राज्य कृषि समाचार (State News)

बालाघाट के सिंघाड़ा बीज महाराष्ट्र के किसानों को बनाएंगे आत्मनिर्भर

12 जनवरी 2026, बालाघाट: बालाघाट के सिंघाड़ा बीज महाराष्ट्र के किसानों को बनाएंगे आत्मनिर्भर – बालाघाट जिले में मिश्रित खेती और नवाचार के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कटंगी विकासखंड के ग्राम लोहमारा के उन्नतशील किसान श्री गुरुदयाल तामेश्वर ने बिना कांटे वाले सिंघाड़ा उत्पादन कर एक नई मिसाल कायम की है। उनके खेत में उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाले सिंघाड़ा के अंकुरित बीज अब महाराष्ट्र के  किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का आधार बनने जा रहे हैं।

श्री तामेश्वर द्वारा उत्पादित 274 किलो बिना कांटे वाले सिंघाड़ा बीज का चयन कृषि विज्ञान केंद्र साकोली (भंडारा) एवं पंजाबराव कृषि महाविद्यालय, अकोला (महाराष्ट्र) द्वारा किया गया है। चयनित बीज को आगे अनुसंधान एवं प्रसार के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र साकोली ले जाया गया है, जिससे भविष्य में अधिक किसानों तक यह उन्नत बीज पहुंच सकेगा।

किसान श्री गुरुदयाल तामेश्वर ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों की मेहनत और विश्वास का सम्मान है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्हें विश्वास है कि यह सिंघाड़ा बीज अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने अन्य किसानों से भी नई तकनीकों को अपनाने और कृषि विज्ञान केंद्र से निरंतर संपर्क में रहने की अपील की। उनके नवाचार और योगदान को देखते हुए उन्हें जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में भी चयनित किया गया है।

कृषि विज्ञान केंद्र साकोली, भंडारा की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. उषा डोंगरवार ने श्री तामेश्वर के खेत का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि बालाघाट में उत्पादित यह सिंघाड़ा बीज अब कृषि विज्ञान केंद्र साकोली के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगा। इससे भंडारा सहित आसपास के क्षेत्रों में सिंघाड़ा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसान लाभान्वित होंगे। श्री गुरुदयाल तामेश्वर द्वारा की जा रही सिंघाड़ा खेती से न केवल उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ मिल रहा है, बल्कि वे अन्य किसानों को भी इस खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके बीज से अन्य किसान भी सिंघाड़ा उत्पादन कर अपनी आय में वृद्धि करेंगे। यह पहल बालाघाट जिले के किसानों के लिए नवाचार, आत्मनिर्भरता और कृषि विकास की नई दिशा साबित हो रही है।

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