसम बारिश, विशेषकर कटाई के समय होने वाली बारिश, गेहूँ की फसल और उसकी गुणवत्ता (चमक) पर बहुत नकारात्मक प्रभाव डालती है। जब पकी हुई फसल पर बारिश का पानी पड़ता है, तो दानों की ऊपरी सतह की प्राकृतिक चमक खत्म हो जाती है, वे धुंधले या काले पड़ने लगते हैं, जिससे बाज़ार में उनकी कीमत कम हो जाती है। बारिश के कारण दानों में नमी की मात्रा बढ़ जाती है।

भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहूं के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित किए गए हैं, जिसमें 12 प्रतिशत तक नमी मान्य है। प्रमुख मानकों के अनुसार, गेहूं स्वच्छ, चमकदार, 2 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त/दागदार दाने, 6 प्रतिशत तक सूखे/टूटे दाने, और 0.75 प्रतिशत से कम विदेशी पदार्थ होने चाहिए। मानकों से अधिक नमी होने पर दानों की गुणवत्ता खराब मानी जाती है। लगातार बारिश या ओलावृष्टि से दानों के ऊपर फंगस लग सकती है, जिससे दाने काले पड़ जाते हैं और उनकी क्वालिटी खराब हो जाती है। अधिक नमी और बारिश के कारण, अगर फसल की कटाई में देरी होती है, तो दाने बालियों में ही अंकुरित होने लगते हैं। इससे गेहूँ पूरी तरह बेकार हो सकता है। बारिश से फसल के गिरने या दानों के भीगने से दानों का वजन कम हो जाता है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित होती हैं।

फसल को गिरने से बचाएं और कटी हुई फसल को नमी से बचाकर रखें। खेत में पानी जमा न होने दें। मेढ़ों को खोलकर अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें, क्योंकि जलभराव से फसलें सड़ सकती हैं। मौसम साफ होने और धूप निकलने तक कटाई या मड़ाई न करें। यदि फसल हवा से गिर गई है, तो उसे उठाने की कोशिश न करें। फसल के गिरने की उल्टी दिशा में कटाई करें, ताकि दाना कम गिरे, बारिश के तुरंत बाद कटाई न करें। जब धूप निकले और नमी कम हो जाए, तभी कटाई करें। यदि फसल कट चुकी है, तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें। खेत में ही है, तो तिरपाल या प्लास्टिक शीट से ढकें।

बारिश और नमी के बाद फसल में फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाता है। यदि एक सप्ताह बाद मौसम खराब होने की संभावना दिखती है, तो कटाई के साथ-साथ थ्रेशिंग (गेहूं निकालने) की प्रक्रिया भी जल्द से जल्द पूरी कर अनाज को सुरक्षित स्थान या गोदामों में पहुंचा देना चाहिए। कटी हुई फसल को खेत में ही 2-3 दिन कड़ी धूप में अच्छी तरह सुखाएं। इससे दानों में नमी कम होगी और स्टोरेज में फफूंद नहीं लगेगी।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह से फफूंदनाशक का छिड़काव करें। फसल का नुकसान होने पर 72 घंटों के भीतर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनी को सूचित करें, ताकि कटाई के बाद भी फसल का बीमा क्लेम मिल सके फसल उत्पाद का भण्डारण 8-10  प्रतिशत नमी के स्तर पर करें।

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