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राज्य कृषि समाचार (State News)

गुलाब की खेती ने महकाई नितिन की ज़िंदगी

31 जनवरी 2026, (दिलीप  दसौंधी, कृषक जगत, मंडलेश्वर): गुलाब की खेती ने महकाई नितिन की ज़िंदगी –  खरगोन जिले के महेश्वर निवासी श्री नितिन मालाकार उन लोगों के लिए प्रेरणादायक  हैं , जो स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। नितिन ने करीब एक लाख रु प्रति माह की नौकरी छोड़कर  गुलाब की खेती में सफलता हासिल करके यह साबित कर दिया है, कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो खेती से भी सफलता और सम्मान पाया जा सकता है।

श्री मालाकार ने कृषक जगत को बताया कि वे फूल माली समाज से हैं। इनके पिता फूलों की खेती कर फूल – माला बेचने का परंपरागत व्यवसाय करते थे। 2006 में जबलपुर से इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में बीई की डिग्री हासिल कर करीब 12 वर्षों तक अलीबाग (मुंबई) में JSW कंपनी में डिप्टी मैनेजर (इंजीनियर) के पद पर  नौकरी की। मासिक वेतन लगभग 95 हजार रुपये था। नौकरी के दौरान पुणे के पास तलेगांव -दभाणे में करीब 200  एकड़ में फूलों की खेती  देखने के बाद मन में विचार आया कि क्यों न पुश्तैनी व्यवसाय खेती को ही आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाया जाए। इसी विचार के साथ महेश्वर लौटे और  वर्ष 2020-21 में  महेश्वर में 1 एकड़ (लगभग 4000 वर्ग मीटर) भूमि पर पॉली हाउस निर्माण कर गुलाब की खेती शुरू की। इसके पूर्व उन्होंने मप्र उद्यानिकी विभाग से गुलाब की खेती की जानकारी प्राप्त की तथा नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड में ऑनलाइन आवेदन किया। इन्होंने मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक से 40 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिसमें उन्हें 28 लाख रुपये की सब्सिडी भी मिली। पॉलीहाउस में उन्होंने पहले  लाल गुलाब के 32 हजार पौधे लगाए। फिर हर वर्ष नई किस्म के अलग -अलग रंग के फूलों के  2 – 2  हज़ार पौधे लगाते रहे। आज उनके पास हॉलैंड की उन्नत किस्मों जैसे – जुमेलिया, व्हाइट अविलोंचे, रिवाइवल और टॉप सीक्रेट प्रजाति के गुलाब के हज़ारों पौधे लहलहा रहे हैं।

श्री मालाकार ने बताया कि  गुलाब की इस खेती में  औसतन 1700 से 1800 स्टेम का प्रतिदिन उत्पादन मिलता है। लूज फूल 150 -200  रु किलो और 20  स्टेम (कली ) का बंच 90 -100  रु में बिकता है। वेलेंटाइन डे पर मांग बढ़ने के साथ ही रेट भी बढ़ जाते हैं। स्टेम बंच के रेट 150 से 200 रु तक हो जाते हैं।  उत्पादित फूलों की बिक्री स्थानीय बाज़ार , खरगोन, धार और इंदौर  के अलावा जयपुर मंडी से लेकर  निर्यात बाज़ार  तक है। श्री मालाकार ने बताया कि गुलाब की इस खेती में फसल के संरक्षण  के लिए  उर्वरक और कीटनाशक आदि पर करीब 80  हज़ार रु प्रति माह खर्च आता है। पॉली हाउस में सहयोग के लिए स्थानीय स्तर पर 4 से 5 लोगों को स्थायी रोजगार भी दिया है। इन सबके बावजूद नितिन को इस आधुनिक खेती से 12 से 15 लाख रुपये तक का वार्षिक शुद्ध मुनाफा हो रहा है।  गुलाब की खेती ने नितिन की ज़िंदगी को महका दिया है।  नितिन मालाकार की यह कामयाबी की कहानी उन किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो  तकनीक, सरकारी योजनाओं और आत्मनिर्भर सोच के साथ खेती को एक लाभकारी एवं रोजगारपरक व्यवसाय बनाने का इरादा रखते हैं।

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