अमरूद की खेती से श्योपुर की इस महिला ने बदली जिंदगी, सालाना कमा रही 2 लाख तक की आमदनी; जानिए कैसे
26 नवंबर 2025, श्योपुर: अमरूद की खेती से श्योपुर की इस महिला ने बदली जिंदगी, सालाना कमा रही 2 लाख तक की आमदनी; जानिए कैसे – मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में एनआरएलएम अंतर्गत संचालित स्वसहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल सामाजिक रूप से सशक्त हो रही है, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आजीविका बढाने का कार्य कर रही है।
श्योपुर जिले में एनआरएलएम अंतर्गत 5 हजार 609 स्वसहायता समूह संचालित है, जिनसे 62 हजार के लगभग महिलाएं जुडी हुई है, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में इस वित्तीय वर्ष में समूहों को अभी तक लगभग 30 करोड रूपये की सीसीएल राशि उपलब्ध कराई गई है, जिससे महिलाएं समूहों के माध्यम से आजीविका मूलक गतिविधियों को अपनाते हुए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही है।
श्योपुर जिले के ग्राम सोईकलां निवासी श्रीमती आशा बाई सामान्य महिला के रूप में जीवन व्यतीत कर रहीं थी, पुश्तैनी जमीन पति को हिस्से मिली, लेकिन थोडी सी जमीन होने से खेती से होने वाली आय से घर का गुजर बसर बमुश्किल हो रहा था। एनआरएलएम अंतर्गत संचालित बाबा ठाकुर स्वसहायता समूह से जुडने के बाद उसके जीवन में बदलाव आना शुरू हुआ।
समूह के माध्यम से उसे आजीविका गतिविधि करने का हौसला मिला और 50 हजार रूपये का ऋण लेकर उसने अपनी जमीन पर अमरूद का बगीचा लगाया, वर्ष 2020 में लगाये गया अमरूद का बगीचा अब नियमित अमदानी का जरिया बन गया है। वे बताती है कि अमरूद की फसल बेचकर वे साल में डेढ से दो लाख रूपये की आय प्राप्त कर रही है। इसके साथ ही समूह के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर बैंक सखी भी बन गई है, जिससे 5 हजार रूपये की मासिक आमदनी भी हो रही है। समूह से जुडकर आजीविका गतिविधि और बैंक सखी के रूप में मिलने वाले मानदेय राशि से अब घर का गुजर बसर ठीक तरह से हो रहा है तथा परिवार आर्थिक संपन्नता की ओर बढ रहा है।
वर्तमान में वे बाबा ठकुर समूह की सदस्य है तथा समूह की बचत 80 हजार रूपये है, उनकी स्वयं की व्यक्तिगत बचत समूह में 8 हजार रूपये है, समूह को सरकार की ओर से 20 हजार रूपये की रिवॉलिंग फंड की राशि भी प्राप्त हुई है, इसके साथ ही शासन की योजना के तहत समूह को 6 लाख रूपये की सीसीएल राशि भी मिली है, जिससे समूह की अन्य सदस्यों द्वारा भी आजीविका मूलक गतिविधियों को अपनाया गया है।
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