जागृति यात्रा के लिए चयनित श्यामनारायण ने बढ़ाया क्षेत्र का गौरव
12 राज्यों में विभिन्न नवाचार केंद्रों का किया भ्रमण
16 जनवरी 2026, (दिलीप दसौंधी, कृषक जगत, मंडलेश्वर): जागृति यात्रा के लिए चयनित श्यामनारायण ने बढ़ाया क्षेत्र का गौरव – मंडलेश्वर निवासी श्री श्यामनारायण विश्वकर्मा ( 25 ) आरएके कृषि महाविद्यालय ,सीहोर में एमएससी (कीट विज्ञान ) के अंतिम वर्ष के छात्र हैं , जिनका चयन जागृति यात्रा के तहत देश भर के उन 525 युवाओं के साथ लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के उपरांत हुआ था , जो युवा उद्यमी के रूप में स्टार्टअप के माध्यम से अपना भविष्य संवार रहे हैं। श्री विश्वकर्मा स्वफल फाउंडेशन के कोफाउंडर और सीईओ हैं। नवंबर में रेल से की गई इस 15 दिवसीय यात्रा में 12 राज्यों में 8 हज़ार किमी का सफर तय कर प्रतिभागियों ने देश के विभिन्न शहरों में प्रमुख औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक नवाचार केंद्रों का भ्रमण कर प्रमुख उद्योगपतियों , स्टार्टअप फाउंडर्स , सामाजिक उद्यमियों से संवाद कर उनसे उद्यमिता के गुर सीखे। बता दें कि स्वावलंबी भारत अभियान के तहत जागृति यात्रा का यह 18 वां वर्ष था।
श्री श्यामनारायण विश्वकर्मा ने कृषक जगत को बताया कि जागृति यात्रा में शामिल 525 युवा अपने स्टार्टअप के माध्यम से देश में लीक से हटकर बदलाव लाना चाहते हैं। 12 राज्यों में 8 हज़ार किमी की हुई इस यात्रा में प्रतिभागियों ने मुंबई , दिल्ली , वाराणसी, अहमदाबाद, जयपुर सहित अन्य प्रमुख शहरों का भ्रमण कर वहां की कार्यशैली को देखा। देश के शीर्ष समाजसेवियों और उद्यमियों के साथ संवाद किया।उड़ीसा के गंजम में ग्राम विकास संस्था द्वारा किए जा रहे वेस्ट मैनेजमेंट को देखा, तो दिल्ली में सामाजिकता के तहत किए जा रहे मानवीय सहयोग के कई रूप देखने को मिले। इसरो भी गए। वहां के अनुशासन और देश के प्रति सम्मान ने एक अलग भाव जगाया। सिक्किम में होटल रिसोर्ट की कार्य प्रणाली देखी। विशाखापत्तनम और कटक जैसे केंद्रों पर ग्रामीण उद्यमियों से मिलकर यह सीखा कि कैसे छोटे स्तर पर नवाचार कर कृषि को लाभ का सौदा बनाया जाए। इस यात्रा के दौरान यह विश्वास दृढ हुआ कि उद्यमिता से देश में बदलाव लाया जा सकता है। प्रतिभागियों ने लोकतंत्र के मंदिर (संसद ) में आत्म निर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
उल्लेखनीय है कि श्री विश्वकर्मा स्वफल फाउंडेशन के कोफाउंडर और सीईओ हैं। वे एक विशिष्ट कार्य प्रणाली पर कार्य करने का विचार रखते हैं । उनका कहना है कि कीट विज्ञान के ज्ञान को प्राचीन आध्यात्मिक पद्धतियों के साथ जोड़कर खेती को रसायन मुक्त टिकाऊ बनाया जा सकता है। बायोडायोनेमिक्स के ज़रिए इसे किया जा सकता है। अध्यात्म और विज्ञान के सफल मेल की उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि कैसे ‘प्रकृति,आध्यात्मिकता और आधुनिक विज्ञान ‘ का संतुलन खेती की लागत कम कर किसानों की आय बढ़ा सकता है। जिस प्रकार प्रकाश संश्लेषण में सूरज की प्रमुख भूमिका रहती है , वैसे ही चंद्रमा की ऊर्जा का कैसे उपयोग किया जाए यह विचारणीय है। इसी तरह अन्य ग्रहों के अध्ययन के साथ ही औषधीय पौधों का इस्तेमाल भी रसायन मुक्त खेती में मदद कर सकता है। जागृति यात्रा से लौटने के बाद अब वे अपने इस अनुभव को क्षेत्रीय किसानों के साथ साझा करने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि जागृति यात्रा ने उनके इस विचार को और मजबूती दी है कि भविष्य की खेती रासायनिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक होगी। उनका लक्ष्य है कि अपने वैज्ञानिक शोध और आध्यात्मिक सिद्धांतों से किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला सकें ।
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