हिरण्यगर्भा अभियान से बदलेगी पशुपालन की तस्वीर, 5 साल में 50% कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य: CM मोहन यादव
20 दिसंबर 2025, भोपाल: हिरण्यगर्भा अभियान से बदलेगी पशुपालन की तस्वीर, 5 साल में 50% कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य: CM मोहन यादव – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पशुधन विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और इन संभावनाओं को साकार करने के लिए पशुओं का नस्ल सुधार सबसे सशक्त माध्यम है। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा हिरण्यगर्भा अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार अगले पांच वर्षों में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) का कवरेज 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
चालू वित्त वर्ष में 28.04 लाख पशुओं का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में प्रदेश के कुल मादा पशुओं में से 28.04 लाख (लगभग 33 प्रतिशत) गौवंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य रखा गया है। अप्रैल से नवम्बर 2025 के बीच प्रदेश में 11.76 लाख से अधिक पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कर उल्लेखनीय प्रगति हासिल की गई है।
पशुपालन बनेगा लाभ का व्यवसाय
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिरण्यगर्भा अभियान के माध्यम से पशुपालन को लाभ का व्यवसाय बनाया जा रहा है, जिससे पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। यह अभियान प्रदेश में पशुधन विकास की दिशा में एक प्रभावशाली पहल बनकर उभरा है।
20वीं पशु संगणना के आंकड़े
हाल ही में हुई 20वीं पशु संगणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 290.57 लाख से अधिक गौवंशीय एवं भैंस वंशीय पशु उपलब्ध हैं। इनमें से 77.18 लाख पशु (लगभग 27 प्रतिशत) उन्नत नस्ल के हैं, जिन्हें और बेहतर बनाने के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम तेज किए जा रहे हैं।
केंद्रीय योजनाओं में MP अग्रणी
मुख्यमंत्री ने बताया कि पशुधन विकास से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (NADCP) के अंतर्गत फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) के टीकाकरण में प्रदेश ने वित्त वर्ष 2024-25 के चौथे और पांचवें चरण में देश में सर्वाधिक पशुओं का टीकाकरण कर ऑनलाइन दर्ज किया है। वर्तमान में चल रहे छठवें चरण में अब तक 154.16 लाख पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन में दूसरा स्थान
मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन – उद्यमिता विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त कर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।
गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
हिरण्यगर्भा अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके तहत प्रदेश की 691 चयनित गौशालाओं में उपलब्ध प्रजनन योग्य गौवंश में कृत्रिम गर्भाधान किया जा रहा है। इससे न केवल गौवंश की नस्ल और गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि गौशालाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
‘मैत्री’ योजना से घर-घर सेवा, युवाओं को रोजगार
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संचालक ने बताया कि पशुपालकों के द्वार पर कृत्रिम गर्भाधान की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने और ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार देने के उद्देश्य से वर्ष 2014-15 से प्रत्येक पंचायत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) तैयार किए जा रहे हैं।
वर्तमान वित्त वर्ष में 2399 मैत्री कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही निष्क्रिय हो चुके 1227 मैत्री कार्यकर्ताओं को रि-फ्रेशर प्रशिक्षण देकर पुनः सक्रिय किया गया है। इस वित्त वर्ष में अब तक 1.28 लाख से अधिक पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है।
‘इमर्जिंग स्टेट’ के रूप में पहचान
हिरण्यगर्भा अभियान और केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश पशुधन विकास एवं नस्ल सुधार के क्षेत्र में ‘इमर्जिंग स्टेट’ के रूप में पहचान बना रहा है। इससे पशुपालकों की दैनिक आय में बढ़ोतरी, रोजगार के नए अवसर और ग्रामीण समृद्धि को नई मजबूती मिल रही है।
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