कृषि अनुसन्धान विधियों, नई तकनीकियों के शोध-पत्र प्रकाशन की महती आवश्यकता है

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12 जुलाई 2021, उदयपुर  कृषि अनुसन्धान विधियों, नई तकनीकियों के शोध-पत्र प्रकाशन  की महती आवश्यकता हैमहाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के तत्वावधान में अनुसन्धान विधियों एवं आलेख लेखन पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो0 नरेन्द्र सिंह राठौड़, कुलपति महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय, उदयपुर ने बताया कि विश्व स्तर पर नये अनुसन्धान करने के लिए कृषि में नवाचार की सतत आवश्यकता रहती है । आज देश में कृषि वैज्ञानिकों एवं अनुसन्धानकर्ता विद्यार्थियों द्वारा नये-नये अनुसन्धान कार्य किये जा रहे है, लेकिन वैज्ञानिक अनुसन्धान के अन्तर्राष्टीªय स्तर पर अमेरिका, दक्षिणी कोरिया तथा जापान जैसे देश अग्रिणी भूमिका में हैं । भारत में कृषि के क्षेत्र में नये अनुसन्धान तथा इन अनुसन्धानों के आधार पर विकसित नई तकनीकियों को अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर आलेखित करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली अनुसन्धान पत्रिकाओं में शौध-पत्र प्रकाशित करने की आज के समय की महति आवश्यकता है । वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों के अनुसन्धान कार्यो को अच्छी अनुसन्धान पत्रिकाओं में, जिनकी नास रेटिंग छः से उपर हो उनमें प्रकाशन पर जोर दिया जा रहा है, इसके लिऐ अनुसन्धान पत्र लिखने की अन्तर्राष्ट्रीय शैली, अन्तर्राष्ट्रीय अनुसन्धान पत्रिकाओं की विश्वस्तर पर रैकिंग तथा प्रभाव की जानकारी होना आवश्यक है । उन्होने एस.सी.आई. का उदाहरण देते हुऐ बताया कि इस इण्डेक्स के दो हजार से ज्यादा अनुसन्धान पत्रिकाऐं आलेखित हैं, जिनको विश्व स्तर पर बहुत अच्छा माना जाता है तथा 105 से अधिक विषयों की नो हजार से अधिक अनुसन्धान पत्रिकाऐं प्रकाशित की जाती है ।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता rडॉ दिलीप सिंह द्वारा स्वागत भाषण के दौरान महाविद्यालय में वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों द्वारा किये जा रहे अनुसन्धान कार्यो की सराहना करते हुऐ कृषि वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने शौध-पत्रों को अन्तर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त शौध पत्रिकाओं में प्रकाशित करें साथ ही उन्होने किसानोंपयोगी अनुसन्धान पर ओर अधिक बल देने की आवश्यकता जताई । rडॉ दिलीप सिंह ने यह भी बताया कि इस परिपेक्ष्य में आज की वेबिनार कृषि वैज्ञानिकों एवं शौध कार्य से जुडे विद्यार्थियों के लिऐ उच्च गुणवत्ता के शौध कार्य एवं उनका प्रकाशन में यह वेबिनार सार्थक सिद्ध होगी ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता rडॉ एस.के. सोम, अध्यक्ष, राष्ट्रीय कृषि  अनुसन्धान प्रबन्धक अकादमी, हैदराबाद ने अनुसन्धान विधियों एवं आलेख लेखन पर प्रकाश डाला तथा बताया कि अनुसन्धान पत्रों में उनका सामग्री, पद्धति, डेटा संकलन, डेटा गणना तथा अंग्रेजी लेखन पद्धति, सन्दर्भ उद्रण के विभिन्न प्रचिलित बिन्दुओं पर विस्तृत जानकारी दी । उन्होने नये साफ्टवेयर माध्यम से आंकड़ा विश्लेषण तथा अनुसन्धान पत्र का ढ़ांचा तैयार करने का आसान तरीका बताया । उन्होने कहा कि अनुसन्धान पत्रिका इम्पेक्ट फैक्टर के साथ अनुसन्धान पत्रिका की विश्व की मान्यता प्राप्त डेटा साईटेशन इण्डेक्स से उनकी सम्बद्धता के उपयोगी पहलुओं पर प्रकाश डाला । उन्हांेने अनुसन्धान पत्र लिखने की तकनीकी पहलुओं का सभी विद्यार्थियों तथा वैज्ञानिकों का सत्त रूप से कौशल उन्नयन पर विशेष जोर दिया ताकि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के कृषि क्षेत्र में अच्छे अनुसन्धानों की ओर अधिक पहचान बन सके ।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के अनुसन्धान निदेशक rडॉ एस0के0 शर्मा ने बताया कि विश्व स्तर पर यह माना जाता है कि एक अच्छा अनुसन्घानकर्ता वो होता है जिसका एच-इण्डेक्स उसकी आयु के बराबर होना चाहिऐ साथ ही यह बताया कि केवल एच-इण्डेक्स ही अच्छे  अनुसन्धानकर्ता का मापक नहीं है क्योंकि किसानोंपयोगी तकनीकी विकास तथा उपयोगी पेटेन्ट का विकास अच्छे अनुसन्धानकर्ता के महत्वपूर्ण निर्धारण कारक है ।

कार्यक्रम के अन्त में डॉ. रामहरि मीणा, विभागाध्यक्ष, मृदा विज्ञान विभाग नेसभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन rडॉ विरेन्द्र नेपालिया, विशेषधिकारी, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने किया । कार्यक्रम के सफल संचालन में rडॉ रमेश बाबू, सहायक प्राध्यापक कीट विज्ञान एवं प्रशासनिक अधिकारी, rडॉ धर्मपाल सिंह, सहायक प्राध्यापक, मृदा विज्ञान विभाग का योगदान रहा तथा कार्यक्रम का तकनीकी संचालन श्री पियूष चैधरी ने किया।’

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