अध्यात्म, विज्ञान और 8000 किमी का सफर: जाग्रति यात्रा पूरी कर लौटे क्षेत्र के होनहार श्यामनारायण विश्वकर्मा
12 जनवरी 2026, भोपाल: अध्यात्म, विज्ञान और 8000 किमी का सफर: जाग्रति यात्रा पूरी कर लौटे क्षेत्र के होनहार श्यामनारायण विश्वकर्मा – देश की सबसे बड़ी उद्यमिता यात्रा ‘जाग्रति यात्रा 2025’ को सफलतापूर्वक संपन्न कर हमारे क्षेत्र के होनहार युवा और कृषि विशेषज्ञ श्री श्यामनारायण विश्वकर्मा अपने गृह नगर लौट आए हैं। 15 दिनों के इस सफर में उन्होंने रेल के माध्यम से देश के 12 अलग-अलग पड़ावों (जैसे कन्याकुमारी, बेंगलुरु, कटक, विशाखापत्तनम और अन्य) की यात्रा की और ‘अमृत काल’ के भारत की जमीनी हकीकत को करीब से जाना I
कीट विज्ञान से लेकर जमीनी समाधानों तक सीहोर कृषि महाविद्यालय से कीट विज्ञान (Entomology) में एम.एससी. कर रहे श्यामनारायण ने अपनी यात्रा के दौरान देश के शीर्ष समाजसेवियों और उद्यमियों (जैसे अरविंद आई हॉस्पिटल, द्रोणाचार्य और ग्रामीण विकास केंद्रों) के साथ संवाद किया। जहाँ अन्य प्रतिभागी मुख्य रूप से आईटी और मैनेजमेंट में व्यस्त थे, वहीं श्यामनारायण ने पूरे रास्ते इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि कैसे कीट विज्ञान के वैज्ञानिक ज्ञान को प्राचीन आध्यात्मिक पद्धतियों के साथ जोड़कर खेती को टिकाऊ बनाया जा सकता है।
अध्यात्म और विज्ञान का सफल मेल उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि कैसे “प्रकृति, आध्यात्मिकता और आधुनिक विज्ञान” का संतुलन खेती की लागत कम कर किसानों की आय बढ़ा सकता है। उन्होंने विशाखापत्तनम और कटक जैसे केंद्रों पर ग्रामीण उद्यमियों से मिलकर यह सीखा कि कैसे छोटे स्तर पर नवाचार (Innovation) कर कृषि को लाभ का सौदा बनाया जाए।
क्षेत्र के किसानों के लिए बनेंगे मार्गदर्शक श्यामनारायण का चयन देशभर के हजारों आवेदकों में से उनकी इसी विशिष्ट सोच के कारण हुआ था। यात्रा से लौटने के बाद अब वे अपने इस अनुभव को क्षेत्रीय किसानों के साथ साझा करने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि जाग्रति यात्रा ने उनके इस विचार को और मजबूती दी है कि भविष्य की खेती रासायनिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक होगी।
उनकी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। स्थानीय प्रशासन और किसान संगठनों ने उन्हें इस सफल यात्रा के लिए बधाई दी है और इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
“8000 किलोमीटर की इस रेल यात्रा ने मुझे सिखाया कि असली भारत गांवों में है। अब मेरा लक्ष्य है कि मैं अपने वैज्ञानिक शोध और आध्यात्मिक सिद्धांतों से किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला सकूँ।”
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