ग्रामीण पर्यटन: गाँव और शहरी लोगों के मध्य एक सेतु

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29 जुलाई 2021, जयपुर । ग्रामीण पर्यटनरू गाँव और शहरी लोगों के मध्य एक सेतु – सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय द्वारा ग्लैमराइजिंग फार्मर एंड रूरलाइजिंग अर्बन विषयक एक दिवसीय विशेषज्ञ वार्ता का आयोजन किया गया।  महाविद्यालय द्वारा संचालित उद्योग इंटरफेज कार्यक्रम के इस पांचवें चरण की विशेषज्ञ वार्ता की संयोजिका एवं महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ मीनू श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए बताया कि ग्रामीण पर्यटन का उद्देश्य मानव कल्याणए ग्रामीण लोगों की आय और रोजगार में वृद्धि करना है जिससे गरीबी कम हो और जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके। 

विश्वविद्यालय कुलपति एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ नरेंद्र सिंह राठौड़ द्वारा बताया गया कि पर्यटन का कोई भी रूप जो ग्रामीण समुदाय द्वारा संचालित होता है उसे ग्रामीण पर्यटन कहते है। यह प्रदूषण मुक्त भारत पर केंद्रित हैए ग्रामीण और शहरी लोगों के मिश्रण एवं सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। ग्रामीण पर्यटन रोजगार और आय सृजन के अलावा कृषि गतिविधिए कृषि.मशीनीकरणए कृषि आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़ा हुआ कदम है। उन्होंने समुदाय आधारित पर्यटनए साहसिक पर्यटनए वन पर्यटनए जंगल पर्यटनए हरित पर्यटन जैसे जोधपुर के बिशोनोई समुदायए कुंभलगढ़ साहसिक यात्राए महाराष्ट्र के कनेरी मठ और कई अन्य उदाहरण देते हुए ग्रामीण पर्यटन की आवश्यकता पर भी चर्चा की। ग्रामीण पर्यटनए गाँव  और शहरी लोगों के मध्य एक सेतु का काम करेगा। 

डॉण्एसण् केण् शर्माए नोडल अधिकारी आईडीपी एवं डायरेक्टर रिसर्च द्वारा  ग्रामीण पर्यटन को इकोध्एग्रोध्सस्टेनेबल  और इको.ऑर्गेनिक टूरिज्म के रूप में चिह्नित किया गया। यह अवधारणा ऑर्गेनिक.इको हॉलिडे फार्म या निवास के रूप में विकसित हो रही है क्योंकि यह लोगों को मनोरंजन प्रदान करने के अलावा सरकार द्वारा समर्थित निवेशकों को उच्च रिटर्न देती है। 

विभागाध्यक्ष एवं आयोजन सचिव डॉ हेमू राठौर ने कार्यक्रम के आयोजन के दौरान प्रकृति संरक्षण दिवस मनाने के साथ संबोधन की शुरुआत की। आप ने बताया कि ग्रामीण भारत में एक बड़ा वर्ग हैं जो विभिन्न कलाओंए हस्तशिल्पए वस्त्र और पर्यटन द्वारा अपनी गुजर बसर करते हैं।  इसके महत्व के कारण भारत के ग्रामीण पर्यटन पर अधिक ध्यान और समर्थन देने की आवश्यकता है। ग्रामीण पर्यटन विभिन्न संस्कृतियोंए धर्मोंए भाषाओं और जीवन.शैली के लोगों को एक.दूसरे के करीब लाएगा और जीवन का एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करेगा।  

डॉ धृति सोलंकीए ने कार्यक्रम हेतु आमत्रित प्रख्यात वक्ता श्री रुपेश राय जी का सम्पूर्ण परिचय देते हुए बताया कि मेड हाउस टू मड हाउस जैसे सामाजिक उपक्रम के संस्थापकए श्री राय  समग्र ग्रामीण पर्यटन विकास की दिशा में काम करने के अलावाए उन पहलों में भी सक्रिय रूप से शामिल है जो शहरी और ग्रामीण उत्थान के बीच की खाई को पाटती हैं।  

श्री रूपेश राय के अनुसार ग्रामीण पर्यटन एक अन्य प्रकार का स्थायी पर्यटन है जो स्थानीय संसाधनों का दोहन करता है और ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता एवं रोजगार को उत्पन्न करता  है। धन अर्जित करने का बेहतर रास्ताए ग्रामीण पर्यावरण एवं संस्कृति का संरक्षणए स्थानीय लोगों की भागीदारीए  पारंपरिक मान्यताओं और मूल्यों को आधुनिक समय के अनुकूल बनाने का एक उपयुक्त तरीका भी ग्रामीण पर्यटन है । वर्तमान संदर्भ में गाँवों से शहरों में युवाओं का पलायन रोकने के लिए भी  ग्रामीण पर्यटन की आवश्यकता पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि विकसित यात्रियों और वैकल्पिक जीवन शैली हेतु  ग्रामीणों में  प्रामाणिकए सांस्कृतिक और पर्यावरण के अनुकूल अनुभव की कमी है जिसके लिए उपयुक्त सहायता ग्रामीणों को प्रदान की जानी चाहिए । डॉ अर्पिता जैन द्वारा कार्यक्रम से जुड़े प्रश्नोत्तर सत्र में विभिन्न सवाल एवं शंकाओ का समाधान किया गया।  डॉ गायत्री तिवारीए सह आयोजन सचिव ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं समग्र सामुदायिक विकास पर आधारित कार्यशैली पर प्रकाश डाला एवं कार्यक्रम समापन पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रेषित किया। डॉ जयमाला दवे ने कार्यक्रम आयोजन एवं क्रियान्वन में प्रमुख सहयोग दिया। सुश्री अंजली जुयाल द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया ।  

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