राज्य कृषि समाचार (State News)

शिवपुरी जिले को मिला डीएपी का नया स्टॉक

19 सितम्बर 2025, शिवपुरी: शिवपुरी जिले को मिला डीएपी का नया स्टॉक – जिले में उर्वरकों की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए  गत दिनों  चंबल कंपनी की डीएपी की रैक शिवपुरी रैक पॉइंट पर लगाई गई। इससे जिले को कुल 887 मीट्रिक  टन डीएपी प्राप्त हुआ है। प्राप्त उर्वरक में से 06 डबल लॉक गोदामों को 575  मी .टन, 01 मार्केटिंग सोसायटी को 60  मी .टन तथा निजी थोक विक्रेताओं को 229  मी .टन डीएपी आवंटित किया गया है। इसके वितरण का कार्य 17 सितम्बर को डबल लॉक केंद्र, मार्केटिंग सोसायटी एवं निजी बिक्री केन्द्रों के माध्यम से कलेक्टर द्वारा आदेशित अधिकारियों/कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर संपन्न कराया जाएगा।

डबल लॉक गोदामों में मार्कफेड शिवपुरी को 150  मी .टन, मार्कफेड करैरा को 75  मी .टन, मार्कफेड पिछोर को 100  मी .टन तथा मार्कफेड बदरवास, कोलारस और पोहरी को 75-75  मी .टन डीएपी प्राप्त हुआ है। विपणन सहकारी संस्था मर्यादित बैराढ को 60  मी .टन आवंटित हुआ है। निजी थोक विक्रेताओं में नरवर, खनियाधाना, पिछोर, बदरवास, कोलारस और शिवपुरी के विक्रेताओं को विभिन्न मात्रा में डीएपी उपलब्ध कराया गया है। जिसमें मां कालका ट्रेडर्स नरवर एवं गोयल कृषि सेवा केंद्र नरवर को 13-13  मी .टन, अल्का एजेंसी खनियाधाना एवं विवेक ट्रेडर्स खनियाधाना को 40-40  मी .टन, विशम्भर दयाल भौंती (पिछोर) को 12  मी .टन, अमन ट्रेडिंग कंपनी बदरवास को 35.5  मी .टन, विनोद ट्रेडिंग कंपनी को 8  मी .टन, इंडियन ट्रेडर्स को 7.50  मी .टन, प्रहलाद ट्रेडिंग कंपनी कोलारस काे 7.50  मी .टन, शिवकृपा इंटरप्राईजेज शिवपुरी को 7.50  मी .टन, अवधेश कुमार गुप्ता शिवपुरी को 5  मी .टन, गिर्राज ट्रेडिंग कंपनी को 20.50  मी .टन, नरेंद्र धाकड शिवपुरी को 5  मी .टन, रवि धाकड़ शिवपुरी को 7.50 मी .टन तथा जैन इंटरप्राइजेज को 5  मी .टन शामिल है।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि कोई भी निजी विक्रेता यदि उर्वरक की कालाबाजारी करता पाया गया या अधिक दर पर विक्रय करेगा तो उसके विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) के तहत सख्त वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। सभी कृषक भाइयों से आग्रह है कि वे खाद प्राप्त करने हेतु जिला स्तर पर न आकर अपने निकटतम सहकारी संस्था अथवा निजी विक्रय केन्द्र से ही खाद प्राप्त करें। जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक भंडारित है और किसान आवश्यकता अनुसार इसका उठाव कर सकते हैं।

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